ममता बनर्जी बड़ा झटका पश्चिम बंगाल की राजनीति में भूचाल आया हुआ है। लोकसभा चुनाव 2024 के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) पहले ही विधानसभा में 58 विधायकों की बगावत झेल चुकी है और अब संसद में भी उसके 22 सांसद बागी होकर पार्टी से अलग होने की तैयारी में हैं। सूत्रों के मुताबिक, अगले हफ्ते जब ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी दिल्ली में INDIA गठबंधन की बैठक के लिए पहुंचेंगे, उसी समय यह बड़ा राजनीतिक धमाका हो सकता है।

ममता बनर्जी बड़ा झटका क्या है पूरा मामला?
खबरों के अनुसार, TMC के संसदीय दल में बड़ी टूट की पटकथा तैयार हो चुकी है। बारासात से लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार इस बागी गुट का नेतृत्व कर रही हैं। इसमें लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों के सांसद शामिल हैं। बागी सांसद सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन से मिलकर खुद को “असली तृणमूल कांग्रेस” घोषित करने वाले हैं।
- इस समय पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य
- दिल्ली में डेरा जमाए हुए हैं। समिक भट्टाचार्य ने कहा, “TMC के सांसद लगातार संपर्क कर रहे हैं।
- तृणमूल कांग्रेस अब इतिहास के एक छोटे से अध्याय तक सिमट जाएगी।
- बीजेपी की राष्ट्रीय महासचिव लॉकेट चटर्जी ने भी पुष्टि की कि 4 मई के चुनाव
- नतीजों के बाद कई TMC सांसद उनके संपर्क में हैं।
16 सांसदों के फोन बंद
- जब इन सांसदों से संपर्क करने की कोशिश की गई तो 16 में से 15 सांसदों के फोन स्विच ऑफ मिले।
- इनमें मनोरंजन जगत के सितारे, पूर्व खिलाड़ी और नए सांसद शामिल हैं।
- काकोली घोष दस्तीदार ने एक्स (Twitter) पर पोस्ट कर चेतावनी देते हुए लिखा – “ततैया के छत्ते में हाथ मत डालो।”
- कोलकाता में बागी गुट के नेता और नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने तंज कसते हुए
- कहा कि डर संक्रामक होता है, लेकिन साहस भी संक्रामक होता है।
दलबदल कानून और गणित
दसवीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) से बचने के लिए बागी गुट को दो-तिहाई बहुमत की जरूरत है।
- लोकसभा में TMC के 28 सांसद (हाजी नुरुल इस्लाम के निधन के बाद)
- राज्यसभा में 13 सांसद
बागियों को कम से कम 19 लोकसभा और 9 राज्यसभा सांसदों का समर्थन चाहिए। सूत्र बताते हैं कि दोनों सदनों को मिलाकर 22 सांसद पहले ही तैयार हो चुके हैं।
ममता पर क्यों बढ़ रहा संकट?
- विधानसभा में पहले ही 58 विधायकों की बगावत
- शुभेंदु अधिकारी जैसे मजबूत चेहरे का विरोध
- पार्टी में परिवारवाद (अभिषेक बनर्जी) की शिकायतें
- हाल के चुनावी नतीजों में TMC की कमजोर स्थिति
यह घटनाक्रम ममता बनर्जी के लिए बेहद दर्दनाक होगा क्योंकि यह उनके दिल्ली पहुंचने के ठीक उसी समय होने वाला है।
ममता बनर्जी बड़ा झटका आगे क्या हो सकता है?
- अगर 22 सांसद सफलतापूर्वक अलग होते हैं तो TMC का संसदीय दल बुरी तरह कमजोर हो जाएगा।
- इससे पश्चिम बंगाल की राजनीति में BJP को और मजबूती मिल सकती है।
- शुभेंदु अधिकारी और BJP की रणनीति साफ दिख रही है – TMC को अंदर से तोड़ना।
- विशेषज्ञों का मानना है कि यह टूट TMC के राष्ट्रीय अस्तित्व पर सवाल खड़ा कर देगी।
- ममता बनर्जी को अब अपनी पार्टी को संभालने के लिए बड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं।
पश्चिम बंगाल में सत्ता की लड़ाई अब दिल्ली तक पहुंच गई है। 22 TMC सांसदों की संभावित बगावत ममता बनर्जी के लिए करारा झटका साबित हो सकती है। राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज है और अगले कुछ दिनों में बड़े फैसले आने वाले हैं।
अभी यह सब सुगबुगाहट है, लेकिन स्थिति गंभीर लग रही है। राजनीतिक विश्लेषक इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। क्या TMC टूटेगी? या ममता फिर से कमाल दिखाएंगी? अपडेट्स के लिए विश्वसनीय स्रोतों पर नजर रखें।








