फलता री-पोलिंग रिजल्ट पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर तूफान आ गया है। फलता विधानसभा सीट, जिसे तृणमूल कांग्रेस (TMC) का मजबूत गढ़ माना जाता था, अब ममता बनर्जी के लिए एक और बड़ा झटका बन गया है। अभिषेक बनर्जी के डायमंड हार्बर संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली इस सीट पर री-पोलिंग हुई, लेकिन TMC के झंडे तक गायब हो गए।
फलता को लंबे समय से TMC का सुरक्षित गढ़ कहा जाता था। यहां जहांगीर खान का दबदबा था, जिन्हें अभिषेक बनर्जी का करीबी माना जाता था। 2024 के लोकसभा चुनाव में इस क्षेत्र से उन्हें 89% से ज्यादा वोट मिले थे। लेकिन 2026 विधानसभा चुनाव में सब कुछ बदल गया।

फलता री-पोलिंग रिजल्ट TMC का मजबूत किला कैसे ढहा?
29 अप्रैल को हुए मतदान में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की शिकायतें आईं। EVM पर इत्र और चिपकने वाली टेप लगाने जैसे गंभीर आरोपों के बाद चुनाव आयोग ने पूरे क्षेत्र में री-पोलिंग का आदेश दे दिया। 21 मई 2026 को हुई इस री-पोलिंग में रिकॉर्ड 86% से ज्यादा मतदान दर्ज किया गया।
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जहांगीर खान का चौंकाने वाला फैसला
- री-पोलिंग से महज दो दिन पहले TMC उम्मीदवार जहांगीर खान ने चुनाव से नाम वापस ले लिया।
- पार्टी ने इसे उनका निजी फैसला बताया और खुद को इससे अलग कर लिया।
- खान के नाम EVM पर बने रहने के बावजूद TMC ने कोई नया उम्मीदवार नहीं उतारा।
स्थानीय लोगों के अनुसार, री-पोलिंग के दिन पूरे क्षेत्र में TMC के एक भी झंडे या पोस्टर नजर नहीं आए। जहां पहले TMC कार्यकर्ताओं की भरमार रहती थी, वहां अब दूसरे दलों के झंडे लहरा रहे थे। जहांगीर खान खुद मतदान के दिन गायब रहे।
भवानीपुर के बाद दूसरा बड़ा झटका
- यह हार ममता बनर्जी के लिए व्यक्तिगत रूप से भी करारी है।
- कुछ दिन पहले ही उन्होंने भवानीपुर सीट पर शुभेंदु अधिकारी से हार का सामना किया था।
- अब फलता में भी TMC का बिल्कुल सफाया हो गया है।
- राजनीतिक विश्लेषक इसे TMC के संगठनात्मक ढांचे के कमजोर होने का संकेत मान रहे हैं।
री-पोलिंग में क्या हुआ?
- मतदान प्रतिशत: 86% से ज्यादा (शांतिपूर्ण वातावरण में)
- सुरक्षा: केंद्रीय बलों की भारी तैनाती
- मुख्य मुकाबला: BJP के देबांग्शु पांडा बनाम CPI(M) के शंभूनाथ कुर्मी
- कांग्रेस उम्मीदवार: अब्दुर रज्जाक मोल्ला
स्थानीय लोगों ने बताया कि पहली बार उन्हें बिना किसी डर के वोट डालने का मौका मिला। TMC के शासनकाल में यहां जबरदस्ती, धमकी और हिंसा की शिकायतें आम थीं।
TMC पर सवालों के घेरे
ममता बनर्जी की पार्टी अब सवालों के घेरे में है। 15 साल तक सत्ता में रहने के बाद अचानक इतनी तेजी से संगठन का बिखरना कई सवाल खड़े कर रहा है।
- क्या TMC के स्थानीय नेता अब पार्टी छोड़ने लगे हैं?
- अभिषेक बनर्जी का डायमंड हार्बर मॉडल कितना प्रभावी रहा?
- क्या BJP की लहर TMC के सभी गढ़ों को तोड़ देगी?
राजनीतिक विश्लेषण
- फलता री-पोलिंग का नतीजा 24 मई को आएगा, लेकिन इससे पहले ही साफ हो गया है
- कि TMC यहां मजबूती से लड़ नहीं पाई। यह सीट BJP और वामपंथी दलों के बीच सीधा मुकाबला बन गई है।
- राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि अगर BJP फलता पर कब्जा कर लेती है
- तो यह ममता बनर्जी और TMC के लिए एक और बड़ा नैतिक झटका होगा।
- यह दर्शाता है कि बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद पुरानी ताकतें तेजी से कमजोर हो रही हैं।
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फलता का मामला दिखाता है कि बंगाल की राजनीति में कितनी तेजी से समीकरण बदल रहे हैं। ममता बनर्जी के लिए यह एक और बॉम्ब साबित हो रहा है। अब देखना होगा कि TMC इस हार से कैसे उबरती है और भविष्य की रणनीति क्या बनाती है।






