CTET TET पासिंग मार्क्स देश में शिक्षक भर्ती से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) और विभिन्न राज्यों की शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के पासिंग मार्क्स को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार शिक्षकों की कमी और कम पास प्रतिशत को देखते हुए CTET और TET के न्यूनतम अंकों में बदलाव के विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो लाखों शिक्षक अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिल सकती है। हालांकि अभी तक इस संबंध में कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है, लेकिन शिक्षा जगत में इस विषय पर बहस तेज हो गई है।

क्या है CTET और TET?
CTET (Central Teacher Eligibility Test) और TET (Teacher Eligibility Test) शिक्षक बनने के लिए आवश्यक पात्रता परीक्षाएं हैं। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) के नियमों के अनुसार कक्षा 1 से 8 तक के शिक्षकों के लिए TET या CTET पास करना आवश्यक योग्यता मानी जाती है।
#CTET का आयोजन CBSE द्वारा किया जाता है, जबकि राज्य सरकारें अपने-अपने राज्य TET आयोजित करती हैं। इन परीक्षाओं का उद्देश्य योग्य और प्रशिक्षित शिक्षकों का चयन सुनिश्चित करना है।
CTET TET पासिंग मार्क्स वर्तमान में कितने अंक जरूरी हैं?
वर्तमान नियमों के अनुसार CTET में सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को 150 में से 90 अंक (60%) प्राप्त करना आवश्यक होता है। वहीं OBC, SC, ST और PwD वर्ग के उम्मीदवारों के लिए 82 अंक (55%) निर्धारित हैं।
यही मानक अधिकांश TET परीक्षाओं में भी लागू किए जाते हैं। कई उम्मीदवारों का मानना है कि पासिंग मार्क्स अधिक होने के कारण बड़ी संख्या में अभ्यर्थी पात्रता हासिल नहीं कर पाते।
पास प्रतिशत बना चिंता का विषय
- हाल के CTET परिणामों ने शिक्षा क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है। CTET 2026 में केवल
- लगभग 25.68 प्रतिशत उम्मीदवार ही परीक्षा पास कर सके। यानी परीक्षा
- में शामिल होने वाले लगभग 75 प्रतिशत अभ्यर्थी सफल नहीं हो पाए।
- विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार कम पास प्रतिशत के कारण स्कूलों में शिक्षकों की
- कमी की समस्या और गंभीर हो सकती है। कई राज्यों में पहले से ही बड़ी संख्या में शिक्षक पद खाली पड़े हैं।
पासिंग मार्क्स कम करने पर क्यों हो रही चर्चा?
- शिक्षक भर्ती से जुड़े कई विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान प्रणाली में कुछ सुधार की आवश्यकता है।
- उनका कहना है कि यदि पासिंग मार्क्स में सीमित राहत दी जाती है
- तो अधिक उम्मीदवार पात्र बन सकेंगे और शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को गति मिलेगी।
- हालांकि दूसरी ओर शिक्षा विशेषज्ञों का एक वर्ग मानता है कि पासिंग मार्क्स कम करने
- से शिक्षा की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है। इसलिए किसी भी बदलाव से पहले व्यापक विचार-विमर्श जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट का क्या रुख है?
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को बरकरार रखा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि शिक्षक बनने के लिए TET योग्यता एक महत्वपूर्ण मानक है। हालांकि कोर्ट ने कुछ मामलों में पात्रता प्राप्त करने के लिए समयसीमा बढ़ाने की अनुमति दी है, लेकिन TET की अनिवार्यता को कम नहीं किया गया है।
इस फैसले से यह स्पष्ट होता है कि भविष्य में भी शिक्षक भर्ती में TET और CTET की भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहेगी।
अभ्यर्थियों को क्या फायदा हो सकता है?
यदि पासिंग मार्क्स में बदलाव किया जाता है, तो इसके कई संभावित लाभ हो सकते हैं:
- अधिक उम्मीदवार पात्र हो सकेंगे।
- शिक्षक भर्ती प्रक्रिया तेज हो सकती है।
- खाली शिक्षक पदों को भरने में मदद मिलेगी।
- ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ सकती है।
- लाखों अभ्यर्थियों को रोजगार के अवसर मिल सकते हैं।
हालांकि यह केवल संभावित लाभ हैं और अंतिम निर्णय संबंधित संस्थाओं द्वारा ही लिया जाएगा।
अभी क्या है स्थिति?
- फिलहाल CTET और TET के पासिंग मार्क्स में किसी प्रकार के आधिकारिक
- बदलाव की घोषणा नहीं हुई है। वर्तमान नियम यथावत लागू हैं
- और उम्मीदवारों को मौजूदा निर्धारित अंकों के आधार पर ही परीक्षा की तैयारी करनी चाहिए।
- विशेषज्ञों की सलाह है कि अभ्यर्थी किसी भी अफवाह पर भरोसा न करें और केवल आधिकारिक सूचनाओं को ही मानें।
CTET TET पासिंग मार्क्स में संभावित बदलाव की चर्चा ने लाखों शिक्षक अभ्यर्थियों का ध्यान आकर्षित किया है। कम पास प्रतिशत और शिक्षकों की कमी जैसे मुद्दों को देखते हुए विभिन्न विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक फैसला नहीं लिया गया है। ऐसे में उम्मीदवारों को वर्तमान पात्रता मानकों के अनुसार तैयारी जारी रखनी चाहिए और आधिकारिक घोषणाओं पर नजर बनाए रखनी चाहिए। यदि भविष्य में कोई बदलाव होता है, तो इसका सीधा असर शिक्षक भर्ती प्रक्रिया और लाखों अभ्यर्थियों के करियर पर पड़ सकता है।







