बिहार विधानसभा चुनाव : बिहार चुनाव 2025 में राजनीतिक हलचल अपने चरम पर है, और दूसरे चरण की वोटिंग राज्य में सत्ता समीकरण तय करने के लिए अहम साबित होने जा रही है। इस चरण के मतदान से बिहार की सरकार के निर्माण की दिशा निर्धारित होगी, खासकर एनडीए (राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन) के लिए यह एक निर्णायक चरण माना जा रहा है। इस ब्लॉग पोस्ट में दूसरे चरण की वोटिंग के महत्व, राजनीतिक परिदृश्य, प्रमुख दावेदारों और संभावित परिणामों की जानकारी दी जाएगी।
बिहार चुनाव 2025 का राजनीतिक परिदृश्य
#बिहार की राजनीति सदैव से बहु-ध्रुवीय रही है, जहां विभिन्न राजनीतिक दल और गठबंधन सरकार बनाने की होड़ में रहते हैं। एनडीए, जिसमें जदयू, भाजपा जैसे प्रमुख दल शामिल हैं, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में राज्य में सत्ता की मुख्य ताकत बनी हुई है। हालांकि, विपक्षी दल जैसे महागठबंधन (राजद, कांग्रेस, दूसरे छोटे दल) भी सत्ता पाने के मजबूत दावेदार हैं। इस चुनाव में जनता की उम्मीदें और राजनीतिक समीकरण दोनों ही बहुत संवेदनशील हैं।

दूसरे चरण की वोटिंग का महत्व
11 नवंबर को होने वाला दूसरा चरण 20 जिलों की 122 सीटों पर मतदान कराएगा। यह मतदान इसलिए खास है क्योंकि इन सीटों पर मिलने वाले वोट एनडीए या विपक्ष की सरकार बनाने की राह तय करेंगे। पहले चरण में मिले नतीजों से स्पष्ट हो रहा है कि दूसरे चरण में भारी मुकाबला होगा, जहां हार-जीत का फैसला होने वाला है। इस चरण की सीटें सामान्यतः गंभीर राजनीतिक लड़ाई वाली मानी जाती हैं, जिससे पूरे चुनाव के परिणाम प्रभावित होंगे।
एनडीए की राह दूसरी वोटिंग से तय होगी
- एनडीए के लिए यह चरण देखना जरूरी होगा कि उसका वोट बैंक कितना मजबूत है
- और किस प्रकार उसने स्थानीय नेताओं के जरिए जनता तक अपनी बात पहुँचाई है।
- मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की लोकप्रियता और भाजपा के गठबंधन सहयोगी दलों के समर्थन पर निर्भर करता है
- कि वे इस चरण में कितनी सीटें सुरक्षित कर पाते हैं। यदि एनडीए दूसरे चरण में अच्छा प्रदर्शन करता है
- तो संभावना बढ़ जाएगी कि वह नेतृत्व वाली सरकार आएगी।
विपक्ष की रणनीति और दांव
- विपक्षी दल महागठबंधन ने भी दूसरे चरण में चुनाव प्रचार में तेजी ला दी है। राजद के नेता तेजस्वी यादव
- अपनी युवा और गतिशील छवि के सहारे युवाओं और किसानों को आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं।
- विपक्ष का जोर भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और विकास के मुद्दों पर है, जिसमें एनडीए की सरकार को चुनौतियां मिल रही हैं।
- राजद और कांग्रेस के अलवा अन्य छोटे दल भी अपने-अपने क्षेत्र में वोट बैंक मजबूत करना चाहते हैं।
सुरक्षा और चुनाव प्रक्रिया
- दूसरे चरण के दौरान बिहार की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह मुस्तैद है। नेपाल सीमा को आगामी वोटिंग
- से ठीक पहले 48 घंटे के लिए सील कर दिया गया है, और 1500 से अधिक केंद्रीय बल तैनात हैं
- ताकि मतदान शांतिपूर्ण और निष्पक्ष हो। चुनाव आयोग ने ईवीएम और वीवीपीएटी के जरिए
- पारदर्शिता बनाए रखी है, जिससे मतदाता अपने मताधिकार का सही उपयोग कर सकें।
मतदाताओं की भूमिका और लोकतंत्र का सम्मान
बिहार के मतदाता इस चरण में अपनी जिम्मेदारी निभाकर राज्य की राजनीतिक दिशा बनाते हैं। सही उम्मीदवार को चुनना और अपने मताधिकार का प्रयोग करना लोकतंत्र की बुनियाद है। मतदाताओं का जागरूक होना, चुनावी मुद्दों को समझना और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करना आवश्यक है।
- बिहार चुनाव 2025 के दूसरे चरण की वोटिंग राज्य में सरकार गठित करने के लिए निर्णायक साबित होगी।
- एनडीए के लिए यह मौका है अपनी पकड़ मजबूत करने का, जबकि विपक्ष इसे सत्ता पाने की
- लड़ाई के रूप में देख रहा है। परिणाम चाहे जो हो, यह चुनाव बिहार के लोकतंत्र
- की सेहत को दर्शाएगा और आगे की राजनीतिक दिशा तय करेगा।










