Rath Yatra Ahmedabad: साल, जब आषाढ़ माह का उजाला छाता है, तब गुजरात के दिल, अहमदाबाद की गलियां रंग-बिरंगी आस्था में डूब जाती हैं — क्योंकि आ जाता है रथ यात्रा उत्सव! 2025 में 27 जून को आयोजित हुई 148वीं रथ यात्रा ने पूरे शहर को भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की भव्य झाँकियों के स्वागत में सजा दिया।
Rath Yatra Ahmedabad: रथ यात्रा की शुरुआत
यह भव्य यात्रा प्राचीन 400 वर्ष पुराने जगन्नाथ मंदिर, जमालपुर से प्रातः 7:00 बजे शुभ आरती के साथ शुरू होती है। यात्रा शुरू होने से पहले, सुबह-सुबह ‘मंगला आरती’ होती है, जिसमें हाल के वर्षों में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी भाग लेते रहे हैं। इसके बाद होता है ‘पाहिंद विधि’, जिसमें गुजरात के मुख्यमंत्री पारंपरिक स्वर्ण झाड़ू से सड़क की प्रतीकात्मक सफाई करते हैं — यही परंपरा यात्रा को विरासत से जोड़ती है।

यात्रा का रंग-बिरंगा दृश्य
सड़क पर रथ खिंच रहे होते हैं—भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के शानदार रथ, सजे-धजे 18 हाथी, 100 से ज़्यादा झाँकियाँ,
भजन मंडलियां, और 30 अखाड़ों के कलाकार।
इस 16 किलोमीटर की यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु न केवल दर्शन के लिए,
बल्कि सांस्कृतिक विरासत के उत्सव में भी डूब जाते हैं।

रास्ता, प्रमुख पड़ाव और महाभोग
रथ यात्रा का मार्ग अहमदाबाद के पुराने शहर की गलियों से गुजरता है
जमालपुर चकला, गोलिमडा, खाड़िया, कालूपुर सर्कल होते हुए सरसपुर के श्री रणछोड़रायजी मंदिर तक पहुंचता है।
यहां स्थानीय भक्तों द्वारा ‘महाभोग’ यानी भव्य भोज का आयोजन किया जाता है।
यह शहर के “माऊसा का घर” की तरह माने जाने वाले स्थान पर पड़ता है, जहां भगवान का आत्मीय स्वागत होता है।
वापसी में यात्रा दिल्ली चकला, माणेक चौक, शाहपुर जैसी ऐतिहासिक और संवेदनशील जगहों से वापस मंदिर पहुंचती है।

अनुभव मंत्रमुग्ध करने वाला
अगर आप कभी रथ यात्रा के दिन इन गलियों में पहुंचें तो आपको न सिर्फ आस्था की शक्ति दिखेगी,
बल्कि गुजरात की लोक-संस्कृति, ढोल-नगाड़ों की गूंज, पारंपरिक भजन, खुशबू
से महकता प्रसाद और लाखों लोगों का अनुशासित उत्साह भी देखने को मिलेगा।

लाइव दर्शन और व्यापक आउटरीच
जो लोग नहीं पहुंच सकते, उनके लिए रथ यात्रा का सीधा प्रसारण दूरदर्शन, यूट्यूब एवं सोशल प्लेटफार्म्स पर भी किया जाता है
ताकि हर श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ की यात्रा का आनंद ले सके।
इस वर्ष की अहमदाबाद रथ यात्रा न केवल एक धार्मिक यात्रा थी,
बल्कि यह हमारे सांस्कृतिक एकता, प्राचीन परंपराओं और आधुनिक व्यवस्था का बेहतरीन समन्वय भी थी।
अगर आपको जीवन में कभी मौका मिले, तो रथ यात्रा की इस भव्यता को अपनी आंखों से जरूर देखें!




















