मोदी सरकार की बड़ी घोषणा नई दिल्ली। केंद्र सरकार गिग इकोनॉमी में काम करने वाले लाखों युवाओं के लिए सोशल सिक्योरिटी की नई स्कीम लाने जा रही है। मोदी सरकार गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को एक्सीडेंटल इंश्योरेंस, स्वास्थ्य सुविधाएं, मैटरनिटी सपोर्ट, पेंशन जैसी सुरक्षा, कैश सपोर्ट, एजुकेशन लोन और अंतिम संस्कार खर्च तक की मदद देने की तैयारी में है।
यह योजना गिग वर्कर्स के जीवन को सुरक्षित और स्थिर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

मोदी सरकार की बड़ी घोषणा सरकार ने क्या-क्या प्लान तैयार किए?
श्रम और रोजगार मंत्रालय के संयुक्त सचिव आशुतोष पेडनेकर ने 29 मई 2026 को बताया कि सरकार नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड फॉर गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स बनाने जा रही है। साथ ही एक अलग सोशल सिक्योरिटी फंड भी तैयार किया जा रहा है।
योजनाओं की मुख्य सुविधाएं:
- एक्सीडेंटल इंश्योरेंस (दुर्घटना बीमा)
- स्वास्थ्य सुविधाएं (Health Facilities)
- मैटरनिटी सपोर्ट (मातृत्व लाभ)
- बुजुर्गों के लिए पेंशन और सुरक्षा
- कैश ट्रांसफर सपोर्ट
- एजुकेशन लोन
- अंतिम संस्कार खर्च के लिए आर्थिक मदद
सरकार प्लेटफॉर्म कंपनियों (जैसे Uber, Ola, Swiggy, Zomato आदि) से 22 जून तक सभी वर्कर्स का डेटा e-Shram पोर्टल पर अपलोड करने को कह चुकी है। इससे योजनाओं का लाभ सीधे और तेजी से पहुंच सकेगा।
गिग वर्कर्स कौन हैं?
गिग वर्कर्स वे लोग हैं जो फुल-टाइम नौकरी के बजाय प्रोजेक्ट या शॉर्ट-टर्म बेसिस पर काम करते हैं। प्लेटफॉर्म वर्कर्स वे हैं जो ऐप-बेस्ड सेवाएं देते हैं – जैसे:
- ओला-उबर ड्राइवर
- स्विगी-जोमैटो डिलीवरी बॉय
- फ्रीलांसर
- कंटेंट क्रिएटर्स
- टेक सपोर्ट वर्कर्स आदि
भारत में फिलहाल करीब 1 करोड़ गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स हैं। अनुमान है कि 2030 तक यह संख्या 2.5 करोड़ तक पहुंच जाएगी।
सरकार क्यों ले रही है यह कदम?
पारंपरिक नौकरियों में सामाजिक सुरक्षा (PF, ESI, ग्रेच्युटी) मिलती है, लेकिन गिग वर्कर्स इससे वंचित रह जाते थे। नए श्रम कानूनों के तहत पहली बार इन्हें औपचारिक रूप से सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया गया है।
मुख्य फायदे:
- दुर्घटना या बीमारी में आर्थिक सहायता
- परिवार की सुरक्षा
- बच्चों की पढ़ाई के लिए लोन
- मां बनने वाली महिलाओं को सपोर्ट
- बुढ़ापे में पेंशन जैसी सुविधा
प्लेटफॉर्म कंपनियों की जिम्मेदारी
सरकार एग्रीगेटर कंपनियों को उनके वर्कर्स का डेटा e-Shram पोर्टल से लिंक करने को बाध्य कर रही है। इससे रियल-टाइम ट्रैकिंग संभव होगी और वर्कर्स मोबाइल ऐप के जरिए अपनी सुविधाओं की जानकारी ले सकेंगे।
गिग वर्कर्स के लिए पहले के प्रयास
- e-Shram Portal – 50 करोड़ से ज्यादा अनऑर्गनाइज्ड वर्कर्स का रजिस्ट्रेशन
- PM Shram Yogi Maandhan Yojana – पेंशन स्कीम
- राज्य स्तर पर विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं
नई स्कीम इन सभी को और मजबूत करेगी।
युवाओं और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
गिग इकोनॉमी भारत की GDP में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। युवा उद्यमिता को बढ़ावा मिल रहा है। लेकिन सुरक्षा की कमी के कारण कई लोग अनिश्चितता महसूस करते हैं। नई स्कीम से न सिर्फ वर्कर्स को आत्मविश्वास मिलेगा बल्कि गिग इकोनॉमी और मजबूत होगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह योजना भारत को विश्व की सबसे बड़ी गिग इकोनॉमी बनाने में मदद करेगी।
मोदी सरकार की यह पहल “सबका साथ, सबका विकास” के विजन को साकार करती है। गिग वर्कर्स अब बिना किसी चिंता के काम कर सकेंगे। 22 जून तक डेटा लिंकिंग के बाद योजनाएं जल्द लागू होने की उम्मीद है।







