शिवराज सिंह चौहान मध्य प्रदेश के चार बार के मुख्यमंत्री और वर्तमान में केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री, अपनी नई किताब अपनापन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने लंबे और गहरे रिश्ते को बड़े ही भावुक अंदाज में बयान किया है। इस किताब में एक ऐसा खास प्रसंग है जो दिखाता है कि व्यस्ततम समय में भी PM मोदी अपने साथियों की व्यक्तिगत भावनाओं का कितना ख्याल रखते हैं।
13 दिसंबर 2023 को मध्य प्रदेश में मोहन यादव के मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण समारोह के दौरान PM मोदी ने शिवराज सिंह चौहान से कहा था – “शिवराज, समय निकालकर दिल्ली आओ। आपसे कुछ बातें करनी हैं।”

शिवराज सिंह चौहान शपथ ग्रहण समारोह में मिला संकेत
इसके ठीक छह महीने बाद जून 2024 में शिवराज सिंह चौहान को केंद्र में महत्वपूर्ण कृषि मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली। किताब में उन्होंने लिखा है कि शपथ ग्रहण के दिन ही प्रधानमंत्री ने उनके भविष्य की योजना बना ली थी।
चुनाव के बीच आया PM मोदी का फोन
- 2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान जब भाजपा की उम्मीदवार सूची जारी हुई
- तो शुरुआती लिस्ट में शिवराज सिंह चौहान का नाम नहीं था। विपक्ष ने इसे लेकर खूब प्रचार किया।
- शिवराज ने एक जनसभा में कहा था – “अगर हम नहीं रहे तो हमें बहुत याद किया जाएगा।
- विपक्ष ने इस बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया और सोशल मीडिया
- पर “मामाजी का राजनीतिक अंतिम संस्कार” जैसे मजाक उड़ाए गए।
इसी संकट के समय, चुनाव प्रचार के सबसे व्यस्त दौर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फोन आया।
शिवराज सिंह चौहान ने किताब में लिखा: “उन्होंने मुझे मुख्यमंत्री के रूप में संबोधित नहीं किया। बहुत गर्मजोशी और स्नेह के साथ कहा – ‘आज मैं मुख्यमंत्री से बात नहीं कर रहा हूं… मैं अपने शिवराज से बात कर रहा हूं।'”
- PM मोदी ने नरमी से पूछा – “आप इतने चिंतित क्यों हो? अगर कोई आध्यात्मिक गुरु हैं
- तो उनके पास जाएं, एकांत में समय बिताएं और मन को शांत रखें।”
शिवराज का जवाब और PM की सलाह
- शिवराज सिंह ने जवाब दिया – “भाई साहब, मुझे कुछ नहीं चाहिए। मैं सिर्फ काम करना चाहता हूं।”
- PM मोदी ने कहा – “नहीं शिवराज, एक-दो दिन अकेले रहिए, अपना ध्यान रखिए।”
- यह बात शिवराज सिंह चौहान के दिल को छू गई। उन्होंने लिखा कि जो नेता पूरे
- देश की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, वह एक कार्यकर्ता की
- मानसिक स्थिति की भी चिंता कर रहे थे। यही असली अपनापन है।
उत्तराखंड यात्रा और मन की शांति
- प्रधानमंत्री की सलाह मानकर शिवराज सिंह चौहान उत्तराखंड चले गए। ऋषिकेश के पास गंगा
- किनारे एकांत में कई घंटे बिताए। बहते पानी और पहाड़ों को देखते हुए उनका मन शांत हुआ।
- उन्होंने महसूस किया कि PM मोदी का स्नेह सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि रणनीतिक भी था।
- अगर उनके मनोबल पर असर पड़ता तो पूरे पार्टी कार्यकर्ताओं पर असर पड़ सकता था।
‘अपनापन’ किताब की खासियत
- किताब ‘अपनापन’ में शिवराज सिंह चौहान ने 1991-92 की एकता यात्रा से
- लेकर 2025 तक के अपने अनुभव साझा किए हैं। इसमें सिर्फ घटनाएं नहीं, बल्कि भावनाएं और रिश्तों की गहराई है।
- पुस्तक का विमोचन 26 मई 2026 को नई दिल्ली में होना है।
- इसमें पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा मौजूद रहेंगे।
मोदी-शिवराज रिश्ता: विश्वास और समर्पण का प्रतीक
- यह प्रसंग दर्शाता है कि भारतीय राजनीति में भी मानवीय संवेदनशीलता कितनी जरूरी है।
- व्यस्ततम समय में भी PM मोदी अपने सहयोगियों को “अपना” समझकर उनका ख्याल रखते हैं।
- शिवराज सिंह चौहान जैसे अनुभवी नेता का यह संस्मरण न सिर्फ भावुक करता है बल्कि नेतृत्व की नई मिसाल भी पेश करता है।
- अपनापन सिर्फ किताब का नाम नहीं, बल्कि मोदी और शिवराज के रिश्ते का सार है।
शिवराज सिंह चौहान की किताब ‘अपनापन’ राजनीतिक संस्मरणों से इतर एक भावनात्मक यात्रा है। इसमें PM मोदी की संवेदनशीलता, दूरदर्शिता और अपनत्व साफ झलकता है। जो लोग राजनीति को सिर्फ सत्ता का खेल समझते हैं, उनके लिए यह किताब एक नया नजरिया देगी।






