दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला दिल्ली हाईकोर्ट ने एक संवेदनशील अवमानना मामले में अहम कदम उठाते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राजदीपा बेहुरा को एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) नियुक्त किया है। यह मामला जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणियों और सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़ा है, जिसमें आम आदमी पार्टी (AAP) प्रमुख अरविंद केजरीवाल और अन्य AAP नेता पक्षकार हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट की डबल बेंच (जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंद्र दुग्गल) ने 22 मई 2026 को सुनवाई के दौरान राजदीपा बेहुरा को न्याय मित्र नियुक्त किया। अदालत ने कहा कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एक निष्पक्ष और अनुभवी वकील की मदद जरूरी है। राजदीपा बेहुरा अब केजरीवाल की तरफ से दलीलें पेश करेंगी, ताकि सुनवाई सुचारू रूप से चल सके।

दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला मामला क्या है?
अगली सुनवाई: 4 अगस्त 2026 को होगी।
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क्या है पूरा विवाद?
- यह अवमानना का तीसरा बड़ा मामला है। आरोप है कि अरविंद केजरीवाल, सौरभ भारद्वाज
- गोपाल राय और कुछ अन्य लोगों ने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ सोशल मीडिया
- पर आपत्तिजनक टिप्पणियां और पोस्ट किए, जो न्यायिक गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं।
14 मई 2026 को जस्टिस शर्मा ने स्वतः संज्ञान लेते हुए केजरीवाल और अन्य AAP नेताओं के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की थी। इसके अलावा अधिवक्ता अशोक चैतन्य की याचिका पर भी अलग से सुनवाई हो रही है।
हाईकोर्ट का फैसला क्यों महत्वपूर्ण?
दिल्ली हाईकोर्ट ने दोनों मामलों को एक साथ सुनने का फैसला किया है। अदालत ने साफ कहा कि:
- राजदीपा बेहुरा अदालत को कानूनी पहलुओं पर निष्पक्ष सलाह देंगी।
- मामले में संवेदनशीलता ज्यादा है, इसलिए न्याय मित्र की नियुक्ति जरूरी थी।
- केजरीवाल और सौरभ भारद्वाज को पहले ही नोटिस जारी हो चुके हैं।
- गोपाल राय और पत्रकार सौरव दास को बिना प्रोसेस फीस के नोटिस जारी किए गए।
राजदीपा बेहुरा कौन हैं?
राजदीपा बेहुरा दिल्ली हाईकोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता हैं। वे जटिल संवैधानिक और आपराधिक मामलों में अपनी निष्पक्षता और गहरी कानूनी समझ के लिए जानी जाती हैं। उनकी नियुक्ति से यह साफ है कि अदालत इस मामले को पूरी गंभीरता से ले रही है।
राजनीतिक महत्व
- यह मामला AAP और दिल्ली की सत्ताधारी पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
- जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा पहले भी विवादों में रही हैं, लेकिन इस बार अवमानना
- के आरोप सीधे केजरीवाल और उनके सहयोगियों पर लगे हैं।
- विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत न्यायपालिका की गरिमा की रक्षा के लिए सख्त रुख अपना रही है।
- ऐसे मामलों में अमिकस क्यूरी की नियुक्ति अदालत की निष्पक्षता को और मजबूत करती है।
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क्या हो सकता है आगे?
4 अगस्त को होने वाली सुनवाई में राजदीपा बेहुरा की दलीलें महत्वपूर्ण होंगी। अगर अदालत ने अवमानना साबित मानी तो केजरीवाल और अन्य नेताओं पर सजा हो सकती है।
यह मामला न्यायपालिका बनाम राजनीतिक दलों के टकराव का नया उदाहरण बनता जा रहा है। दिल्ली की सियासी गलियारों में इस फैसले की चर्चा तेज है।
दिल्ली हाईकोर्ट का यह फैसला दिखाता है कि न्यायपालिका किसी भी दबाव में आए बिना अपनी गरिमा की रक्षा करने के लिए कटिबद्ध है। राजदीपा बेहुरा की नियुक्ति से मामले की सुनवाई और निष्पक्ष हो गई है। अब 4 अगस्त का इंतजार है, जब इस पूरे विवाद पर बड़ा फैसला आ सकता है।











