महाराष्ट्र महायुति सरकार फूट महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है। महायुति सरकार (BJP-Shiv Sena-Eknath Shinde + NCP Ajit Pawar) में अंदरूनी कलह की खबरें सामने आ रही हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बीच बढ़ते तनाव की वजह बन रहा है नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर छत्रपति शिवाजी महाराज की 20 फीट ऊंची प्रतिमा का अनावरण कार्यक्रम। शिंदे गुट के नेताओं ने खुलकर नाराजगी जताई है और इसे जानबूझकर किया गया अपमान बताया जा रहा है।

क्या हुआ था इस विवादास्पद कार्यक्रम में?
हाल ही में नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर छत्रपति शिवाजी महाराज की भव्य प्रतिमा का अनावरण किया गया। यह कार्यक्रम अडानी एयरपोर्ट अथॉरिटी और CIDCO (सिटी एंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन) की संयुक्त पहल था। इसमें मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, मंत्री अदिति तटकरे और वन मंत्री गणेश नाईक मौजूद रहे।
- लेकिन हैरानी की बात यह है कि राज्य के दोनों उपमुख्यमंत्रियों — एकनाथ शिंदे और अजित पवार
- को इस कार्यक्रम का निमंत्रण तक नहीं दिया गया। खासतौर पर एकनाथ शिंदे के लिए
- यह घटना इसलिए ज्यादा संवेदनशील है क्योंकि CIDCO शहरी विकास विभाग के अधीन आता है, जिसके मंत्री खुद शिंदे हैं।
शिंदे गुट के मंत्री संजय शिरसाट ने साफ आरोप लगाया कि नौकरशाही राजनीतिक दबाव में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि जानबूझकर उपमुख्यमंत्री को इस बड़े प्रोजेक्ट का क्रेडिट लेने से रोका गया। यह बयान महायुति के अंदर मौजूद दरार को साफ दिखाता है।
महाराष्ट्र महायुति सरकार फूट क्यों माना जा रहा है यह अपमान?
- नवी मुंबई एयरपोर्ट प्रोजेक्ट महाराष्ट्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। CIDCO के जरिए शहरी विकास मंत्रालय
- इसकी निगरानी करता है। ऐसे में अपने ही विभाग के प्रमुख कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री को न बुलाना
- प्रोटोकॉल का उल्लंघन माना जा रहा है। शिंदे गुट के नेताओं का कहना है
- कि यह घटना महज एक भूल नहीं, बल्कि सत्ता के अंदर चल रही साइडलाइनिंग की रणनीति का हिस्सा है।
- विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने तुरंत डैमेज कंट्रोल शुरू कर दिया।
- सिडको और अडानी एयरपोर्ट अथॉरिटी दोनों को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया गया है।
- प्रशासन से जवाब मांगा गया है कि उपमुख्यमंत्रियों को क्यों नहीं आमंत्रित किया गया।
विपक्ष का हमला और राजनीतिक मायने
- जैसे ही यह विवाद सार्वजनिक हुआ, विपक्षी महाविकास अघाड़ी (MVA) ने हमला बोल दिया।
- शिवसेना (UBT) के नेता अंबादास दानवे ने तंज कसते हुए कहा कि सत्ता में होने
- के बावजूद एकनाथ शिंदे की स्थिति दयनीय हो गई है।
- दानवे ने संकेत भी दिए कि भाजपा से असंतुष्ट शिंदे गुट फिर से उद्धव ठाकरे की शिवसेना से जुड़ सकता है।
- इसी तरह शिवसेना के वरिष्ठ नेता अब्दुल सत्तार ने भी ऐसे ही इशारे किए हैं।
- विपक्ष अब इस घटना को महायुति सरकार की कमजोरी साबित करने के लिए इस्तेमाल कर रहा है।
महायुति की एकता पर सवाल
महाराष्ट्र में 2024 के विधानसभा चुनाव के बाद बनी महायुति सरकार में यह पहला बड़ा विवाद नहीं है। पहले भी शिंदे और फडणवीस गुट के बीच सीट बंटवारे, मंत्रालयों के बंटवारे और फैसलों पर मतभेद की खबरें आ चुकी हैं।
मुख्य मुद्दे जो तनाव बढ़ा रहे हैं:
- शहरी विकास विभाग को लेकर नियंत्रण की लड़ाई
- बड़े प्रोजेक्ट्स में क्रेडिट शेयरिंग
- मंत्रियों की भूमिका और प्रोटोकॉल
- भाजपा vs शिवसेना (शिंदे) के अंदर पावर डायनामिक्स
- राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह तनाव समय रहते सुलझाया नहीं गया
- तो 2029 के चुनावों से पहले महायुति को बड़ा नुकसान हो सकता है।
आगे क्या हो सकता है?
वर्तमान में दोनों पक्ष डैमेज कंट्रोल मोड में हैं। फडणवीस गुट शिंदे को मनाने की कोशिश कर रहा है, जबकि शिंदे गुट अपनी साख बचाने और मंत्रालय की गरिमा बनाए रखने पर जोर दे रहा है।
महाराष्ट्र की राजनीति हमेशा से गठबंधनों की नाजुकता के लिए जानी जाती है। 2019 में हुए बदलाव और 2024 के गठबंधन को देखते हुए कोई भी छोटी-सी दरार भी बड़े परिवर्तन का कारण बन सकती है।
महाराष्ट्र महायुति सरकार में फूट की ये खबरें सत्ता के गलियारों में चल रही अंदरूनी खींचतान को उजागर करती हैं। नवी मुंबई एयरपोर्ट पर छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा का कार्यक्रम, जो विकास और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक होना चाहिए था, राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया।
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