कौन हैं IPS दमयंती सेन पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बदलाव के बाद कई पुरानी कहानियां फिर से चर्चा में आ रही हैं। इनमें सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोर रही हैं IPS दमयंती सेन। ‘सुपरकॉप’ के नाम से मशहूर इस महिला अधिकारी को 2012 के पार्क स्ट्रीट गैंगरेप मामले की सच्चाई सामने लाने की वजह से ममता बनर्जी सरकार में साइडलाइन कर दिया गया था। अब मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने उन्हें महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों की जांच के लिए हाई-लेवल कमिटी का मेम्बर सेक्रेटरी नियुक्त कर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है।

दमयंती सेन को मिली नई जिम्मेदारी
शुभेंदु अधिकारी सरकार ने राज्य में महिलाओं की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक विशेष समिति गठित की है। इस समिति की अध्यक्षता रिटायर्ड जस्टिस समाप्ति चटर्जी करेंगी, जबकि दमयंती सेन को इसका सदस्य सचिव बनाया गया है।
- समिति 1 जून 2026 से पूरे बंगाल के थानों में जाकर जनसुनवाई की तर्ज पर
- महिलाओं की शिकायतें दर्ज करेगी। इससे पहले दमयंती सेन की निगरानी में टीम
- राज्य भर में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ पुराने सभी मामलों का डेटा इकट्ठा करेगी।
- यह फैसला शुभेंदु सरकार की महिलाओं की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
कौन हैं IPS दमयंती सेन?
- बैच: 1996 बैच की IPS अधिकारी
- पहली उपलब्धि: कोलकाता पुलिस में जॉइंट कमिश्नर (क्राइम) बनने वाली पहली महिला अधिकारी
- खास पहचान: 2012 पार्क स्ट्रीट गैंगरेप केस की सफल जांच
दमयंती सेन ने अपने करियर में कई महत्वपूर्ण मामलों की जांच की है। उनकी ईमानदारी और सख्ती के लिए उन्हें ‘सुपरकॉप’ कहा जाता है।
2012 पार्क स्ट्रीट गैंगरेप केस – सच्चाई की सजा
- 6 फरवरी 2012 को कोलकाता के पार्क स्ट्रीट इलाके में नाइट क्लब से लौट रही
- एक महिला के साथ चलती गाड़ी में सामूहिक बलात्कार हुआ था। उस समय तृणमूल
- कांग्रेस सरकार सत्ता में आई थी। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस घटना को “मनगढ़ंत”
- और “सरकार की छवि खराब करने वाली साजिश” बता दिया था।
लेकिन दमयंती सेन (तब जॉइंट कमिश्नर क्राइम) ने राजनीतिक दबाव की परवाह नहीं की। अपनी टीम के साथ तेजी से जांच की और कुछ ही दिनों में आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। सबूतों के आधार पर साबित किया कि गैंगरेप की घटना सच थी।
- परिणाम: मामले को सही साबित करने के तुरंत बाद उन्हें लालबाजार (कोलकाता पुलिस मुख्यालय)
- से हटाकर बैरकपुर कमिश्नरेट में कम महत्वपूर्ण पद पर ट्रांसफर कर दिया गया।
- इसके बाद 14 साल तक उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी गई।
- उन्हें पूरी तरह साइडलाइन कर दिया गया था।
शुभेंदु अधिकारी सरकार में वापसी
- करीब 14 साल बाद दमयंती सेन की पुलिस सेवा में वापसी हुई है।
- शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें महिलाओं के खिलाफ अपराधों की जांच की महत्वपूर्ण भूमिका दी है।
- साथ ही TMC सरकार के दौरान हुए संस्थागत भ्रष्टाचार की जांच के लिए भी अलग समिति बनाई गई है।
महिलाओं की सुरक्षा में नया दौर?
शुभेंदु सरकार का यह कदम उन लोगों के लिए उम्मीद की किरण है जो पिछले वर्षों में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों और न्याय की कमी से परेशान थे। विशेषज्ञों का कहना है कि दमयंती सेन जैसे सख्त और ईमानदार अधिकारी की भूमिका से बंगाल में महिलाओं की सुरक्षा की स्थिति में सुधार हो सकता है।
IPS दमयंती सेन की कहानी साबित करती है कि सच्चाई की कीमत चुकानी पड़ती है, लेकिन इतिहास अंत में सही का साथ देता है। ममता बनर्जी शासन में साइडलाइन की गई इस सुपरकॉप को अब नई सरकार ने न्याय और सुरक्षा की मुहिम में आगे रखा है।
Read More : वंदे मातरम् विवाद पर भड़कीं अग्निमित्रा पॉल जमीयत के आरोपों पर दिया बड़ा बयान!







