दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला दिल्ली हाईकोर्ट ने 2020 दिल्ली दंगों से जुड़े UAPA मामले में जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने 22 मई 2026 को उमर खालिद को 3 दिन की अंतरिम जमानत मंजूर कर दी है। यह जमानत उनकी मां की सर्जरी को देखते हुए दी गई है।
दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मधु जैन की बेंच ने उमर खालिद की अपील पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। उमर खालिद सितंबर 2020 से जेल में बंद हैं। फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की ‘बड़ी साजिश’ मामले में उन पर UAPA के तहत आरोप लगे हैं।

दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला पूरा मामला क्या है?
जमानत की अवधि: 1 जून 2026 सुबह 7 बजे से 3 जून 2026 शाम 5 बजे तक।
ये भी पढ़ें: उमर खालिद जमानत, दिल्ली हाईकोर्ट फैसला, 2020 दिल्ली दंगे UAPA केस, Umar Khalid Interim Bail
कोर्ट ने लगाई ये शर्तें
हाईकोर्ट ने जमानत देते हुए सख्त शर्तें भी लगाई हैं:
- उमर खालिद को 1 लाख रुपये की जमानत और इतनी ही राशि की सरकारी जमानत देनी होगी।
- वह पूरे समय NCR (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) के अंदर ही रहेंगे।
- किसी भी प्रकार की सार्वजनिक गतिविधि या मीडिया से बातचीत नहीं कर सकेंगे।
- पुलिस को अपनी लोकेशन की जानकारी देते रहना होगा।
कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले उनकी रेगुलर जमानत याचिका खारिज कर दी थी, लेकिन इस मामले में ‘हमदर्दी भरा नजरिया’ अपनाते हुए अंतरिम राहत दी गई है।
उमर खालिद कौन हैं?
#उमर खालिद जेएनयू के पूर्व छात्र नेता हैं। 2020 दिल्ली दंगों के मामले में उन्हें दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने गिरफ्तार किया था। इस मामले में शरजील इमाम, खालिद सैफी, ताहिर हुसैन समेत कई अन्य लोगों पर भी आरोप लगे हैं।
उमर खालिद पर आरोप है कि उन्होंने CAA-NRC विरोधी आंदोलन के दौरान भाषण दिए, जो दंगों की साजिश का हिस्सा थे। हालांकि, उमर खालिद इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं और इसे राजनीतिक साजिश बताते हैं।
पिछली जमानत याचिकाओं का इतिहास
- सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2026 में उमर खालिद की रेगुलर जमानत खारिज कर दी थी।
- दिल्ली हाईकोर्ट और निचली अदालत ने भी कई बार जमानत याचिकाएं खारिज की हैं।
- इससे पहले भी उमर खालिद को परिवार की शादी आदि मौकों पर अंतरिम जमानत मिल चुकी है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया!
- इस फैसले पर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इसे न्यायिक संवेदनशीलता
- का उदाहरण बताया है, जबकि कुछ लोग इसे UAPA जैसे सख्त कानूनों की समीक्षा की जरूरत बताते हैं।
- पढ़ें: Umar Khalid Bail 2026, दिल्ली दंगे UAPA, शरजील इमाम केस, Delhi High Court Order
कानूनी विशेषज्ञों का क्या कहना है?
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि मां की सर्जरी जैसे मानवीय आधार पर अंतरिम जमानत देना कोर्ट की सहानुभूति दर्शाता है। लेकिन UAPA मामले में रेगुलर जमानत मिलना अभी भी मुश्किल है क्योंकि इस कानून में जमानत की शर्तें बहुत सख्त हैं।
यह मामला दिखाता है कि लंबे समय से जेल में बंद आरोपीयों को अंतरिम राहत मिलने की गुंजाइश अभी भी है, लेकिन ट्रायल में देरी एक बड़ी समस्या बनी हुई है।
दिल्ली हाईकोर्ट का यह फैसला उमर खालिद और उनके परिवार के लिए राहत की खबर है। अब देखना होगा कि 1 जून को उमर खालिद जेल से बाहर आते हैं या नहीं। इस मामले की पूरी सुनवाई अभी बाकी है और भविष्य में बड़े फैसले आने की संभावना है।












