ईरान मिसाइल ठिकाने मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है। हाल ही में ईरान द्वारा अपने कई भूमिगत मिसाइल ठिकानों को दोबारा सक्रिय करने और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास सैन्य गतिविधियां बढ़ाने की खबरों ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका और ईरान के बीच पहले से चल रहे तनाव के बीच यह घटनाक्रम किसी बड़े संघर्ष की ओर संकेत कर सकता है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने अपने कई मिसाइल बेस और सैन्य ठिकानों को फिर से तैयार करना शुरू कर दिया है। उपग्रह तस्वीरों में कई ऐसे स्थान दिखाई दिए हैं जहां भारी मशीनरी और सैन्य गतिविधियां देखी गई हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि ईरान अपनी मिसाइल क्षमता को मजबूत करने में जुटा हुआ है।

होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। यदि यहां किसी प्रकार का सैन्य संघर्ष बढ़ता है तो इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
- विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस क्षेत्र में युद्ध जैसी स्थिति बनती है तो कच्चे तेल की
- कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। इसका असर भारत समेत दुनिया के कई देशों पर देखने को मिल सकता है।
अमेरिका और ईरान के बीच क्यों बढ़ा तनाव?
- हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच कई सैन्य घटनाएं सामने आई हैं।
- अमेरिकी सेना ने ईरान के कुछ सैन्य ठिकानों, ड्रोन कंट्रोल सेंटर और रडार सिस्टम पर कार्रवाई की थी।
- अमेरिका का दावा है कि यह कदम उसकी सुरक्षा और समुद्री व्यापार की रक्षा के लिए उठाया गया था।
- इसके जवाब में ईरान ने भी अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की।
- कई रिपोर्ट्स में मिसाइल और ड्रोन हमलों का उल्लेख किया गया है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है।
क्या फिर शुरू हो सकता है बड़ा युद्ध?
- विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा हालात बेहद संवेदनशील हैं। हालांकि दोनों देशों के
- बीच बातचीत और कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, लेकिन लगातार हो रही
- सैन्य गतिविधियां किसी भी समय स्थिति को बिगाड़ सकती हैं।
- ईरान द्वारा मिसाइल ठिकानों को दोबारा सक्रिय करना यह दर्शाता है
- कि वह भविष्य के संभावित खतरों के लिए खुद को तैयार कर रहा है।
- वहीं अमेरिका भी क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए हुए है।
- ऐसे में छोटी सी चूक भी बड़े सैन्य संघर्ष का कारण बन सकती है।
ईरान मिसाइल ठिकाने दुनिया पर क्या होगा असर?
- यदि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध जैसी स्थिति बनती है तो इसका असर केवल मध्य
- पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा। वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है
- अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बाधाएं आ सकती हैं और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।
भारत जैसे देश, जो बड़ी मात्रा में तेल आयात करते हैं, उन्हें भी महंगे ईंधन और बढ़ती महंगाई जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। निवेशकों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों की नजर फिलहाल होर्मुज क्षेत्र की गतिविधियों पर बनी हुई है।
ईरान द्वारा मिसाइल ठिकानों को फिर से सक्रिय करना और होर्मुज क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियां दुनिया के लिए चिंता का विषय बन गई हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव आने वाले दिनों में वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि कूटनीतिक प्रयास सफल होते हैं या फिर क्षेत्र एक नए बड़े संघर्ष की ओर बढ़ता है।
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