आज का पंचांग : जानें आज का पंचांग, राहुकाल, शुभ-अशुभ मुहूर्त और भद्रा काल का महत्व। 7 नवंबर 2025 के सभी ज्योतिषीय योग।
7 नवंबर 2025, शुक्रवार का दिन मार्गशीर्ष मास की कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि है। इस दिन का पंचांग हमारे जीवन के महत्वपूर्ण पक्षों जैसे कार्य, पूजा-पाठ, यात्रा और निवेश के लिए महत्वपूर्ण संकेत देता है। खासतौर पर आज का दिन भद्रा काल की छाया में रहेगा, जिससे दिनभर कुछ सावधानी बरतना आवश्यक होगा।
पंचांग की मुख्य जानकारी!

- तिथि: मार्गशीर्ष मास कृष्ण द्वितीया तिथि सुबह 11:06 बजे तक रहेगी, उसके बाद तृतीया तिथि प्रारंभ हो जाएगी।
- वार: शुक्रवार
- नक्षत्र: रोहिणी नक्षत्र रात 12:34 बजे तक रहेगा, उसके बाद मृगशीर्ष नक्षत्र होगा।
- योग: परिघ योग रात 10:28 बजे तक होगा, उसके बाद शिव योग शुरू होगा।
- करण: गर करण सुबह 11:06 बजे तक, वणिजा करण रात 9:16 बजे तक।
- सूर्योदय: सुबह 6:37 बजे
- सूर्यास्त: शाम 5:32 बजे
- चंद्रमा: वृषभ राशि में रहेगा।
भद्रा काल (Bhadra Kaal) का समय और प्रभाव
7 नवंबर 2025 को भद्रा काल का आरंभ रात्रि 9:16 बजे से होगा और यह अगले दिन सुबह 7:32 बजे तक रहेगा। भद्रा काल को हिंदू धर्म में एक अशुभ काल माना जाता है। इस समय में कोई भी महत्वपूर्ण कार्य करने से बचना चाहिए क्योंकि इसके प्रभाव से नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और कार्यों में बाधा आ सकती है।
- भद्रा काल का प्रभाव विशेषकर पूजा, व्यापार, यात्रा, और नए प्रोजेक्ट शुरू करने पर पड़ता है।
- इससे बचने के लिए इस अवधि में शुभ कामों को स्थगित करना ही बेहतर होता है।
राहुकाल और अन्य अशुभ काल
- राहुकाल: 7 नवंबर को 10:30 से लेकर 12:00 बजे तक राहुकाल रहेगा। राहुकाल काल में भी कोई शुभ कार्य न करने की सलाह दी जाती है।
- दिशाशूल: आज पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहेगा, इसलिए इस दिशा में यात्रा या कोई बड़ा काम न करें।
दिन के शुभ मुहूर्त
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर लगभग 11:40 बजे से 12:30 बजे तक, इस समय को दिन का सबसे शुभ मुहूर्त माना जाता है। इस समय कोई भी नया कार्य आरंभ करना लाभकारी रहता है।
- लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त: आज शुक्रवार होने के कारण, शाम के प्रदोष काल में माता लक्ष्मी की पूजा करने का श्रेष्ठ समय है। इस समय पूजा से धन एवं वैभव की वृद्धि होती है।
- भद्रा काल से पहले किए गए कार्य: जो कार्य भद्रा काल से पहले शुरू किए गए हैं, उन्हें निरंतरता से जारी रखना लाभकारी रहता है।
पूजा-ओं और व्रत
- 7 नवंबर को रोहिणी व्रत भी मनाया जाता है, जो कि विशेष रूप से माँ लक्ष्मी और संतोषी माता को समर्पित होता है।
- यह व्रत शुद्धता और समृद्धि का संचार करता है। उपवास और पूजा-आराधना से जीवन में सुख, समृद्धि
- और शांति आती है। इस दिन श्रीसूक्त और लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ भी शुभ माना जाता है।
सावधानियां और उपाय
- भद्रा काल और राहुकाल के समय में आवश्यक कार्यों को स्थगित करें।
- आज पश्चिम दिशा में किसी यात्रा या नए कार्य की शुरुआत टालें।
- माता लक्ष्मी की पूजा-आराधना में लाल गुलाब, कमल के फूल, अक्षत, सिंदूर, और दीपक अवश्य अर्पित करें।
- उपवास रखने वाले इस दिन फल, खीर, और मिठाई का भोग लगाएं।
- तनाव से बचने के लिए ध्यान (मेडिटेशन) करना लाभकारी रहेगा।
स्वास्थ्य और दिनचर्या
आज का दिन स्वास्थ्य के लिहाज से सामान्य रहेगा। हल्की थकान या मानसिक तनाव की संभावना हो सकती है, इसलिए दिनभर पाकृत व्यायाम और प्राणायाम करें। स्वस्थ आहार लें और पर्याप्त जल पीएं। शाम को शांत वातावरण में विश्राम करें ताकि मन और शरीर दोनों तरोताजा रहें।
- 7 नवंबर 2025 का पंचांग यह सुझाव देता है कि दिन में कुछ शुभ समय के साथ-साथ भद्रा काल और
- राहुकाल जैसे अशुभ काल भी हैं। इसलिए इन कालों से बचकर ही कोई महत्वपूर्ण कार्य करना चाहिए।
- पूजा-पाठ का विशेष महत्व रहेगा और माता लक्ष्मी की कृपा से धन-वैभव में वृद्धि संभव है।
- सावधानी रखने से आपके दिन के कार्य सफल होंगे और जीवन में सकारात्मकता आएगी।











