रामफोसा का तीखा बयान: ‘अगर पहले से पता होता, तो G-20 की मेजबानी इतना कठिन काम है’, पीएम मोदी से हुई खास चर्चा

On: November 24, 2025 5:18 AM
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भारत दक्षिण अफ्रीका संबंध

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भारत दक्षिण अफ्रीका संबंध : दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति रामफोसा ने G-20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी की कठिनाई पर पीएम मोदी से चर्चा में बयान दिया—‘अगर पहले पता होता, तो मुश्किल मेजबानी का फैसला न करते’। जानें पीएम मोदी और रामफोसा के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता, G-20 समिट अपडेट्स और भारत-दक्षिण अफ्रीका संबंधों की ताजा खबरें

भारत दक्षिण अफ्रीका संबंध
भारत दक्षिण अफ्रीका संबंध

G-20 की मेजबानी पर रामफोसा का अहम बयान, पीएम मोदी से बातचीत में कठिनाइयों को किया साझा

G-20 समिट वैश्विक स्तर पर सबसे महत्वपूर्ण सम्मेलनों में से एक है, जहाँ दुनिया के अग्रणी देश साझी चुनौतियों, आर्थिक विकास, और वैश्विक सहयोग के मुद्दों पर चर्चा करते हैं। 2025 में साउथ अफ्रीका पहली बार इस सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है, जिससे उसकी जिम्मेदारी और चुनौतियाँ दोनों बढ़ गई हैं। इसी कड़ी में राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा का बयान सुर्खियों में आ गया, जिसमें उन्होंने कहा — अगर पहले पता होता, तो G-20 की मेजबानी लेना इतना कठिन काम है।

पीएम मोदी और रामफोसा की अहम मुलाकात

जोहान्सबर्ग में आयोजित G-20 समिट के दौरान, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा की द्विपक्षीय बैठक हुई। इस बैठक में दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, शिक्षा, तकनीकी सहयोग, खाद्य सुरक्षा और ग्लोबल साउथ की आवाज को बुलंद करने जैसे मुद्दों पर गंभीर चर्चा की। रामफोसा ने G-20 जैसे विशाल आयोजन की जटिलताओं और दबावों पर प्रकाश डाला, साथ ही भारत से मिले सहयोग के लिए आभार भी जताया.

G-20 की मेजबानी: गौरव के साथ कठिनाइयाँ

राष्ट्रपति रामफोसा के बयान ने दुनिया का ध्यान आकर्षित किया — “अगर पहले से पता होता, तो G-20 की मेजबानी इतना कठिन काम है, शायद दो बार सोचता।” उन्होंने कहा कि आयोजन में लगी चुनौतियाँ—प्रोटोकॉल, वैश्विक समस्याएँ, लॉजिस्टिक्स, सुरक्षा और विभिन्न देशों की अपेक्षाएँ—काफी ज्यादा हैं। फिर भी दक्षिण अफ्रीका ने इस ऐतिहासिक ज़िम्मेदारी को गर्व के साथ निभाया.

भारत और दक्षिण अफ्रीका: रणनीतिक साझेदारी

समिट की साइडलाइन पर हुई इस द्विपक्षीय मुलाकात में दोनों देशों ने अपने ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंधों की समीक्षा की। व्यापार, माइनिंग, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, कौशल विकास, स्टार्टअप्स, और खनिजों में निवेश के अवसरों पर चर्चा की गई। प्रधानमंत्री मोदी ने दक्षिण अफ्रीका द्वारा आयोजित सफल G-20 के लिए सराहना भी की.

वैश्विक एजेंडा में भारत-अफ्रीका सहयोग

भारत और दक्षिण अफ्रीका लगातार ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत कर रहे हैं।

भारत की ओर से ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ और ‘एक धरती, एक परिवार, एक भविष्य’ के विजन को पेश किया गया।

इस बातचीत में अफ्रीका-सेंट्रिक विकास, ब्रिक्स के आगामी अध्यक्षता सहित भविष्य की साझेदारी पर भी गहन विमर्श किया गया.

सोशल मीडिया और समाचारों में चर्चा

रामफोसा के बयान ने सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय प्रेस में हलचल मचा दी।

कई विशेषज्ञों और राजनयिकों ने इसे दक्षिण अफ्रीका की ईमानदारी,

वैश्विक सहयोग की चुनौती और भारत-अफ्रीका के संबंधों का प्रतीक बताया.

निष्कर्ष

G-20 समिट की मेजबानी करना

किसी देश के लिए गौरव का विषय तो है ही,

लेकिन इससे जुड़े कठिन प्रशासनिक,

कूटनीतिक और सुरक्षा पहलुओं को समझना जरूरी है।

रामफोसा के बयान के जरिए दुनिया ने इन जटिल पक्षों को महसूस किया।

भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच गहरा होता समाधान-साझा संवाद

विश्व राजनीति में नए द्वार खोल सकता है।

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