दिल्ली सांसद मनोज तिवारी दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। BJP सांसद मनोज तिवारी और AAP विधायक संजीव झा के बीच मंगलवार देर रात ‘O जोन’ (O Zone) विवाद को लेकर तीखी बहस और भिड़ंत हो गई। AAP विधायक संजीव झा जगतपुर गांव के मुद्दे को लेकर सांसद मनोज तिवारी के आवास पर पहुंचे, जहां दोनों नेताओं के बीच गर्मागर्मी देखी गई।
यह घटना दिल्ली के O जोन विवाद को नए सिरे से सुर्खियों में ला दी है।

क्या है पूरा मामला?
मंगलवार रात AAP विधायक संजीव झा और पार्षद गगन चौधरी मनोज तिवारी के आवास पर पहुंचे। उन्होंने जगतपुर गांव में हो रही तोड़फोड़ का मुद्दा उठाया। विधायक ने आरोप लगाया कि सांसद के आश्वासन के बावजूद गांव में तोड़फोड़ की कार्रवाई हो रही है, जिससे लोगों में भय का माहौल है।
मनोज तिवारी ने जवाब में संजीव झा पर पलटवार करते हुए कहा कि वे गांव वालों को गुमराह कर रहे हैं। सांसद ने दावा किया कि AAP विधायक खुद सरकारी जमीन पर बने मकान में रह रहे हैं।
दिल्ली सांसद मनोज तिवारी O जोन विवाद क्या है?
O जोन दिल्ली में यमुना नदी के किनारे के उन क्षेत्रों को कहा जाता है जहां निर्माण पर प्रतिबंध है।
- नदी में बने बांध से नदी की तरफ का हिस्सा O जोन माना जाता है।
- कई पुरानी कॉलोनियां गलती से O जोन में चिह्नित हैं।
- इन क्षेत्रों में अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई अक्सर विवादास्पद होती है।
मनोज तिवारी ने बताया कि O जोन की परिभाषा स्पष्ट है। एलजी, MCD और दिल्ली सरकार की बैठक के बाद उन क्षेत्रों को O जोन की सूची से बाहर करने का फैसला लिया गया है जो वास्तव में इसमें नहीं आते।
मनोज तिवारी का आरोप
BJP सांसद ने कहा:
- संजीव झा और पार्षद गगन चौधरी ने गांव वालों को बरगलाने की कोशिश की।
- AAP दिल्ली सरकार को बदनाम करना चाहती है।
- संजीव झा खुद सरकारी जमीन पर कब्जा करके रह रहे हैं।
- O जोन में कोई भी कार्रवाई DDA ही कर सकता है, MCD नहीं।
संजीव झा की मांग
AAP विधायक ने सांसद से गुजारिश की कि वे गांव वालों को भरोसा दिलाएं कि आगे तोड़फोड़ नहीं होगी। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले सांसद ने खुद O जोन बोर्ड गलत बताया था, लेकिन अब कार्रवाई हो रही है।
दिल्ली की राजनीति में O जोन का महत्व
यह विवाद दिल्ली की सत्ता की लड़ाई को भी दर्शाता है। AAP सरकार और BJP के बीच O जोन, अवैध निर्माण और पुनर्वास जैसे मुद्दों पर लगातार टकराव चलता रहता है।
मुख्य मुद्दे:
- हजारों परिवारों का पुनर्वास
- अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई
- सरकारी जमीन पर कब्जे के आरोप
- राजनीतिक फायदे के लिए मुद्दे का इस्तेमाल
विशेषज्ञों की राय
शहर नियोजन विशेषज्ञों का कहना है कि O जोन का मुद्दा पूरी तरह तकनीकी और कानूनी है। इसमें राजनीतिक रंग चढ़ाने से आम लोगों को परेशानी होती है। DDA को स्पष्ट नक्शे जारी करके विवाद को सुलझाना चाहिए।
आगे क्या होगा?
- O जोन से संबंधित क्षेत्रों को सूची से बाहर करने की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद।
- अदालत में इस मामले की सुनवाई संभव।
- दोनों पार्टियां इस मुद्दे को चुनावी हथियार के रूप में इस्तेमाल कर सकती हैं।
दिल्ली में मनोज तिवारी और संजीव झा के बीच O जोन विवाद पर हुई देर रात की भिड़ंत साफ दिखाती है कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता कितनी तीखी हो सकती है। आम लोगों की समस्या का हल निकालने के बजाय आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। उम्मीद है कि प्रशासन और संबंधित विभाग इस विवाद को जल्द सुलझाकर लोगों को राहत देंगे।
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