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गणतंत्र दिवस 2026 पहली बार कर्तव्य पथ पर दिखेंगे लद्दाख के दो कूबड़ वाले बैक्ट्रियन ऊंट – नुब्रा घाटी की अनोखी विरासत!

गणतंत्र दिवस 2026
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गणतंत्र दिवस 2026 पहली बार कर्तव्य पथ पर दिखेंगे लद्दाख के दो कूबड़ वाले बैक्ट्रियन ऊंट – नुब्रा घाटी की अनोखी विरासत!

गणतंत्र दिवस 2026 : 26 जनवरी 2026 को होने वाले 77वें गणतंत्र दिवस परेड में एक ऐतिहासिक पल देखने को मिलेगा! पहली बार लद्दाख की नुब्रा घाटी से दो कूबड़ वाले बैक्ट्रियन ऊंट (Double-Humped Bactrian Camels) कर्तव्य पथ पर मार्च करेंगे। भारतीय सेना की रिमाउंट एंड वेटरनरी कोर (Remount and Veterinary Corps) की इस विशेष पशु टुकड़ी में ये ऊंट शामिल होंगे, जो उच्च ऊंचाई वाले ठंडे रेगिस्तान में सेना की मदद करते हैं। यह कदम भारत की विविध जैव-विविधता, सांस्कृतिक विरासत और सेना की उच्च हिमालयी क्षमताओं को देश के सामने लाएगा। आज तक की रिपोर्ट के अनुसार, ये ऊंट -40 डिग्री सेल्सियस तक की ठंड और पतली हवा में जीवित रह सकते हैं।

गणतंत्र दिवस 2026 बैक्ट्रियन ऊंट की खासियतें और महत्व

ये बैक्ट्रियन ऊंट (वैज्ञानिक नाम: Camelus bactrianus) दुनिया के सबसे दुर्लभ और अनुकूलित प्राणियों में से एक हैं। इनकी पीठ पर दो कूबड़ होते हैं, जो वसा जमा करके ऊर्जा प्रदान करते हैं। ये ऊंट 15,000 फीट से अधिक ऊंचाई, अत्यधिक ठंड और कम ऑक्सीजन वाले इलाकों में आसानी से जीवित रहते हैं। वे 250 किलोग्राम तक का भार उठा सकते हैं और कम पानी-चारे के साथ लंबी दूरी तय कर लेते हैं।

गणतंत्र दिवस 2026
गणतंत्र दिवस 2026

ये ऊंट प्राचीन सिल्क रोड के समय से लद्दाख के नुब्रा घाटी में पाए जाते हैं। नुब्रा घाटी (जिसे ‘ठंडा रेगिस्तान’ भी कहा जाता है) इनकी मूल निवास जगह है। भारतीय सेना इन्हें पूर्वी लद्दाख के सीमावर्ती इलाकों में रसद आपूर्ति, गश्त और पेट्रोलिंग के लिए इस्तेमाल करती है। ये मूक योद्धा कहलाते हैं, क्योंकि ये चुपचाप कठिन परिस्थितियों में काम करते हैं जहां वाहन नहीं पहुंच पाते।

गणतंत्र दिवस परेड में क्या होगा खास?

इस साल की परेड में सेना की पशु टुकड़ी पहली बार दिखेगी। इसमें शामिल होंगे:

  • 2 बैक्ट्रियन ऊंट (नुब्रा घाटी से)
  • 4 जांस्कर टट्टू (Zanskar Ponies)
  • 4 शिकारी पक्षी (Raptors)
  • 10 भारतीय नस्ल के सेना कुत्ते + 6 पारंपरिक सैन्य कुत्ते

ये टुकड़ी कर्तव्य पथ पर मार्च करेगी और देश को लद्दाख की उच्च हिमालयी जैव-विविधता से रूबरू कराएगी। रक्षा मंत्रालय और भारतीय सेना ने इसे ऐतिहासिक कदम बताया है। ये ऊंट IUCN की ‘At Risk’ श्रेणी में आते हैं, इसलिए उनकी परेड में भागीदारी संरक्षण जागरूकता भी फैलाएगी।

सांस्कृतिक और रणनीतिक महत्व

  • ये ऊंट सिर्फ जानवर नहीं, बल्कि लद्दाख की सांस्कृतिक विरासत और सेना की रणनीतिक ताकत का प्रतीक हैं।
  • प्राचीन समय में सिल्क रोड पर व्यापारियों के लिए ये वाहन थे। आज ये सेना के लिए उच्च ऊंचाई लॉजिस्टिक्स
  • का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। गणतंत्र दिवस पर इनका शामिल होना ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की
  • भावना को मजबूत करेगा, जहां विविध क्षेत्रों की अनोखी विशेषताएं राष्ट्रीय मंच पर दिखाई जाएंगी।
  • यह परेड भारत की विविधता को सेलिब्रेट करेगी – जहां एक तरफ आधुनिक हथियार
  • और ड्रोन होंगे, तो दूसरी तरफ प्राचीन प्रकृति के ये जीवित प्रमाण। लद्दाख के लोगों
  • और सेना के लिए यह गर्व का क्षण होगा।