इनकम टैक्स डिपार्टमेंट : सोशल मीडिया पर एक वायरल दावा तेजी से फैल रहा है कि 1 अप्रैल 2026 से इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को टैक्स चोरी रोकने के नाम पर नागरिकों के सोशल मीडिया अकाउंट्स, ईमेल्स और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की एक्सेस मिल जाएगी। यह पोस्ट X हैंडल @IndianTechGuide से शुरू हुई और लाखों लोगों तक पहुंच गई। लेकिन प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) ने इसे भ्रामक (मिसलीडिंग) करार दिया है। NDTV की रिपोर्ट (22 दिसंबर 2025) के अनुसार यह दावा गलत तरीके से नई इनकम टैक्स एक्ट 2025 की व्याख्या करता है। इस ब्लॉग में हम पूरी सच्चाई, सरकारी स्पष्टीकरण और ईमानदार टैक्सपेयर्स पर असर पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट वायरल दावा क्या है?
वायरल पोस्ट में कहा गया कि नई इनकम टैक्स एक्ट 2025 के तहत 1 अप्रैल 2026 से टैक्स अधिकारी सभी नागरिकों के सोशल मीडिया (फेसबुक, इंस्टाग्राम, X), ईमेल (जीमेल, याहू आदि) और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को एक्सेस कर सकेंगे। इससे प्राइवेसी का हनन होगा और हर कोई सर्विलांस के दायरे में आएगा। यह दावा ब्लैक मनी और टैक्स एवेजन रोकने के नाम पर फैलाया गया जिससे लोगों में डर पैदा हो गया।

फैक्ट चेक: PIB का स्पष्ट स्पष्टीकरण
PIB फैक्ट चेक यूनिट ने 22 दिसंबर 2025 को X पर पोस्ट करके साफ किया कि यह दावा भ्रामक है। मुख्य पॉइंट्स:
- इनकम टैक्स एक्ट 2025 की धारा 247 केवल सर्च एंड सर्वे ऑपरेशंस तक सीमित है।
- टैक्स अधिकारी तब ही डिजिटल स्पेस (वर्चुअल डिजिटल स्पेस) एक्सेस कर सकते हैं, जब बड़ी टैक्स एवेजन के ठोस सबूत हों और फॉर्मल सर्च ऑपरेशन चल रहा हो।
- ईमानदार टैक्सपेयर्स पर कोई असर नहीं – रूटीन असेसमेंट, स्क्रूटनी या डेटा प्रोसेसिंग में एक्सेस नहीं मिलेगा।
- PIB का बयान: “जब तक टैक्सपेयर पर बड़ी टैक्स चोरी के सबूत के आधार पर फॉर्मल सर्च ऑपरेशन नहीं चल रहा, तब तक डिपार्टमेंट को प्राइवेट डिजिटल स्पेस एक्सेस करने का कोई अधिकार नहीं है।”
यह पावर 1961 की पुरानी एक्ट में भी थी, जहां फिजिकल सर्च में दस्तावेज जब्त किए जाते थे। नई एक्ट में डिजिटल युग को ध्यान में रखकर इसे अपडेट किया गया है, क्योंकि अब डेटा क्लाउड या सर्वर्स पर स्टोर होता है।
नई इनकम टैक्स एक्ट 2025 क्या है?
- यह नई एक्ट पुरानी 1961 एक्ट की जगह लेगी, जो 819 सेक्शंस को सरल बनाकर कम करेगी।
- उद्देश्य टैक्स सिस्टम को आसान और पारदर्शी बनाना है। धारा 247 में वर्चुअल डिजिटल स्पेस
- (ईमेल सर्वर्स, सोशल मीडिया, बैंक अकाउंट्स, क्लाउड स्टोरेज आदि) को शामिल किया गया है
- लेकिन केवल सर्च के दौरान एक्सेस कोड ओवरराइड करने की परमिशन है।
- यह ब्लैक मनी और बड़े एवेजन केसेज के लिए है, न कि आम नागरिकों की जासूसी के लिए।
ईमानदार नागरिकों पर कोई खतरा नहीं
- सरकार बार-बार कह रही है कि यह प्रावधान ब्लैक मनी और बड़े टैक्स एवेडर्स को टारगेट करने के लिए हैं।
- सामान्य सैलरीड व्यक्ति, छोटे बिजनेस वाले या नियमित ITR फाइल करने वाले सुरक्षित हैं।
- प्राइवेसी का अधिकार (आर्टिकल 21) बना हुआ है, और बिना सबूत के कोई एक्सेस नहीं हो सकती।
गलत जानकारी क्यों फैली?
- @IndianTechGuide जैसे हैंडल्स ने धारा 247 की गलत व्याख्या की, जिससे मास सर्विलांस का डर पैदा हुआ।
- कई न्यूज आर्टिकल्स ने भी शुरुआत में इसे सेंसेशनल बनाया, लेकिन PIB और अन्य फैक्ट चेकर्स ने साफ किया।
- सोशल मीडिया पर अफवाहें तेजी से फैलती हैं, इसलिए ऑफिशियल सोर्स चेक करना जरूरी है।
क्या करें टैक्सपेयर्स?
- सही तरीके से ITR फाइल करें।
- सभी इनकम डिक्लेयर करें।
- अफवाहों पर विश्वास न करें, PIB या इनकम टैक्स वेबसाइट चेक करें।
- अगर कोई नोटिस आए, तो प्रोफेशनल एडवाइज लें।
अफवाह नहीं, सच्चाई जानें
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को सभी के सोशल मीडिया या ईमेल की रूटीन एक्सेस नहीं मिल रही। यह केवल बड़े टैक्स एवेजन केसेज में सर्च के दौरान लागू है। PIB का फैक्ट चेक साफ करता है कि ईमानदार नागरिक चिंता न करें। नई एक्ट टैक्स सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए है, न कि प्राइवेसी छीनने के लिए। अफवाहों से बचें और सही जानकारी शेयर करें!












