यूपी कांग्रेस में बवाल उत्तर प्रदेश कांग्रेस में एक बार फिर अंदरूनी कलह और गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के 20 मई 2026 को लखनऊ और रायबरेली दौरे के दौरान पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू को एयरपोर्ट पास तक नहीं दिया गया। इस घटना ने यूपी कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान को पूरे देश के सामने ला दिया।
लखनऊ अमौसी एयरपोर्ट पर राहुल गांधी के स्वागत के लिए कांग्रेस के आला नेता मौजूद थे, लेकिन अजय कुमार लल्लू को सुरक्षा पास की सूची से बाहर रखा गया। अंदर जाने की अनुमति न मिलने के बावजूद लल्लू एयरपोर्ट के बाहर डटे रहे। जैसे ही राहुल गांधी अपनी कार में बैठे, लल्लू उनके वाहन के पास पहुंच गए। राहुल गांधी ने कार का शीशा नीचे किया और दोनों के बीच काफी देर तक बातचीत हुई। यह तस्वीर यूपी कांग्रेस की मौजूदा स्थिति को साफ दर्शाती है।

अजय कुमार लल्लू कौन हैं? पुराना चेहरा, नई चुनौतियां!
अजय कुमार लल्लू यूपी कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे हैं। उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष और विधानसभा में नेता सदन के रूप में पार्टी की कमान संभाली। सड़कों पर उतरकर कई बड़े आंदोलनों का नेतृत्व किया। पूर्वी उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले लल्लू पिछड़ी जाति (कानू) से आते हैं, जिससे कांग्रेस को वोट बैंक में फायदा मिला था।
- हालांकि पिछले कुछ समय से वे यूपी के संगठनात्मक ढांचे में हाशिए पर दिख रहे हैं।
- वर्तमान प्रदेश नेतृत्व के साथ उनके वैचारिक मतभेद सार्वजनिक हो चुके हैं।
- इसके बावजूद केंद्रीय नेतृत्व (AICC) में उनकी साख बरकरार है।
- फरवरी 2025 में उन्हें ओडिशा कांग्रेस का AICC प्रभारी बनाकर प्रमोट किया गया।
- यूपी में दूरी के बावजूद दिल्ली में उनका कद बढ़ा है।
गुटबाजी चरम पर: पुराना vs नया नेतृत्व
- यह घटना कोई सामान्य प्रशासनिक चूक नहीं लगती। राहुल गांधी जैसे शीर्ष नेता के दौरे
- पर पूर्व प्रदेश अध्यक्ष को पास न देना यूपी कांग्रेस में गहरी दरार को उजागर करता है।
- सूत्रों के मुताबिक कुछ गुट पुराने वफादारों को मुख्यधारा से दूर रखने की कोशिश कर रहे हैं।
- पुराने और नए नेतृत्व के बीच तालमेल की कमी साफ नजर आ रही है।
राहुल गांधी लगातार यूपी में संगठन को मजबूत करने और एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन जमीन पर यह घटना उनके मिशन यूपी के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। कांग्रेस को 2027 के विधानसभा चुनावों में मजबूत वापसी के लिए पूरी ताकत झोंकनी होगी, लेकिन अंदरूनी कलह इस लक्ष्य को कमजोर कर रही है।
यूपी कांग्रेस में बवाल यूपी कांग्रेस की मौजूदा स्थिति!
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पिछले कई चुनावों में संघर्ष कर रही है। 2022 के विधानसभा चुनावों में पार्टी को करारी हार मिली थी, जिसके बाद संगठनात्मक बदलाव हुए। प्रियंका गांधी वाड्रा की सक्रियता के बावजूद कांग्रेस को बड़े ब्रेकथ्रू नहीं मिल पाए। अब राहुल गांधी खुद मोर्चा संभाल रहे हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर गुटबाजी बनी हुई है।
अजय कुमार लल्लू की इस घटना से कई सवाल उठ रहे हैं:
- क्या यूपी कांग्रेस में पुराने नेताओं को साइडलाइन किया जा रहा है?
- क्या नया नेतृत्व पुराने अनुभव का सम्मान नहीं कर रहा?
- क्या यह घटना आलाकमान के लिए चेतावनी है?
राहुल गांधी का दौरा: रायबरेली और आगे की रणनीति
- राहुल गांधी का यह दौरा सिर्फ स्वागत तक सीमित नहीं था। वे रायबरेली भी गए
- जहां उनकी मां सोनिया गांधी सांसद रह चुकी हैं। कांग्रेस इस क्षेत्र को मजबूत
- आधार बनाने की कोशिश कर रही है। लेकिन लखनऊ एयरपोर्ट वाली
- घटना ने पूरे दौरे की चर्चा को अंदरूनी कलह पर केंद्रित कर दिया।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं में मिश्रित प्रतिक्रियाएं हैं। कुछ लल्लू का समर्थन कर रहे हैं तो कुछ वर्तमान नेतृत्व के साथ हैं। पार्टी को इस दरार को जल्द पाटना होगा, वरना 2027 में फिर निराशा हाथ लग सकती है।
क्या कहता है राजनीतिक विश्लेषण?
विश्लेषकों का मानना है कि यूपी कांग्रेस में यह बवाल नया नहीं है। हर बड़े नेता के आने पर गुटबाजी सामने आ जाती है। राहुल गांधी संगठन को एकजुट करने की बात करते हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर अमल की कमी दिख रही है। अजय लल्लू जैसे अनुभवी नेता को सम्मान देने से पार्टी की छवि मजबूत हो सकती है।
यूपी कांग्रेस के लिए यह वक्त आत्मचिंतन का है। राहुल गांधी की कोशिशों को जमीन पर उतारने के लिए गुटबाजी छोड़कर सभी नेताओं को एक मंच पर आना होगा। अजय कुमार लल्लू वाली घटना सिर्फ एक संकेत है। अगर कांग्रेस यूपी में मजबूत होना चाहती है तो आंतरिक लोकतंत्र और सम्मान की संस्कृति विकसित करनी होगी।
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