साइप्रस तो बहाना है भारत की विदेश नीति और रक्षा निर्यात अब नई ऊंचाइयों को छू रहा है। हाल ही में साइप्रस के साथ हुई रणनीतिक साझेदारी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तहलका मचा दिया है। ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की संभावित डील ने तुर्की की नींद उड़ा दी है। साइप्रस तो बस बहाना है, असली मकसद ब्रह्मोस को ग्रीस तक पहुंचाना है।
मई 2026 में साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिड्स के भारत दौरे और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साइप्रस 방문 के बाद दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग का नया रोडमैप तैयार हुआ है। इस डील के तहत साइप्रस भारत से ब्रह्मोस मिसाइल और उन्नत कामिकाजे ड्रोन्स (नागास्त्र-1 और स्काईस्ट्राइकर) खरीदने को उत्सुक है।

ब्रह्मोस डील का महत्व
ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में से एक है। यह मैक 2.8 से 3 की गति से उड़ती है और दुश्मन के रडार से लगभग बचकर अचूक हमला करती है। साइप्रस के पास इसकी तैनाती से भूमध्य सागर में सैन्य संतुलन पूरी तरह बदल जाएगा।
यह डील यूरोपीय संघ के SAFE प्रोग्राम के तहत लगभग 1.2 बिलियन यूरो के रक्षा पैकेज से फंडेड हो सकती है। भारत और साइप्रस के बीच 2026-2031 के लिए पांच साल का रक्षा सहयोग रोडमैप भी तैयार किया गया है।
साइप्रस तो बहाना है तुर्की क्यों परेशान है?
तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन और उनके रक्षा सलाहकार इस खबर से काफी बौखलाए हुए हैं। इसके कई बड़े कारण हैं:
- तुर्की ने 1974 से उत्तरी साइप्रस पर अवैध कब्जा कर रखा है।
- साइप्रस और ग्रीस (यूनान) दोनों तुर्की के कट्टर विरोधी हैं।
- अगर ब्रह्मोस साइप्रस पहुंच गई तो तुर्की की सेना के लिए बड़ा खतरा पैदा हो जाएगा।
- तुर्की को डर है कि भारत के हथियारों से साइप्रस-ग्रीस मिलकर
- उसकी नाक के नीचे मजबूत रक्षा दीवार खड़ी कर देंगे।
- तुर्की के मीडिया और विशेषज्ञों का कहना है कि “साइप्रस तो बहाना है
- भारत असल में ब्रह्मोस को ग्रीस तक पहुंचाना चाहता है”।
- ग्रीस और तुर्की के बीच पूर्वी एजियन सागर के द्वीपों को लेकर पुराना विवाद है।
- ऐसे में ब्रह्मोस की मौजूदगी तुर्की के लिए दोहरी चुनौती बन जाएगी।
भारत का रणनीतिक जवाब
यह डील संयोग नहीं है। मई 2025 में भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान तुर्की ने पाकिस्तान को ड्रोन्स मुहैया कराए थे। एर्दोगन कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का साथ देते रहे हैं। अब भारत भूमध्य सागर में तुर्की की नाक के नीचे अपनी सबसे घातक मिसाइल पहुंचाकर करारा जवाब दे रहा है।
यह भारत की ‘वैश्विक दक्षिण’ और इंडो-पैसिफिक से आगे बढ़कर मेडिटेरेनियन में रणनीतिक उपस्थिति बढ़ाने की कोशिश का हिस्सा माना जा रहा है।
ग्रीस-तुर्की तनाव फिर बढ़ा
- हाल ही में तुर्की के F-16 जेट्स ने ग्रीस के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया
- जिसके जवाब में ग्रीस के लड़ाकू विमानों ने ‘सिम्युलेटेड डॉगफाइट’ किया।
- तुर्की के रक्षा मंत्री यासर गुलर ने ग्रीस को खुली धमकी दी है।
- ऐसे में साइप्रस-भारत डील तुर्की के लिए और चिंता का विषय बन गई है।
सोशल मीडिया पर चर्चा
- एक्स (Twitter) पर तुर्की यूजर्स भारत, ग्रीस और साइप्रस पर निशाना साध रहे हैं।
- वहीं ग्रीक और साइप्रस के लोग भारत की तारीफ कर रहे हैं। वे कह रहे हैं
- कि भारत जैसे शक्तिशाली देश का समर्थन उन्हें तुर्की की धमकियों से लड़ने की ताकत देगा।
भारत के लिए फायदे!
- ब्रह्मोस का निर्यात भारत की ‘मेक इन इंडिया’ और रक्षा निर्यात को बढ़ावा देगा।
- साइप्रस और ग्रीस जैसे यूरोपीय देशों में भारतीय हथियारों की पहुंच बढ़ेगी।
- चीन और तुर्की के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने में मदद मिलेगी।
साइप्रस-भारत रक्षा साझेदारी सिर्फ हथियारों की डील नहीं है, बल्कि भू-राजनीतिक समीकरण बदलने वाला बड़ा कदम है। ब्रह्मोस अब केवल एशिया तक सीमित नहीं रहेगी। अगर यह ग्रीस और साइप्रस तक पहुंच गई तो तुर्की और पाकिस्तान के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी हो जाएगी।






