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भारत नाराज है तो क्या करें? पाकिस्तान से कई देशों के अच्छे संबंध, तुर्की का तेवर!

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भारत नाराज है तो क्या करें? पाकिस्तान से कई देशों के अच्छे संबंध, तुर्की का तेवर!

भारत नाराज है भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव का नया दौर चल रहा है। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर (7 मई 2026) शुरू किया। इस ऑपरेशन में पाकिस्तान स्थित आतंकवादी ठिकानों को नष्ट किया गया। लेकिन इस घटनाक्रम के बाद तुर्की (Türkiye) ने खुलकर पाकिस्तान का साथ दिया। तुर्की के विदेश मंत्री हाकन फिदान ने साफ कहा कि दुनिया में कई देश पाकिस्तान से अच्छे संबंध रखते हैं, भारत को नाराज होने की जरूरत नहीं है।

यह बयान भारत के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि तुर्की पाकिस्तान का मजबूत सहयोगी माना जाता है।

भारत नाराज है
भारत नाराज है: देशभर में बढ़ रहे मुद्दों पर लोगों ने जताई नाराजगी

भारत नाराज है तुर्की के विदेश मंत्री का बड़ा बयान

IISS (International Institute of Strategic Studies) के एक कार्यक्रम में तुर्की के विदेश मंत्री हाकन फिदान ने भारत-तुर्की संबंधों पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा:

  • भारत के साथ तुर्की का कोई द्विपक्षीय विवाद नहीं है।
  • कोई सीमा विवाद नहीं, कोई पुराना बुरा इतिहास नहीं।
  • हम भारत के साथ अच्छे संबंध चाहते हैं।
  • लेकिन तुर्की अकेला देश नहीं है जो पाकिस्तान से अच्छे संबंध रखता है। कई अन्य देश भी पाकिस्तान के साथ भाईचारे के रिश्ते रखते हैं।

फिदान ने आगे कहा कि अगर भारत उन देशों से नाराज होता है जिनके पाकिस्तान से अच्छे संबंध हैं, तो यह सही नहीं होगा। उन्होंने भारत से अपील की कि द्विपक्षीय स्तर पर तुर्की के साथ संबंधों को अलग रखा जाए।

ऑपरेशन सिंदूर में तुर्की की भूमिका

पहलगाम आतंकी हमले के बाद जब भारत ने पाकिस्तान के अंदर सर्जिकल स्ट्राइक जैसे ऑपरेशन सिंदूर चलाया, तब तुर्की ने पाकिस्तान की खुलकर मदद की।

  • इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, तुर्की ने पाकिस्तान को 350 ड्रोन्स और ऑपरेटर्स की मदद दी।
  • Bayraktar TB2 और YIHA ड्रोन्स का इस्तेमाल भारत के खिलाफ किया गया।
  • तुर्की के सैन्य सलाहकारों ने पाकिस्तानी अधिकारियों को सहयोग दिया।

यह घटना भारत-तुर्की संबंधों में नई दरार पैदा कर रही है।

तुर्की-पाकिस्तान की गहरी दोस्ती

तुर्की और पाकिस्तान के संबंध बहुत पुराने और मजबूत हैं:

  • दोनों देश इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) में सक्रिय हैं।
  • तुर्की कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का खुलकर समर्थन करता रहा है।
  • रक्षा, व्यापार और सैन्य सहयोग लगातार बढ़ रहा है।
  • राष्ट्रपति रेचेप तईप एर्दोगान पाकिस्तान के प्रति अपनी निष्ठा जाहिर करते रहे हैं।

तुर्की का कहना है कि पाकिस्तान से उसके संबंध “भाईचारे” वाले हैं और कई मुद्दों पर ऐतिहासिक एकजुटता है।

भारत के लिए चुनौती क्या है?

भारत की विदेश नीति “पड़ोसी पहले” और आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस पर आधारित है। ऐसे में:

  • तुर्की जैसे देशों का पाकिस्तान समर्थन भारत के लिए चिंता का विषय है।
  • भारत कई देशों के साथ मजबूत संबंध बना रहा है (जैसे UAE, सऊदी अरब, इजराइल)।
  • लेकिन तुर्की का रुख भारत की कूटनीति को नई चुनौती दे रहा है।

#भारत को अब रणनीतिक रूप से तुर्की के साथ संबंध सुधारने के साथ-साथ उसके पाकिस्तान समर्थन का जवाब भी तैयार करना होगा।

भारत-तुर्की संबंधों की संभावनाएं!

  • दोनों देशों के बीच व्यापार की अच्छी संभावनाएं हैं। तुर्की भारत का बड़ा व्यापारिक
  • साझेदार बन सकता है, लेकिन राजनीतिक मुद्दे (खासकर पाकिस्तान फैक्टर) बाधा बन रहे हैं।
  • तुर्की के विदेश मंत्री ने कहा कि दोनों देश “परिपक्व” होकर मतभेदों को अलग रखते हुए
  • आगे बढ़ सकते हैं। लेकिन हकीकत यह है कि जब तक तुर्की पाकिस्तान का खुलकर साथ देता रहेगा
  • भारत-तुर्की संबंधों में पूर्ण विश्वास मुश्किल है।

तुर्की का बयान साफ संदेश देता है — “भारत नाराज है तो क्या करें, दुनिया में पाकिस्तान के कई दोस्त हैं।” यह बयान भारत की विदेश नीति के लिए सोचने का विषय है।

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