फिदायीन हमला उमर जसीर जम्मू-कश्मीर में बड़ा आतंकी हमला टल गया। उमर और जसीर की प्लानिंग आखिरी वक्त पर दो बड़ी वजहों से रुक गई। सुरक्षा एजेंसियों ने दी जानकारी, पढ़ें पूरी डिटेल।

कश्मीर घाटी एक बार फिर खून-खराबे से बच गई। खुफिया एजेंसियों की सतर्कता और आतंकी नेटवर्क के भीतर की खींचतान ने उस फिदायीन हमले को नाकाम कर दिया, जिसे बेहद सावधानी से प्लान किया गया था। बताया जा रहा है कि इस हमले का मास्टरमाइंड उमर था, जबकि उसे अंजाम तक पहुंचाने की जिम्मेदारी जसीर नामक आतंकी को दी गई थी। पर आखिर वो कौन-सी दो बड़ी वजहें थीं, जिनकी वजह से जसीर आखिरी वक्त पर रुक गया और हमला टल गया?
आतंकी प्लानिंग का ब्लूप्रिंट
सूत्रों के मुताबिक, उमर ने करीब दो महीने पहले इस फिदायीन हमले की पूरी प्लानिंग तैयार की थी। उसका उद्देश्य सुरक्षा बलों के कैंप पर आत्मघाती हमला कर अधिक से अधिक नुकसान पहुंचाना था। इसके लिए जसीर को खास ट्रेनिंग दी गई थी—वह बम बेल्ट, ऑटोमैटिक राइफल्स और लो-रेडार मूवमेंट से लैस था। पूरे ऑपरेशन की मॉनिटरिंग पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स कर रहे थे।
इस साजिश की जानकारी मिलने के बाद भारतीय खुफिया एजेंसियों ने क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी थी। मोबाइल नेटवर्क से लेकर सोशल मीडिया चैट्स तक की ट्रैकिंग शुरू हुई, जिससे धीरे-धीरे उमर और जसीर के बीच बढ़ती गतिविधियों पर नजर रखी जा सकी।
उमर की प्लानिंग पर एजेंसियों की नजर
खुफिया सूत्रों के अनुसार, उमर ने यह हमला ऐसे वक्त के लिए योजना बनाई थी जब सुरक्षाबलों का मूवमेंट अधिक और सुरक्षा थोड़ी ढीली हो। लेकिन भारतीय सुरक्षाबल पहले से ही अलर्ट पर थे। लगातार सर्च ऑपरेशन और चेकिंग ने आतंकी नेटवर्क का दबाव बढ़ा दिया। इसी बीच, कई छोटे मॉड्यूल्स की गिरफ्तारी ने उमर के नेटवर्क को कमजोर कर दिया था।
फिर भी, जसीर को आगे बढ़ने का निर्देश दिया गया। लेकिन ऑपरेशन शुरू होने से चंद घंटे पहले कुछ ऐसा हुआ, जिसने पूरी स्थिति बदल दी।
पहली वजह: सुरक्षा व्यवस्था का ‘ओवर-अलर्ट’ होना
पहली बड़ी वजह थी इलाके में असामान्य सुरक्षा मुस्तैदी। जिस दिन हमला होना था, उस दिन सेना ने अतिरिक्त पेट्रोलिंग बढ़ा दी थी। खुफिया इनपुट के बाद कई जगह नाकाबंदी की गई, जिससे आतंकियों की मूवमेंट लगभग रुक गई। जब जसीर को यह अहसास हुआ कि हर रास्ते पर जांच बढ़ गई है और किसी भी क्षण संदेह के घेरे में आ सकता है, तो उसने पीछे हटने का निर्णय लिया।
जसीर के लिए यह भी चिंता का विषय था कि उसके साथ मौजूद मददगार लोकल गाइड को पहले ही हिरासत में लिया जा चुका था। इससे पूरा प्लान ध्वस्त होने की आशंका बढ़ गई थी।
दूसरी वजह: आतंकी ग्रुप के भीतर मतभेद
- दूसरी अहम वजह आंतरिक मतभेद थी।
- बताया जाता है कि उमर और उसके साथी कमांडर्स में नए आतंकी भर्ती को लेकर तनाव चल रहा था।
- कई फील्ड कैडरों का मानना था कि आत्मघाती मिशन से संगठन का नुकसान होता है,
- जबकि प्रचार कम मिलता है।
- उमर इस विचार का विरोध करता था और बड़े पैमाने पर हमला चाहता था।
- इस टकराव के कारण उमर ने आखिरी निर्देश समय पर नहीं दिया।
- जसीर भ्रमित हो गया कि उसे अब आगे बढ़ना है या नहीं।
- स्पष्ट आदेश न मिलने से उसने अपना अभियान रोक दिया।
- इसी बीच, सेना की कार्रवाई और बढ़ती घेराबंदी ने आतंकियों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।
घाटी में राहत की सांस
- इस घटना के बाद सुरक्षाबल अधिक अलर्ट मोड में हैं और
- उमर समेत अन्य आतंकियों की तलाश जारी है।
- अधिकारियों का कहना है कि अगर यह हमला हो जाता,
- तो बड़ी जनहानि संभव थी।
- अब सुरक्षाबल इसे एक बड़ी सफलता मान रहे हैं
- कि बिना कोई नुकसान हुए एक खतरनाक फिदायीन साजिश को नाकाम किया गया।
निष्कर्ष
- कश्मीर में इस तरह की आतंकवादी कोशिशें यह दिखाती हैं कि साजिशें अभी भी चल रही हैं,
- लेकिन हमारी एजेंसियों का मॉनिटरिंग नेटवर्क और सुरक्षाबलों की तत्परता
- इन प्रयासों को नाकाम कर रही है।
- जसीर का आखिरी वक्त पर पीछे हटना यह संकेत भी देता है
- कि आतंकी संगठनों के भीतर मनोबल और दिशा दोनों कमजोर हो चुकी हैं।










