अमावस्या कब है? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, दान का महत्व और क्या नहीं करना चाहिए!
अमावस्या कब है? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, दान का महत्व और क्या नहीं करना चाहिए!
अमावस्या कब है हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। यह वह दिन होता है जब चंद्रमा पूरी तरह से अदृश्य हो जाता है और आकाश में दिखाई नहीं देता। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अमावस्या का दिन पितरों की शांति, दान-पुण्य, पूजा-पाठ और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
हर महीने आने वाली अमावस्या का अपना अलग महत्व होता है, लेकिन कुछ विशेष अमावस्याएं जैसे सोमवती अमावस्या, शनिश्चरी अमावस्या और पितृ अमावस्या अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। इस दिन श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान कर भगवान विष्णु, भगवान शिव और पितरों का तर्पण करते हैं।

अमावस्या कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार अमावस्या कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि होती है। इस दिन चंद्रमा और सूर्य एक ही राशि में स्थित होते हैं, जिसके कारण चंद्रमा दिखाई नहीं देता।
इस बार अमावस्या तिथि का आरंभ और समापन विशेष धार्मिक महत्व रखता है। श्रद्धालु इस दिन स्नान, दान, पूजा और पितृ तर्पण कर पुण्य प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।
अमावस्या पर दान का महत्व
धार्मिक ग्रंथों में अमावस्या के दिन दान-पुण्य को अत्यंत फलदायी बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन किया गया दान कई गुना अधिक पुण्य प्रदान करता है और पितरों को भी संतुष्टि मिलती है।
अमावस्या के दिन निम्न वस्तुओं का दान शुभ माना जाता है:
- अन्न का दान
- वस्त्र दान
- काले तिल का दान
- गुड़ का दान
- घी का दान
- जरूरतमंदों को भोजन कराना
- गायों को चारा खिलाना
दान करते समय श्रद्धा और सेवा भावना का विशेष महत्व बताया गया है।
अमावस्या के दिन क्या करें?
अमावस्या के दिन कुछ विशेष धार्मिक कार्य करने की सलाह दी जाती है।
पवित्र स्नान करें!
सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर किसी नदी, सरोवर या घर में गंगाजल मिलाकर स्नान करना शुभ माना जाता है।
पितरों का तर्पण करें!
जिन लोगों के पूर्वजों का निधन हो चुका है, वे इस दिन पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म कर सकते हैं।
भगवान शिव और विष्णु की पूजा करें!
अमावस्या के दिन भगवान शिव और भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन की बाधाएं दूर होने की मान्यता है।
दीपदान करें!
- शाम के समय मंदिर या घर में दीपक जलाना शुभ माना जाता है।
- इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मकता का संचार होता है।
गरीबों की सहायता करें!
जरूरतमंद लोगों को भोजन, कपड़े या अन्य आवश्यक वस्तुएं दान करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।
अमावस्या के दिन क्या नहीं करना चाहिए?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अमावस्या के दिन कुछ कार्यों से बचना चाहिए।
नकारात्मक विचारों से दूर रहें!
इस दिन क्रोध, झूठ और विवाद से बचना चाहिए।
मांस-मदिरा का सेवन न करें!
अमावस्या को सात्विक जीवन अपनाने की सलाह दी जाती है। इसलिए मांस और शराब का सेवन नहीं करना चाहिए।
किसी का अपमान न करें!
बुजुर्गों, माता-पिता और जरूरतमंद लोगों का सम्मान करना चाहिए।
पेड़-पौधों को नुकसान न पहुंचाएं!
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पेड़-पौधों को काटना अशुभ माना जाता है।
देर तक न सोएं!
अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान और पूजा करना शुभ माना जाता है।
पितृ दोष से मुक्ति के लिए विशेष दिन
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अमावस्या तिथि पितृ दोष निवारण के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष होता है, वे इस दिन पितरों का तर्पण और दान-पुण्य करके लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
मान्यता है कि अमावस्या के दिन पितरों को याद करने और उनके नाम पर दान करने से परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
ज्योतिष में अमावस्या का महत्व
ज्योतिष शास्त्र में अमावस्या को आत्मचिंतन और आध्यात्मिक ऊर्जा का दिन माना जाता है। इस दिन ध्यान, मंत्र जाप और धार्मिक साधना करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है।
कई लोग इस दिन विशेष पूजा-अर्चना और व्रत भी रखते हैं ताकि उन्हें जीवन में सफलता और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त हो सके।
अमावस्या हिंदू धर्म की अत्यंत महत्वपूर्ण तिथियों में से एक है। इस दिन स्नान, दान, पूजा और पितृ तर्पण का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अमावस्या पर किए गए शुभ कार्यों का विशेष फल प्राप्त होता है। साथ ही इस दिन कुछ कार्यों से बचने की भी सलाह दी जाती है ताकि जीवन में सकारात्मकता और सुख-समृद्धि बनी रहे।
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