होलाष्टक 2026 इन 5 कामों को भूलकर भी न करें वरना सुख शांति वाला जीवन हो सकता है बर्बाद!
होलाष्टक 2026 इन 5 कामों को भूलकर भी न करें वरना सुख शांति वाला जीवन हो सकता है बर्बाद!
होलाष्टक 2026 : होलाष्टक हिंदू धर्म में होली से ठीक पहले आने वाला एक विशेष 8 दिनों का समय होता है, जिसे अशुभ माना जाता है। इस दौरान नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव अधिक रहता है, इसलिए शुभ और मांगलिक कार्यों से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। होलाष्टक 2026 में यह अवधि 24 फरवरी 2026 (मंगलवार) से शुरू होकर 3 मार्च 2026 (मंगलवार) तक चलेगी। वैदिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास की शुक्ल अष्टमी से पूर्णिमा तक यह समय रहता है, और 3 मार्च को होलिका दहन होगा, जबकि अगले दिन रंग वाली होली मनाई जाएगी।
शास्त्रों में होलाष्टक को इसलिए अशुभ कहा गया है क्योंकि इस समय प्रकृति में विशेष ऊर्जा का संचार होता है। पौराणिक कथा के अनुसार, इस अवधि में ही राजा हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रह्लाद को यातनाएं दीं और होलिका ने प्रह्लाद को अग्नि में जलाने की कोशिश की थी। इसलिए इन दिनों में किए गए शुभ कार्यों का फल नहीं मिलता, बल्कि बाधाएं, आर्थिक नुकसान, स्वास्थ्य समस्याएं और पारिवारिक कलह आ सकती हैं। यदि आप होलाष्टक में कोई गलती करते हैं, तो जीवन में लंबे समय तक परेशानियां रह सकती हैं।
होलाष्टक 2026 में भूलकर भी न करें ये 5 काम
विवाह और अन्य मांगलिक संस्कार होलाष्टक में विवाह, मुंडन, नामकरण, उपनयन, गृह प्रवेश जैसे सभी 16 संस्कार पूरी तरह वर्जित हैं। यदि इन दिनों में शादी की जाए, तो वैवाहिक जीवन में कलह, संतान प्राप्ति में देरी और घरेलू सुख में कमी आ सकती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यह समय नकारात्मक प्रभावों से भरा होता है, जो नए रिश्तों पर बुरा असर डालता है।

नया घर, दुकान, जमीन या वाहन खरीदना-बेचना नई संपत्ति, मकान, दुकान, वाहन या कोई भी बड़ी खरीदारी न करें। ऐसा करने से आर्थिक हानि, कानूनी विवाद, कर्ज की समस्या और स्थिरता में कमी आती है। कई लोग इस दौरान प्रॉपर्टी डील फाइनल करते हैं, लेकिन बाद में पछतावा होता है। होलाष्टक के बाद ही ऐसी डील्स पूरी करें।
- निर्माण कार्य शुरू करना या शिलान्यास कोई भी नया निर्माण, मकान की नींव रखना या शिलान्यास वर्जित है।
- इससे काम में बार-बार रुकावटें, अतिरिक्त खर्च, सामग्री की बर्बादी और यहां तक कि
- दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। शास्त्र कहते हैं कि इस समय भूमि में
- नकारात्मक ऊर्जा रहती है, जो निर्माण को प्रभावित करती है।
नवविवाहित बहू को ससुराल की पहली होली दिखाना नई बहू को ससुराल में पहली होली नहीं देखनी चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से वैवाहिक सुख में कमी आती है, पारिवारिक तनाव बढ़ता है और रिश्तों में दरार पड़ सकती है। यह परंपरा विशेष रूप से उत्तर भारत में प्रचलित है, जहां नवविवाहिता को होलाष्टक के दौरान होली से दूर रखा जाता है।
- तामसिक भोजन और नकारात्मक व्यवहार मांसाहार, मदिरा, लहसुन-प्याज
- जैसे तामसिक भोजन से दूर रहें। क्रोध, झगड़ा, नकारात्मक सोच, किसी का अपमान
- या गपशप न करें। ऐसा करने से पुण्य की बजाय पाप बढ़ते हैं
- और जीवन में अशांति फैलती है। इस समय सात्विक जीवनशैली अपनाएं।
होलाष्टक में क्या करें? उपाय और सलाह
हालांकि शुभ कार्य वर्जित हैं, लेकिन यह समय भक्ति और साधना के लिए उत्तम है।
- भगवान विष्णु, नरसिंह भगवान या होलिका की पूजा करें।
- दान-पुण्य करें – अन्न, वस्त्र, धन या कंबल दान से पुण्य मिलता है।
- महामृत्युंजय मंत्र का जप करें – यह स्वास्थ्य और संकटों से रक्षा करता है।
- सात्विक भोजन लें, क्रोध-ईर्ष्या से दूर रहें।
- घर में साफ-सफाई रखें और नकारात्मक विचारों से बचें।
होलाष्टक में सावधानी बरतकर आप जीवन में आने वाली बाधाओं से बच सकते हैं। होली के बाद नए कार्य शुरू करने से शुभ फल मिलते हैं। यह समय आत्म-चिंतन और आध्यात्मिक विकास के लिए भी अच्छा है।
