RBI Plastic Currency Notes क्या कागजी नोटों का जमाना अब खत्म होने वाला है? रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) एक बार फिर प्लास्टिक (पॉलीमर) करेंसी नोट्स लाने की दिशा में गंभीरता से विचार कर रहा है। अगर यह योजना सफल हुई तो भारत में पहली बार प्लास्टिक के नोट चलन में आ जाएंगे।
रिजर्व बैंक की हालिया बोर्ड मीटिंग्स में इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा हुई है। इन मीटिंग्स पटना और मुंबई में आयोजित की गई थीं। बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, RBI जल्द ही प्लास्टिक नोट्स के पायलट प्रोजेक्ट की घोषणा कर सकता है।

RBI Plastic Currency Notes: ताजा अपडेट
यह कोई नई योजना नहीं है। साल 2012 में भी RBI और सरकार ने 5 शहरों (कोच्चि, मैसूर, जयपुर, भुवनेश्वर और शिमला) में प्लास्टिक नोट्स का पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की तैयारी की थी, लेकिन तकनीकी चुनौतियों के कारण इसे रोक दिया गया था। अब 2026 में RBI इस पुरानी योजना को फिर से सक्रिय करने जा रहा है।
प्लास्टिक नोट क्यों जरूरी हैं?
RBI प्लास्टिक नोट्स लाने के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण हैं:
- लंबी शेल्फ लाइफ मौजूदा कागजी नोट जल्दी खराब हो जाते हैं। वित्त वर्ष 2025 में RBI को 23.80 बिलियन नोट्स नष्ट करने पड़े, जो पिछले साल से 12.3% ज्यादा थे। ज्यादातर 500 रुपये और 100 रुपये के नोट खराब स्थिति में थे।
- छपाई की लागत में भारी बचत वित्त वर्ष 2024-25 में नोट छपाई पर RBI का खर्च 6372.80 करोड़ रुपये रहा, जबकि इससे पहले साल यह 5101.40 करोड़ रुपये था। प्लास्टिक नोट ज्यादा टिकाऊ होने से बार-बार नई छपाई की जरूरत कम पड़ेगी।
पॉलीमर नोट्स के फायदे!
- जालसाजी (Counterfeiting) पर लगाम: प्लास्टिक नोट्स में बेहतर सुरक्षा फीचर्स लगाए जा सकते हैं।
- पर्यावरण अनुकूल: लंबे समय तक चलने से कागज की खपत कम होगी।
- स्वच्छता: प्लास्टिक नोट आसानी से गंदे नहीं होते और धोए भी जा सकते हैं।
- मजबूती: गर्मी, नमी और इस्तेमाल में इनकी टिकाऊ क्षमता ज्यादा होती है।
अभी कैश की क्या स्थिति है?
- 15 मई 2026 के आंकड़ों के अनुसार भारत में कुल 42.86 ट्रिलियन रुपये के नोट चलन में हैं
- जो पिछले साल से 11.5% ज्यादा हैं। डिजिटल पेमेंट्स के बढ़ने के बावजूद छोटे नोटों
- (10 और 20 रुपये) की मांग लगातार बढ़ रही है।
दुनिया में प्लास्टिक नोट्स का चलन
- ऑस्ट्रेलिया पहला देश था जिसने 1988 में पॉलीमर नोट्स शुरू किए।
- कनाडा, यूनाइटेड किंगडम, न्यूजीलैंड, सिंगापुर जैसे कई देश अब प्लास्टिक नोट्स इस्तेमाल करते हैं।
- ये नोट औसतन 2.5 से 4 गुना ज्यादा समय तक चलते हैं।
भारत में क्या होगा अगला कदम?
RBI पहले कम मूल्यवर्ग (जैसे 10 रुपये) के नोट्स से शुरुआत कर सकता है। पायलट प्रोजेक्ट सफल होने पर धीरे-धीरे अन्य नोटों को भी प्लास्टिक में बदला जाएगा। हालांकि, पूरी तरह बदलाव में अभी समय लगेगा क्योंकि बड़े पैमाने पर उत्पादन और वितरण की चुनौतियां हैं।
चुनौतियां भी हैं!
- शुरुआती उत्पादन लागत ज्यादा हो सकती है।
- भारत की विविध जलवायु (गर्मी, नमी, सर्दी) में इनकी टिकाऊ क्षमता का परीक्षण जरूरी है।
- आम लोगों को नई नोट्स की आदत डालने में समय लगेगा।
RBI का प्लास्टिक नोट्स लाने का फैसला भारतीय करेंसी सिस्टम को आधुनिक और मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है। इससे न सिर्फ सरकार और RBI की लागत बचेंगी, बल्कि जालसाजी भी कम होगी। आम नागरिकों के लिए यह बदलाव शुरुआत में थोड़ा असामान्य लग सकता है, लेकिन लंबे समय में यह फायदेमंद रहेगा।







