ममता बनर्जी की TMC पश्चिम बंगाल की राजनीति में भूचाल आने वाला है। ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) पार्टी टूट की कगार पर पहुंच गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पार्टी के 60 विधायक ऋतब्रत बनर्जी (Ritabrata Banerjee) के नेतृत्व में अलग गुट बनाने की तैयारी कर रहे हैं। अगर आज (3 जून 2026) यह गुट विधानसभा स्पीकर को समर्थन पत्र सौंपता है, तो TMC दो हिस्सों में बंट जाएगी।
यह घटनाक्रम हाल के विधानसभा चुनावों में TMC की हार के बाद पार्टी के अंदरूनी असंतोष को सामने ला रहा है।

60 विधायकों का ‘असली TMC’ गुट
हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ऋतब्रत बनर्जी के गुट ने 80 TMC विधायकों में से 60 का समर्थन हासिल कर लिया है। एक नेता ने कहा, “हमारा पत्र तैयार है। हम असली TMC हैं। बुधवार को स्पीकर रतींद्रनाथ बोस को पत्र सौंप देंगे।”
अगर 60 विधायक अलग होते हैं, तो ममता बनर्जी के पास मात्र 20 विधायक रह जाएंगे। इससे TMC को विपक्ष का आधिकारिक दर्जा भी खोना पड़ सकता है।
ऋतब्रत बनर्जी कौन हैं?
ऋतब्रत बनर्जी TMC के बागी नेता हैं। हाल ही में पार्टी ने उन्हें और एक अन्य विधायक को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया था। ऋतब्रत ने विधानसभा परिसर में कुछ विधायकों से मुलाकात की और उनके साथ मुरमुरा भी खाया। उन्होंने कहा कि वे “एक-एक दिन के हिसाब से आगे बढ़ रहे हैं”।
ममता बनर्जी की TMC में क्यों बढ़ा असंतोष?
पार्टी के अंदर कई मुद्दे उभरकर आए हैं:
- हाल के चुनावों में TMC की खराब परफॉर्मेंस
- नए लोगों को टिकट देने और पुराने नेताओं की उपेक्षा
- संगठनात्मक कमजोरियां
- ममता बनर्जी के करीबी नेताओं पर वर्चस्व का आरोप
पश्चिम बंगाल के मंत्री तापस रॉय ने खुद माना कि पार्टी में महाराष्ट्र वाली शिवसेना जैसी टूट के संकेत दिख रहे हैं। उन्होंने कहा कि TMC ने कई ऐसे लोगों को शामिल किया जिनका राजनीति से ज्यादा लेना-देना नहीं था।
ममता गुट की प्रतिक्रिया!
TMC के वरिष्ठ नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय का कहना है कि अधिकांश विधायक अभी भी ममता बनर्जी के साथ हैं। हालांकि, ममता के बुलाए गए विरोध प्रदर्शन में कई सांसद और विधायकों के न पहुंचने से असंतोष साफ दिखाई दिया। कार्यक्रम में मात्र 150 लोगों की भीड़ बताई गई, जिस पर BJP नेता शुभेंदु अधिकारी ने तंज कसा।
क्या होगा अगर पार्टी टूटी?
- ऋतब्रत गुट को चुनाव आयोग से ‘TMC’ नाम और चिह्न मिलने की लड़ाई लड़नी पड़ेगी।
- ममता बनर्जी का गुट कमजोर हो जाएगा और विपक्ष की भूमिका भी प्रभावित होगी।
- BJP इस टूट का फायदा उठाकर पश्चिम बंगाल में अपनी पकड़ मजबूत कर सकती है।
पश्चिम बंगाल की सियासी तस्वीर
- 2026 में TMC की यह आंतरिक लड़ाई राज्य की राजनीति को पूरी तरह बदल सकती है।
- ममता बनर्जी लंबे समय से बंगाल की राजनीति पर छाई रहीं, लेकिन हाल
- के वर्षों में BJP का तेजी से उभार और कांग्रेस-वामपंथी गठबंधन ने उनकी चुनौती बढ़ा दी है।
- अगर 60 विधायक अलग होते हैं, तो यह ममता बनर्जी के करियर की सबसे बड़ी चुनौती साबित होगी।
आगे क्या हो सकता है?
- आज स्पीकर को पत्र सौंपा जा सकता है।
- पार्टी के अंदर और बाहरी दबाव बढ़ सकता है।
- चुनाव आयोग इस मामले में सुनवाई कर सकता है।
ममता बनर्जी की TMC में टूट की अटकलें अब हकीकत बनती नजर आ रही हैं। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला 60 विधायकों का गुट अगर सफल हुआ तो बंगाल की राजनीति का पूरा समीकरण बदल जाएगा। फिलहाल सभी की निगाहें आज होने वाले घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।
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