भारत पाकिस्तान UNSC संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने पाकिस्तान की ‘ब्लीडिंग इंडिया बाय थाउजेंड कट्स’ नीति को लेकर कड़ा रुख अपनाया। भारत ने आतंकवाद और सीमा पार गतिविधियों पर पाकिस्तान को घेरते हुए वैश्विक मंच पर उसका पर्दाफाश किया।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) हमेशा से वैश्विक शक्ति संतुलन का आईना रहा है। मई 2025 के आसपास जब भारत ने UNSC की खुली बहस में पाकिस्तान पर सीधा प्रहार किया, तो दुनिया ने देखा कि कैसे एक लोकतांत्रिक राष्ट्र आतंकवाद के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर रहा है। शीर्षक “UNSC में भारत का प्रहार, पाकिस्तान की ‘हजार जख्म’ वाली नीति की खुली पोल” बिल्कुल सटीक है। भारत के स्थायी प्रतिनिधि परवथनेनी हरीश ने पाकिस्तान की दशकों पुरानी नीति को बेनकाब कर दिया, जिसे जनरल जिया-उल-हक ने “Bleed India with a Thousand Cuts” का नाम दिया था।
यह नीति सीधे तौर पर भारत को छोटे-छोटे आतंकी हमलों, प्रॉक्सी वॉर और सीमा पार आतंकवाद के जरिए कमजोर करने की रणनीति है। आज यह नीति न सिर्फ भारत के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र और पाकिस्तान के लिए खुद आत्मघाती साबित हो रही है। इस ब्लॉग पोस्ट में हम इस घटना के संदर्भ, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, भारत की मजबूत दलीलों और भविष्य के प्रभावों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
भारत पाकिस्तान UNSC: ‘हजार जख्म’ नीति
1980 के दशक में पाकिस्तान के तत्कालीन तानाशाह जनरल जिया-उल-हक ने यह नीति तैयार की थी। चूंकि पाकिस्तान पारंपरिक युद्ध में भारत के सामने हारता रहा (1965, 1971), इसलिए उसने असममित युद्ध की राह चुनी। इसका मतलब था – भारत को हजार छोटे-छोटे जख्म देकर लहूलुहान करना, ताकि वह आर्थिक, सामाजिक और सैन्य रूप से कमजोर हो जाए।
इस नीति के तहत पाकिस्तान ने:
- जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा दिया।
- ISI के जरिए आतंकी संगठनों (लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद आदि) को प्रशिक्षण, हथियार और फंडिंग दी।
- 26/11 मुंबई हमला, पुलवामा, उरी और हालिया पहलगाम आतंकी हमला (अप्रैल 2025) जैसे कई हमलों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भूमिका निभाई।
यह नीति “कट्टरपंथ” और “आतंकवाद को राज्य नीति” बनाने का परिणाम है। पाकिस्तान खुद इस नीति का शिकार बन गया है – आर्थिक संकट, आंतरिक अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय अलगाव। फिर भी वह इसे छोड़ने को तैयार नहीं।
UNSC में भारत का तीखा हमला
मई 2025 में UNSC की “Protection of Civilians in Armed Conflict” पर हुई खुली बहस में भारत ने पाकिस्तान को आईना दिखाया। राजदूत परवथनेनी हरीश ने कहा कि पाकिस्तान दशकों से भारत पर प्रायोजित आतंकवाद थोप रहा है। उन्होंने 26/11 मुंबई हमले से लेकर पहलगाम (2025) तक के उदाहरण दिए।
भारत की मुख्य बातें:
- आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस: आतंकवाद फैलाने वालों को गंभीर कीमत चुकानी पड़ेगी।
- पाकिस्तान का दोहरा चरित्र: एक तरफ वह आतंकवाद का शिकार बताता है, दूसरी तरफ आतंकियों को राज्य संरक्षण देता है।
- कश्मीर मुद्दा: पाकिस्तान IIOJK (Indian Illegally Occupied Jammu & Kashmir) कहकर भारत के आंतरिक मामलों में दखलंदाजी करता है, जबकि खुद बालाकोट, एलओसी उल्लंघन जैसे मुद्दों पर चुप रहता है।
- अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का उल्लंघन: पाकिस्तान 20+ UN-listed terrorists को पनाह दे रहा है।
भारत ने स्पष्ट किया कि शांति और आतंकवाद साथ नहीं चल सकते। यह बयान UNSC में पाकिस्तान की “ग्रैंडस्टैंडिंग” को बेनकाब करने वाला था, खासकर जब पाकिस्तान खुद UNSC का अस्थायी सदस्य था।
पहलगाम हमला: ट्रिगर पॉइंट
अप्रैल 2025 का पहलगाम आतंकी हमला, जिसमें 26 पर्यटक मारे गए, इस तनाव का तात्कालिक कारण बना। भारत ने पाकिस्तान पर क्रॉस-बॉर्डर लिंकेज का आरोप लगाया और Indus Water Treaty को निलंबित करने जैसे कदम उठाए। UNSC की बंद बैठक में भी पाकिस्तान की कोशिशें फ्लॉप हो गईं। भारत ने कहा – “Pakistan’s grandstanding has flopped again.”
