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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का अनशन जारी स्टाम्पेड से हत्या की साजिश का गंभीर आरोप, माघ मेले विवाद में तनाव चरम पर!

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का अनशन
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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का अनशन जारी स्टाम्पेड से हत्या की साजिश का गंभीर आरोप, माघ मेले विवाद में तनाव चरम पर!

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का अनशन : 19 जनवरी 2026 को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में माघ मेला के बीच बड़ा विवाद गहरा गया है। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अपना अनशन (भूख हड़ताल) जारी रखे हुए हैं, जो सरयू तट पर चल रहा है। अनशन की शुरुआत 19 जनवरी सुबह 9:47 बजे हुई और यह अब कई दिनों से जारी है। शंकराचार्य ने इसे आध्यात्मिक और सामाजिक मुद्दों के खिलाफ ‘आध्यात्मिक क्रांति’ का हिस्सा बताया है, लेकिन अब उन पर स्टाम्पेड करवाकर हत्या की साजिश रचने का गंभीर आरोप लगा है। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की है, जबकि शंकराचार्य ने इसे राजनीतिक साजिश करार दिया है।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का अनशन माघ मेले में मौनी अमावस्या विवाद का बैकग्राउंड

माघ मेले के सबसे पवित्र दिन मौनी अमावस्या (17-18 जनवरी 2026) पर संगम नोज पर करोड़ों श्रद्धालु उमड़े। शंकराचार्य अपने 200 शिष्यों के साथ भव्य रथ और पालकी पर सवार होकर संगम स्नान के लिए जा रहे थे। लेकिन भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने उन्हें रोका और पैदल जाने का अनुरोध किया। प्रशासन का कहना है कि रथ और इतनी बड़ी संख्या में लोग जाने से स्टाम्पेड का खतरा था।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का अनशन
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का अनशन

शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने उन्हें बीच रास्ते में रोका, उनके शिष्यों पर धक्का-मुक्की और मारपीट की गई। उन्होंने कहा, “बड़े-बड़े अधिकारी संत को मार रहे हैं… जब हम लौटने लगे तो हमारे संतों पर हमला किया गया।” उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी इशारों में निशाना साधा और कहा कि यह बदले की भावना से हो रहा है। शंकराचार्य ने स्नान का बहिष्कार किया और बिना डुबकी लगाए वापस लौट आए, फिर धरने पर बैठ गए। उन्होंने कहा, “जब तक सम्मानजनक प्रोटोकॉल नहीं मिलेगा, तब तक गंगा स्नान नहीं करूंगा।”

अनशन और हत्या की साजिश का आरोप

  • अनशन सरयू तट पर जारी है। शंकराचार्य धार्मिक स्थलों की सुरक्षा, सामाजिक न्याय
  • और आध्यात्मिक मुद्दों पर जोर दे रहे हैं। उनके समर्थन में कंप्यूटर बाबा जैसे अन्य संत भी जमीन
  • पर लेटकर धरना दे रहे हैं। लेकिन विरोधी पक्ष और प्रशासन का दावा है
  • कि उनकी रैलियां और भीड़ इकट्ठा करने की रणनीति जानबूझकर खतरनाक है
  • जो स्टाम्पेड का कारण बन सकती है। इसलिए हत्या की साजिश का केस दर्ज हुआ है।

प्रशासन का पक्ष: डिवीजनल कमिश्नर सौम्या अग्रवाल और पुलिस कमिश्नर ने कहा कि बिना अनुमति रथ लाने और बैरियर तोड़ने से 3 घंटे तक रास्ता ब्लॉक रहा, जिससे आम श्रद्धालुओं को असुविधा हुई। उन्होंने स्पष्ट किया कि “हर श्रद्धालु बराबर है, लेकिन स्टाम्पेड का जोखिम नहीं उठाया जा सकता।”

राजनीतिक रंग और प्रतिक्रियाएं!

  • विवाद में राजनीति भी घुस गई। अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी पर हमला बोला और कहा
  • “साधु-संतों के साथ दुर्व्यवहार अक्षम्य है। पिछले साल की तरह इस साल भी हो रहा है।
  • ” उन्होंने जांच की मांग की। शंकराचार्य पहले भी मोदी सरकार और बीजेपी की नीतियों की
  • आलोचना कर चुके हैं, जिससे यह विवाद और गहरा गया है।

शंकराचार्य अडिग हैं और अनशन जारी रखा है। उनके स्वास्थ्य की चिंता है, लेकिन वे कहते हैं

कि वे पीछे नहीं हटेंगे। पुलिस ने क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी है और स्थिति नियंत्रित है, लेकिन तनाव बना हुआ है।

आगे क्या होगा?

  • यह मामला माघ मेले की व्यवस्था, संतों के प्रोटोकॉल और श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
  • अगर अनशन लंबा चला तो स्वास्थ्य जोखिम बढ़ेगा। क्या प्रशासन और शंकराचार्य के
  • बीच समझौता होगा या विवाद और भड़केगा? आने वाले दिनों में अपडेट्स महत्वपूर्ण होंगे।

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