विकास दिव्यकीर्ति : देश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव आया है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने 13 जनवरी 2026 को “उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्द्धन से संबंधित विनियम, 2026” जारी किए। ये नए नियम 2012 की भेदभाव-विरोधी रूपरेखा की जगह ले रहे हैं। इनका मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव सहित अन्य प्रकार के भेदभाव को रोकना और समानता को बढ़ावा देना है। नए नियमों में इक्विटी कमिटी का गठन अनिवार्य किया गया है, जिसमें SC, ST और OBC का प्रतिनिधित्व होगा। शिकायत तंत्र मजबूत किया गया है, लेकिन इन नियमों पर छात्रों में काफी विवाद है। कई सवर्ण छात्रों का कहना है कि ये नियम एकतरफा हैं और फॉल्स केस बढ़ सकते हैं।
नए नियमों में क्या अच्छा है? दिव्यकीर्ति के मुख्य बिंदु
इसी बीच प्रसिद्ध शिक्षक और दृष्टि IAS के संस्थापक डॉ. विकास दिव्यकीर्ति ने ANI से बातचीत में इन नियमों पर अपनी राय दी। उन्होंने नए UGC नियमों की खुलकर तारीफ की और कहा कि ये 2012 के नियमों से कहीं बेहतर हैं। दिव्यकीर्ति ने कहा, “कुछ बिंदुओं को छोड़ दिया जाए, तो रेग्युलेशन्स बहुत अच्छे हैं। 2012 से तो बहुत अच्छे हैं। इसमें कोई दिक्कत नहीं है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि “इन नियमों की जरूरत भी थी।”

डॉ. दिव्यकीर्ति ने नए नियमों को समावेशी और जरूरी बताया। उनके अनुसार:
- ये नियम उच्च शिक्षा में समानता सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए हैं।
- भेदभाव को रोकने के लिए कानूनी रूप से लागू शासन व्यवस्था दी गई है।
- 2012 के नियमों में लचीलापन ज्यादा था, लेकिन नए नियम ज्यादा स्पष्ट और प्रभावी हैं।
- उन्होंने सुझाव दिया कि “रिप्रेजेंटेशन इस तरह से दिया जाए कि समाज के बाकी वर्गों (सवर्ण) की भूमिका भी शामिल रहे।” लेकिन उनका मानना है कि नियम बनाने वालों का इरादा किसी वर्ग को नजरअंदाज करना नहीं था।
उन्होंने कहा, “वो भी जो सरकार इस समय सत्ता में हैं, वो ऐसा कैसे कर सकती है। उनका तो प्राइमरी वोट बैंक ही वो है।” 2012 में भी ऐसा नहीं लिखा था, लेकिन तब किसी ने शोर नहीं मचाया।
भेदभाव की भावना और सवर्ण छात्रों के डर पर क्या कहा?
- दिव्यकीर्ति ने सवर्ण छात्रों के डर को लेकर तर्क दिया। उन्होंने कहा, “भेदभाव कोई फीलिंग नहीं हो सकती है।
- अगर है तो कृत्य होगा।” यानी सिर्फ मन में डर आना भेदभाव नहीं, बल्कि वास्तविक कृत्य (कार्य) होना चाहिए।
- उन्होंने पूछा, “केवल मेरे मन में आ गया कि इससे होगा, तो कैसे हो जाएगा।” उनका मत है
- कि नियमों में भेदभाव बढ़ाने की कोई गुंजाइश नहीं है।
विरोध प्रदर्शनों पर सवाल
- डॉ. दिव्यकीर्ति ने विरोध प्रदर्शनों को “ऑर्गेनिक नहीं” बताया। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है
- कि ये सब कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के जो प्रिंसिपल और कुलपति वगैरह हैं, वो करा रहे हैं।
- उनका कहना है कि नियमों में सिर्फ 2 लाइन का संशोधन (OBC वर्ग को शामिल करना) है।
- अधिकांश लोगों को दिक्कत नहीं, लेकिन कंप्लायंस (अनुपालन)
- मुश्किल होने से कुछ लोग पूरा नियम वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
विवाद और सुप्रीम कोर्ट में याचिका
- नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट में PIL दाखिल हो चुकी है। सीजेआई सूर्यकांत इसे सुनने के लिए तैयार हैं।
- कई छात्रों का आरोप है कि नियम एकतरफा हैं और फॉल्स शिकायतों पर कोई सजा नहीं है।
- लेकिन दिव्यकीर्ति का मानना है कि ये नियम क्रिमिनल नेचर के नहीं हैं, बल्कि समानता बढ़ाने के लिए हैं।
डॉ. विकास दिव्यकीर्ति के बयान से साफ है कि नए UGC नियम उच्च शिक्षा में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। वे छात्रों से अपील करते हैं कि भावनाओं से ऊपर उठकर नियमों को समझें। उच्च शिक्षा में समानता और भेदभाव मुक्त परिसर सभी के हित में है। उम्मीद है कि ये नियम सही तरीके से लागू होंगे और विवाद कम होंगे।
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