यह हमला ‘हजार जख्म’ नीति का ताजा उदाहरण था। पर्यटकों को निशाना बनाकर पाकिस्तान ने न सिर्फ भारत की अर्थव्यवस्था (पर्यटन) को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की, बल्कि सामाजिक सद्भाव को भी तोड़ने का प्रयास किया।
पाकिस्तान की नीति की विफलता: आत्मघाती प्रभाव
आज पाकिस्तान की यह नीति उल्टी पड़ रही है:
- आर्थिक संकट: FATF की नजर, IMF पर निर्भरता।
- आंतरिक आतंकवाद: TTP, बलूचिस्तान विद्रोह – पाकिस्तान खुद “हजार जख्म” झेल रहा है।
- अंतरराष्ट्रीय अलगाव: अधिकांश देश भारत के साथ खड़े हैं। UNSC में भी पाकिस्तान को समर्थन नहीं मिला।
- क्षेत्रीय अस्थिरता: अफगानिस्तान में तालिबान समर्थन ने पड़ोस को अस्थिर किया।
भारत की “सर्जिकल स्ट्राइक्स” और “बालाकोट एयर स्ट्राइक” जैसी जवाबी कार्रवाइयों ने दिखा दिया कि अब “हजार जख्म” की नीति काम नहीं करेगी। भारत ने नई “लक्ष्मण रेखा” खींच दी है।
India की रणनीति: सशक्त जवाब और कूटनीति
भारत ने UNSC में सिर्फ आरोप नहीं लगाए, बल्कि सबूतों पर आधारित तथ्य पेश किए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर की मजबूत नेतृत्व वाली कूटनीति ने दुनिया को यह संदेश दिया कि भारत अब passive victim नहीं है।
भारत की उपलब्धियां:
- आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहमति बनाना।
- कश्मीर में विकास कार्य और Article 370 के बाद शांति।
- QUAD, I2U2 जैसे मंचों पर मजबूत उपस्थिति।
निष्कर्ष
UNSC में भारत का प्रहार ऐतिहासिक था। इसने पाकिस्तान की ‘हजार जख्म’ वाली नीति को पूरी दुनिया के सामने बेनकाब कर दिया। यह नीति न सिर्फ भारत के खिलाफ है, बल्कि मानवता के खिलाफ भी है। पाकिस्तान को अब समझना चाहिए कि आतंकवाद से कोई फायदा नहीं – यह अंततः खुद को नष्ट कर देगा।
भारत शांति चाहता है, लेकिन मजबूत शांति। जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को राज्य नीति के रूप में इस्तेमाल करता रहेगा, तब तक भारत सख्त जवाब देता रहेगा। दुनिया को यह समझना होगा कि आतंकवाद कोई “स्वतंत्रता संघर्ष” नहीं, बल्कि मानवाधिकारों का उल्लंघन है।






