नरेंद्र मोदी विदेश नीति भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली है। लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने विदेश यात्राओं और वैश्विक कूटनीति के क्षेत्र में ऐसा रिकॉर्ड बनाया है, जिसने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के लंबे समय से कायम रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। इस उपलब्धि ने भारत की वैश्विक छवि को मजबूत करने के साथ-साथ प्रवासी भारतीयों की भूमिका को भी नई पहचान दी है।

नरेंद्र मोदी ने तोड़ा नेहरू का रिकॉर्ड
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब स्वतंत्र भारत के इतिहास में सबसे अधिक देशों का दौरा करने वाले दूसरे सबसे लंबे कार्यकाल वाले प्रधानमंत्री बन गए हैं। विदेश नीति के क्षेत्र में उनकी सक्रियता और विभिन्न देशों के साथ मजबूत संबंधों ने भारत की अंतरराष्ट्रीय स्थिति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।
- विशेषज्ञों का मानना है कि मोदी सरकार ने विदेश नीति को केवल राजनयिक बैठकों
- तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे आर्थिक विकास, व्यापार, निवेश और सांस्कृतिक प्रभाव
- से भी जोड़ा है। यही कारण है कि भारत आज वैश्विक मंच
- पर पहले से कहीं अधिक प्रभावशाली भूमिका निभा रहा है।
ब्रेन ड्रेन से सॉफ्ट पावर तक का सफर
एक समय था जब विदेशों में जाने वाले भारतीयों को “ब्रेन ड्रेन” यानी प्रतिभा पलायन के रूप में देखा जाता था। माना जाता था कि देश की प्रतिभाएं विदेश जाकर दूसरे देशों के विकास में योगदान दे रही हैं।
- लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह सोच बदल गई है। आज दुनिया भर में बसे करोड़ों भारतीय
- भारत की सबसे बड़ी सॉफ्ट पावर बनकर उभरे हैं। अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया
- और खाड़ी देशों में बसे भारतीय न केवल आर्थिक रूप से मजबूत हैं
- बल्कि राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव भी रखते हैं।
- प्रधानमंत्री मोदी ने विभिन्न देशों में आयोजित प्रवासी भारतीय कार्यक्रमों के माध्यम से इस समुदाय
- को भारत से जोड़ने का प्रयास किया है। इससे भारत की वैश्विक पहचान और प्रभाव दोनों में वृद्धि हुई है।
नरेंद्र मोदी विदेश नीति प्रवासी भारतीयों की बढ़ती भूमिका
आज प्रवासी भारतीय दुनिया की बड़ी कंपनियों, विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और सरकारों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर रहे हैं। कई भारतीय मूल के लोग विदेशी देशों की राजनीति में भी प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं।
भारत को मिलने वाले विदेशी निवेश, व्यापारिक अवसर और तकनीकी सहयोग में भी प्रवासी भारतीयों का महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है। यही वजह है कि सरकार लगातार इस समुदाय के साथ संबंध मजबूत करने पर जोर दे रही है।
मोदी की विदेश नीति की खासियत
- नरेंद्र मोदी की विदेश नीति की सबसे बड़ी विशेषता यह रही है कि उन्होंने व्यक्तिगत संबंधों
- और जनसंपर्क को कूटनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया। चाहे अमेरिका हो
- फ्रांस, जापान या ऑस्ट्रेलिया, हर जगह उन्होंने भारत की मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है।
- उनकी विदेश यात्राओं के दौरान आयोजित बड़े कार्यक्रमों में हजारों प्रवासी भारतीय शामिल होते हैं।
- इन आयोजनों ने भारत की सकारात्मक छवि को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
भारत की वैश्विक स्थिति हुई मजबूत
- पिछले एक दशक में भारत की वैश्विक स्थिति में उल्लेखनीय बदलाव देखा गया है।
- जी-20 की अध्यक्षता, क्वाड जैसे अंतरराष्ट्रीय समूहों में सक्रिय भूमिका और विभिन्न वैश्विक मुद्दों
- पर भारत की स्पष्ट नीति ने देश की प्रतिष्ठा बढ़ाई है।
- विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अब केवल एक विकासशील देश नहीं बल्कि वैश्विक निर्णयों को प्रभावित
- करने वाली शक्ति के रूप में उभर रहा है। इसमें विदेश नीति और प्रवासी भारतीयों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है।
आर्थिक और रणनीतिक लाभ
- विदेशों में बसे भारतीयों से भारत को हर वर्ष अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है।
- इसके अलावा व्यापार, निवेश, तकनीक और शिक्षा के क्षेत्र में भी उनका योगदान महत्वपूर्ण है।
- कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भारत में निवेश करने का निर्णय लेते समय भारतीय मूल के अधिकारियों
- और उद्यमियों की सलाह को महत्व देती हैं। इससे भारत को आर्थिक और रणनीतिक दोनों स्तरों पर लाभ मिलता है।
नरेंद्र मोदी ने तोड़ा नेहरू का रिकॉर्ड केवल एक राजनीतिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह भारत की बदलती वैश्विक पहचान का भी प्रतीक है। आज प्रवासी भारतीय देश की सबसे बड़ी सॉफ्ट पावर बन चुके हैं और भारत की विदेश नीति में उनकी भूमिका लगातार बढ़ रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सक्रिय कूटनीति और प्रवासी भारतीयों के साथ मजबूत जुड़ाव ने भारत को विश्व मंच पर नई पहचान दिलाई है। आने वाले वर्षों में यह रणनीति भारत की वैश्विक ताकत को और मजबूत कर सकती है।
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