CNG Price Hike दिल्ली समेत कई शहरों में CNG की कीमतों में 2 रुपये की बढ़ोतरी कर दी गई है। नए दाम लागू होने के बाद आम लोगों और वाहन चालकों पर महंगाई का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है।

महंगाई ने एक बार फिर आम नागरिकों की कमर तोड़ दी है। मई 2026 के अंत में CNG की कीमतों में चौथी बार बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में CNG के दाम 83 रुपये प्रति किलो के पार पहुंच गए हैं। इंड्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने 26 मई 2026 को 2 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी की, जिसके बाद दिल्ली में CNG की नई कीमत लगभग 83.09 रुपये प्रति किलो हो गई है।
यह बढ़ोतरी केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है। NCR के अन्य शहरों जैसे नोएडा, गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा में कीमतें 91 रुपये के आसपास पहुंच गई हैं। महंगाई के इस झटके से ऑटो-रिक्शा चालक, टैक्सी ड्राइवर, कैब ऑपरेटर और आम लोग सीधे प्रभावित होंगे। यह ब्लॉग पोस्ट इस बढ़ोतरी के कारणों, प्रभावों और व्यापक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर पर विस्तार से चर्चा करेगा।
CNG Price Hike: हालिया बढ़ोतरी का क्रम
मई 2026 में CNG की कीमतों में लगातार उछाल आया है:
- 15 मई: 2 रुपये प्रति किलो बढ़ोतरी (दिल्ली में 77.09 से 79.09 रुपये)
- 17 मई: 1 रुपये की अतिरिक्त बढ़ोतरी (80.09 रुपये)
- मध्य मई: और बढ़ोतरी
- 26 मई: 2 रुपये की नई बढ़ोतरी, दिल्ली में 83.09 रुपये प्रति किलो
IGL ने आधिकारिक बयान में कहा कि बढ़ोतरी ग्लोबल क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतों (100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर), डॉलर के मजबूत होने और आयातित LNG की महंगाई के कारण की गई है। कंपनी का दावा है कि CNG अभी भी पेट्रोल-डीजल से 40-45% सस्ता है, लेकिन आम आदमी के लिए यह राहत महसूस नहीं हो रही।
कारण: वैश्विक और घरेलू कारक
CNG की कीमतें मुख्य रूप से नेचुरल गैस की कीमतों पर निर्भर करती हैं। इस बार बढ़ोतरी के प्रमुख कारण निम्न हैं:
- मध्य पूर्व संकट: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का ब्लॉकेड और क्षेत्रीय तनाव से ग्लोबल सप्लाई चेन प्रभावित हुई।
- रुपए का कमजोर होना: डॉलर के मुकाबले रुपए की गिरावट से आयात महंगा हुआ।
- इनपुट कॉस्ट में वृद्धि: घरेलू और आयातित गैस दोनों की कीमतें बढ़ीं।
- पेट्रोल-डीजल के साथ समन्वय: मई के मध्य में पेट्रोल और डीजल में भी 3 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई, जिससे पूरा ईंधन बाजार प्रभावित हुआ।
यह बढ़ोतरी चुनावों के बाद आई है, जिसके कारण विपक्षी पार्टियां सरकार पर “पोस्ट-पोल एक्सटॉर्शन” का आरोप लगा रही हैं।
आम लोगों पर असर: Transportation Cost बढ़ेगा
CNG मुख्य रूप से पब्लिक ट्रांसपोर्ट और प्राइवेट वाहनों में इस्तेमाल होता है। इस बढ़ोतरी का सीधा असर:
- ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवर: उनके रोजाना का खर्च बढ़ेगा। कई यूनियनों ने किराए में बढ़ोतरी की मांग शुरू कर दी है।
- कैब सर्विसेज (Ola, Uber): सर्ज प्राइस बढ़ सकता है, जिससे यात्रियों का खर्चा बढ़ेगा।
- मिडिल क्लास परिवार: स्कूल-ऑफिस जाने वाले लोग और डिलीवरी वर्कर्स प्रभावित होंगे।
- लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट: सामान की ढुलाई महंगी होने से किराने की चीजों की कीमतें भी बढ़ सकती हैं।
दिल्ली-NCR में लाखों लोग CNG वाहनों पर निर्भर हैं। 83 रुपये प्रति किलो का दाम उनके बजट को और तंग कर देगा।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: विपक्ष हमलावर
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस बढ़ोतरी की तीखी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि सरकार आम आदमी की परेशानी को नजरअंदाज कर रही है। कुछ नेताओं ने इसे “मोदी महंगाई” करार दिया।
दूसरी ओर, सरकार का पक्ष है कि वैश्विक परिस्थितियां अनियंत्रित हैं और सब्सिडी का बोझ बढ़ाने से राजकोषीय घाटा बढ़ सकता है।
अन्य शहरों की स्थिति
- मुंबई: CNG पहले से ही 84-90 रुपये के आसपास।
- नोएडा-गाजियाबाद: 91.70 रुपये तक पहुंचा।
- लखनऊ और अन्य शहर: अलग-अलग बढ़ोतरी दर्ज की गई।
पूरे देश में CNG यूजर्स महंगाई के दबाव में हैं।
व्यापक प्रभाव: अर्थव्यवस्था पर बोझ
CNG की लगातार बढ़ोतरी महंगाई के सूचकांक (CPI) को ऊपर धकेल सकती है। खासकर ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर में लागत बढ़ने से:
- खाद्य पदार्थों की कीमतें प्रभावित होंगी।
- मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ेगा।
- छोटे व्यवसायों की लाभप्रदता घटेगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ग्लोबल क्रूड की कीमतें ऊंची रहीं तो आगे और बढ़ोतरी संभव है। सरकार को रणनीतिक रिजर्व का इस्तेमाल या सब्सिडी पर विचार करना चाहिए।
क्या है समाधान?
- नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा: इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को प्रोत्साहन दें।
- डोमेस्टिक गैस प्रोडक्शन बढ़ाएं: आयात पर निर्भरता कम करें।
- ट्रांसपोर्ट यूनियनों से बातचीत: किराए में उचित बढ़ोतरी सुनिश्चित करें।
- उपभोक्ता जागरूकता: कारपूलिंग और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ज्यादा इस्तेमाल।
निष्कर्ष: महंगाई से लड़ाई जारी
CNG Price Hike : CNG की कीमतों में 2 रुपये की यह बढ़ोतरी महंगाई का एक और बड़ा झटका है। दिल्ली में 83 रुपये प्रति किलो का स्तर पार करना आम आदमी के लिए चिंताजनक है। जबकि CNG अभी भी सस्ता विकल्प है, लगातार बढ़ोतरी से इसका फायदा कम हो रहा है।
सरकार को चाहिए कि वह वैश्विक चुनौतियों के साथ-साथ घरेलू राहत के उपाय भी करे। आम नागरिक उम्मीद करते हैं कि महंगाई पर काबू पाया जाए और उनकी जेब पर बोझ कम हो।
अभी के लिए सावधानी बरतें – ईंधन बचाएं, वैकल्पिक साधनों का इस्तेमाल करें और सरकार से पारदर्शी नीतियों की मांग करें।








