पीएम आरजेडी कांग्रेस हमला : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छठ पर्व के अवसर पर RJD और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि सूर्यदेव को अर्घ्य देना ड्रामा नहीं, बल्कि आस्था और संस्कृति की पहचान है। पढ़ें पूरा बयान और राजनीतिक हलचल।
पीएम मोदी का भावनात्मक बयान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने हालिया भाषण में विपक्षी दलों RJD और कांग्रेस पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि कुछ राजनीतिक दल देश की आस्थाओं और परंपराओं का अपमान करने की आदत बना चुके हैं। छठ पूजा पर सूर्यदेव को अर्घ्य देना भारतीय संस्कृति का अहम हिस्सा है, जिसे ‘ड्रामा’ कहना जनता की भावनाओं को ठेस पहुंचाना है।

पीएम ने कहा कि भारत की सभ्यता, संस्कृति और परंपरा हमारे समाज की आत्मा हैं। जो लोग इन पर सवाल उठाते हैं, वे सीधे-सीधे जनता की आस्था के खिलाफ खड़े हैं। उस दौरान प्रधानमंत्री ने छठी मैया और सूर्यदेव के प्रति अपना श्रद्धाभाव भी प्रकट किया और देशवासियों को छठ पर्व की शुभकामनाएं दीं।
बिहार राजनीति में बढ़ी गर्मी
- प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में गर्मी आ गई। RJD और कांग्रेस नेताओं
- ने पलटवार शुरू कर दिया। कुछ नेताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री धार्मिक आयोजनों को राजनीतिक मंच के
- रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि भाजपा नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री ने केवल आस्थाओं का सम्मान किया है, राजनीति नहीं की।
- बिहार जैसे राज्यों में जहां छठ पर्व एक जनभावनाओं से जुड़ा आयोजन है,
- वहां ऐसे बयान चुनावी समीकरणों पर सीधा असर डालते हैं।
- यह बयान ऐसे समय आया है जब बिहार के कई जिलों में भाजपा और RJD आमने-सामने के मुकाबले में हैं।
छठ पर्व: आस्था और विज्ञान का संगम
- प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में छठ पर्व के वैज्ञानिक और सांस्कृतिक महत्व पर भी प्रकाश डाला।
- उन्होंने कहा कि यह पर्व सूर्य की उपासना, शुद्ध जल और प्रकृति के सम्मान का प्रतीक है।
- छठ पूजा के जरिए समाज में अनुशासन, स्वच्छता और सामूहिकता का संदेश मिलता है।
- उन्होंने कहा, “यह पर्व भारतीय महिलाओं की शक्ति और सहनशक्ति का प्रतीक है।
- जो लोग इसे ‘ड्रामा’ कहते हैं, उन्हें समझना चाहिए कि यह देश की आत्मा से जुड़ा हुआ पर्व है।”
विपक्ष पर तीखा प्रहार
- प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्षी दलों पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग हर चीज में राजनीति खोजते हैं
- चाहे वह धार्मिक आयोजन हो या जनता की परंपरा। उन्होंने कहा कि जिनके पास जनता से जुड़ने
- का कोई सकारात्मक एजेंडा नहीं है, वे केवल आलोचना के जरिए मंच बनाते हैं।
भाजपा नेताओं का मानना है कि पीएम मोदी का यह बयान न केवल धार्मिक भावनाओं को संबोधित करता है, बल्कि समाज में राष्ट्रीय गर्व और सांस्कृतिक जुड़ाव को भी मजबूत करता है।
जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री मोदी के बयान को लेकर जबरदस्त प्रतिक्रिया देखने
- को मिली। ट्विटर (अब एक्स) पर हैशटैग #छठ_और_संस्कार और #ModiOnChhath ट्रेंड करता रहा।
लाखों लोगों ने पीएम मोदी का वीडियो साझा करते हुए लिखा कि किसी- भी धर्म या परंपरा को ‘ड्रामा’ कहना भारतीय संस्कृति का अपमान है।
- वहीं, कांग्रेस और RJD समर्थकों ने पीएम पर राजनीतिक लाभ उठाने का आरोप लगाया। लेकिन अधिकतर यूजर्स ने यह कहा कि छठ जैसा पर्व किसी भी राजनीति से ऊपर है।
छठ पर्व की पवित्रता बनाम राजनीति
- छठ पूजा हमेशा से सामाजिक एकता और परिवारिक समर्पण का प्रतीक रही है।
- गांव से लेकर शहरों तक यह पर्व सभी वर्गों को जोड़ता है। प्रधानमंत्री मोदी का बयान
- इस दिशा में एक स्पष्ट संदेश देता है कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
यह वक्त है जब सभी राजनीतिक दलों को यह समझना चाहिए कि जनआस्था किसी भी दल की नहीं होती। छठ पूजा या सूर्य अर्घ्य जैसे पर्व भारत की पहचान हैं, जिन्हें केवल सम्मान की दृष्टि से देखा जाना चाहिए, न कि वोट बैंक की राजनीति के रूप में।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह बयान न केवल विपक्ष पर एक राजनीतिक हमला है बल्कि सांस्कृतिक चेतना का भी आह्वान है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आस्था का मजाक बनाने वाले दरअसल भारत की आत्मा का अपमान करते हैं। ऐसे समय में जब देश अपनी परंपराओं को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत कर रहा है, धार्मिक और सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा सभी की जिम्मेदारी है।
छठ पर्व हर भारतीय के लिए गर्व और श्रद्धा का प्रतीक है — और इसे “ड्रामा” कहना आस्था नहीं, राजनीति की कमजोरी दर्शाता है।












