उधयनिधि स्टालिन सनातन धर्म तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर सनातन धर्म विवाद गरमा गया है। डीएमके नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उधयनिधि स्टालिन ने सदन में दिए अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा कि उनका लक्ष्य किसी की आस्था या मंदिरों को नहीं, बल्कि लोगों को ऊंच-नीच में बांटने वाली जाति व्यवस्था को खत्म करना है। इस स्पष्टीकरण के बावजूद विपक्षी दल बीजेपी और हिंदू संगठन लगातार हमला बोल रहे हैं।
क्या कहा था उधयनिधि ने विधानसभा में?
मंगलवार को तमिलनाडु विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में अपना पहला प्रमुख भाषण देते हुए उधयनिधि स्टालिन ने कहा था कि “सनातन धर्म जो लोगों को बांटता है, उसे निश्चित रूप से खत्म करना होगा।” यह बयान 2023 के उनके पुराने विवादास्पद बयान की याद दिलाता है, जिसमें उन्होंने सनातन धर्म की तुलना डेंगू, मलेरिया और कोरोना से की थी।

उस पुराने बयान पर सुप्रीम कोर्ट तक में सुनवाई हुई थी और अब दोबारा विधानसभा में इसे दोहराने से राजनीतिक तापमान बढ़ गया है।
उधयनिधि स्टालिन सनातन धर्म सोशल मीडिया पर दिया स्पष्टीकरण
गुरुवार को एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए उधयनिधि स्टालिन ने लिखा: “जब मैंने विधानसभा में कहा कि लोगों को बांटने वाली जाति व्यवस्था खत्म होनी चाहिए, तो कुछ लोग आलोचना कर रहे हैं। मैं डरने वाला व्यक्ति नहीं हूं। द्रविड़ आंदोलन का जन्म ही विरोध से हुआ है।”
- उन्होंने आगे स्पष्ट किया: “सनातन को खत्म करने का मतलब यह नहीं कि कोई मंदिर न जाए।
- इसका मतलब है कि समाज और मंदिरों दोनों जगह हर व्यक्ति को समान अधिकार मिलने चाहिए।”
- उधयनिधि ने अपने विचारों को पेरियार, डॉ. बी.आर. अंबेडकर, अन्नादुरई और करुणानिधि
- के सिद्धांतों से जोड़ा। उन्होंने कहा कि द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) किसी की धार्मिक आस्था
- का विरोध नहीं करती, लेकिन समाज में मौजूद असमानता और शोषण के खिलाफ लड़ती रहेगी।
विवाद की जड़ और राजनीतिक प्रतिक्रिया!
- 2023 में उधयनिधि के बयान पर पूरे देश में आक्रोश फैला था। बीजेपी, विश्व हिंदू परिषद
- (VHP) और अन्य हिंदू संगठनों ने इसे हिंदू आस्था पर हमला बताया था।
- अब नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद फिर से यह बयान दोहराए जाने से विवाद और गहरा गया है।
- बीजेपी नेता के. अन्नामलाई ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अगर उधयनिधि सनातन खत्म करना चाहते हैं
- तो पहले अपनी मां को मंदिर जाने से रोककर दिखाएं। VHP ने भी तमिलनाडु के नए
- मुख्यमंत्री विजय से उधयनिधि के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
सनातन धर्म क्या है? सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य
- सनातन धर्म को हिंदू धर्म का शाश्वत रूप माना जाता है। यह वेदों, उपनिषदों
- पुराणों और सदियों पुरानी परंपराओं पर आधारित है। करोड़ों भारतीयों की आस्था
- का केंद्र है। सनातन शब्द का अर्थ है “शाश्वत” या “अनादि”।
- दूसरी ओर, द्रविड़ आंदोलन जाति प्रथा, ब्राह्मणवाद और सामाजिक असमानता
- के खिलाफ अपनी लड़ाई के लिए जाना जाता है। उधयनिधि का तर्क है
- कि वे सनातन को जाति व्यवस्था के रूप में देखते हैं, न कि पूजा-अर्चना के रूप में।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ और समाज?
- समर्थक पक्ष: कई सामाजिक कार्यकर्ता और द्रविड़ विचारक कहते हैं कि जातिगत भेदभाव अभी भी समाज में गहराई से जड़ा है। आरक्षण, शिक्षा और सामाजिक न्याय की लड़ाई जारी रखनी जरूरी है।
- विरोधी पक्ष: हिंदू संगठन मानते हैं कि सनातन धर्म को निशाना बनाना पूरे हिंदू समाज और उसकी सांस्कृतिक विरासत पर हमला है। वे कहते हैं कि जाति व्यवस्था को खत्म करने के नाम पर धर्म को बदनाम करना गलत है।
तमिलनाडु में पिछले कई दशकों से द्रविड़ पार्टियां सत्ता में रही हैं, लेकिन जातिगत समीकरण अभी भी चुनावी राजनीति का बड़ा हिस्सा बने हुए हैं।
आगे क्या?
- उधयनिधि स्टालिन का यह स्पष्टीकरण विवाद को शांत करने की कोशिश लगता है
- लेकिन राजनीतिक गलियारों में बहस जारी है। DMK और सत्ताधारी दलों को अब इस मुद्दे पर सतर्क रहना होगा
- क्योंकि 2026 के बाद की राजनीति में सनातन बनाम द्रविड़ आंदोलन फिर से बड़ा मुद्दा बन सकता है।
सनातन धर्म पर उधयनिधि स्टालिन का बयान और उनका स्पष्टीकरण दोनों ही तमिलनाडु की राजनीति की गहराई दिखाते हैं। एक तरफ सामाजिक न्याय की लड़ाई, दूसरी तरफ सांस्कृतिक पहचान और आस्था की रक्षा। जनता देख रही है कि यह बहस सामाजिक सुधार की दिशा लेगी या सिर्फ वोट बैंक की राजनीति बनी रहेगी।






