बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने एक बार फिर दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर विवाद के बाद अब ईरान ने बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य (Bab al-Mandeb Strait) को बंद करने की धमकी दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसा होता है तो वैश्विक व्यापार, तेल आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।
#बाब अल-मंदेब दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है। यह लाल सागर (Red Sea) को अदन की खाड़ी (Gulf of Aden) से जोड़ता है और एशिया, यूरोप तथा अफ्रीका के बीच व्यापार के लिए एक प्रमुख मार्ग है। ईरान की इस चेतावनी ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चिंता बढ़ा दी है।

बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य क्यों है महत्वपूर्ण?
#बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य वैश्विक समुद्री व्यापार का एक अहम केंद्र है। इस मार्ग से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस और अन्य व्यापारिक सामान दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचता है। यदि यह मार्ग बाधित होता है तो जहाजों को लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ सकता है, जिससे लागत और समय दोनों बढ़ जाएंगे।
- विशेषज्ञों के अनुसार, दुनिया के तेल और गैस व्यापार का बड़ा हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट
- और बाब अल-मंदेब जैसे समुद्री मार्गों पर निर्भर करता है।
- ऐसे में इन दोनों मार्गों पर संकट वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकता है।
ईरान ने क्यों दी धमकी?
- रिपोर्ट्स के अनुसार, लेबनान में जारी संघर्ष और इजरायल की सैन्य गतिविधियों को लेकर
- ईरान ने कड़ा रुख अपनाया है। ईरान का कहना है कि यदि क्षेत्र में तनाव कम नहीं हुआ
- तो उसके सहयोगी समूह बाब अल-मंदेब क्षेत्र में भी दबाव बढ़ा सकते हैं।
- ईरान समर्थित हूती समूह पहले भी लाल सागर क्षेत्र में जहाजों को निशाना बना चुके हैं।
- ईरान ने अमेरिका और इजरायल को चेतावनी देते हुए कहा है कि क्षेत्रीय
- संघर्ष को बढ़ाने की कीमत वैश्विक व्यापार को चुकानी पड़ सकती है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा?
- यदि बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य बंद होता है तो सबसे पहला असर तेल की कीमतों
- पर देखने को मिल सकता है। तेल आपूर्ति प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार
- में कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़ सकते हैं। इससे पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि होने की संभावना है।
- इसके अलावा, वैश्विक व्यापारिक जहाजों को लंबा समुद्री मार्ग अपनाना पड़ सकता है
- जिससे परिवहन लागत बढ़ेगी। इसका असर उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
- कई विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि होर्मुज और बाब अल-मंदेब दोनों
- मार्गों में व्यवधान आने पर वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लग सकता है।
भारत पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
- भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातक देशों में से एक है। यदि मध्य पूर्व से तेल आपूर्ति प्रभावित होती है
- तो भारत में भी ईंधन की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा
- आयात-निर्यात व्यापार की लागत बढ़ने से कई क्षेत्रों पर असर पड़ सकता है।
- हालांकि भारत लगातार ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने और वैकल्पिक आपूर्ति मार्ग विकसित
- करने की दिशा में काम कर रहा है। फिर भी मध्य पूर्व में किसी बड़े संकट का
- असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ना स्वाभाविक माना जाता है।
दुनिया की नजरें मध्य पूर्व पर
मध्य पूर्व में जारी घटनाक्रम पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। अमेरिका, यूरोपीय देश और संयुक्त राष्ट्र क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बातचीत और समझौते का रास्ता निकाला जाता है तो वैश्विक बाजारों को राहत मिल सकती है।
बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य को लेकर ईरान की धमकी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यदि यहां किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न होती है तो तेल की कीमतों से लेकर वैश्विक सप्लाई चेन तक कई क्षेत्रों पर असर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में मध्य पूर्व की स्थिति और कूटनीतिक प्रयासों पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी।
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