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मकर संक्रांति 2026 तिथि, पुण्य काल मुहूर्त, स्नान-दान का समय और घर में बचने वाली 5 बड़ी गलतियां!

मकर संक्रांति 2026
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मकर संक्रांति 2026 तिथि, पुण्य काल मुहूर्त, स्नान-दान का समय और घर में बचने वाली 5 बड़ी गलतियां!

मकर संक्रांति 2026 : मकर संक्रांति हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है, जो सूर्य देव के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश का प्रतीक है। यह दिन उत्तरायण की शुरुआत माना जाता है, जब दिन बड़े होने लगते हैं और सूर्य की ऊर्जा बढ़ती है। इस पर्व पर स्नान, दान और सूर्य पूजा से असीम पुण्य प्राप्त होता है। मकर संक्रांति 2026 इस बार 14 जनवरी 2026 (बुधवार) को मनाई जाएगी। आइए जानते हैं इस त्योहार की पूरी जानकारी, शुभ मुहूर्त और महत्वपूर्ण सावधानियां।

#मकर संक्रांति 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त

  • मुख्य तिथि: 14 जनवरी 2026 (बुधवार)
  • संक्रांति का क्षण: दोपहर 3:13 PM (IST)
  • पुण्य काल मुहूर्त: दोपहर 3:13 PM से शाम 5:45 PM तक (कुल 2 घंटे 32 मिनट)
  • महा पुण्य काल: 3:13 PM से 4:58 PM तक (सबसे शुभ समय, जहां स्नान-दान का फल कई गुना मिलता है)
  • इस दौरान किया गया स्नान, दान, सूर्य को अर्घ्य और जप-तप विशेष फलदायी होता है।
  • कई जगहों पर सुबह का समय भी शुभ माना जाता है, जैसे सुबह 7:15 से 9:00 बजे तक।
मकर संक्रांति 2026
मकर संक्रांति 2026

स्नान और दान का महत्व और विधि

मकर संक्रांति पर पवित्र नदियों (जैसे गंगा, यमुना) में स्नान का विशेष महत्व है। सुबह स्नान करके सूर्य देव को अर्घ्य दें। दान में तिल, गुड़, खिचड़ी, घी, गर्म कपड़े, कंबल और धन दान करें। तिल का दान विशेष पुण्यदायी माना जाता है।

घर में मकर संक्रांति के दिन बचने वाली 5 बड़ी गलतियां

इस पावन दिन कुछ गलतियां करने से पुण्य नष्ट हो सकता है। इनसे बचें:

  1. सुबह उठते ही भोजन न करें – पहले स्नान-दान करें, फिर भोजन ग्रहण करें।
  2. तामसिक भोजन से परहेज – लहसुन, प्याज, मांसाहार, तला-भुना या मसालेदार खाना बिल्कुल न खाएं। सात्विक भोजन जैसे तिल की खिचड़ी लें।
  3. पेड़-पौधों को नुकसान न पहुंचाएं – कटाई-छंटाई या पेड़ तोड़ना वर्जित है, इससे प्रकृति का अपमान होता है।
  4. साधु-संत या जरूरतमंद से दुर्व्यवहार न करें – उन्हें दान दें, खाली हाथ न लौटाएं।
  5. क्रोध, झगड़ा या कटु वाणी से दूर रहें – शांत और मधुर व्यवहार रखें, नशा या शराब से पूरी तरह परहेज करें।

मकर संक्रांति का महत्व और उत्सव

यह त्योहार फसल, समृद्धि और नए आरंभ का प्रतीक है। उत्तर भारत में पतंग उड़ाने, गुड़-तिल खाने और खिचड़ी बनाने की परंपरा है। दक्षिण में इसे पोंगल के नाम से मनाते हैं। इस दिन से शुभ कार्य शुरू करने की परंपरा है।

  • मकर संक्रांति 2026 पर 14 जनवरी को सही समय पर स्नान-दान करें, सूर्य देव की पूजा करें
  • और ऊपर बताई गलतियों से बचें। इससे सालभर सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति होगी।
  • परिवार के साथ मिलकर इस पर्व को धूमधाम से मनाएं।