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ईरान-यूएई में तीखी भिड़ंत BRICS दिल्ली बैठक में 40 दिन के युद्ध पर गरमा-गरमी, रूस को पड़ा बीच-बचाव!

ईरान-यूएई में तीखी भिड़ंत और बढ़ता तनाव
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ईरान-यूएई में तीखी भिड़ंत BRICS दिल्ली बैठक में 40 दिन के युद्ध पर गरमा-गरमी, रूस को पड़ा बीच-बचाव!

ईरान-यूएई में तीखी भिड़ंत 14-15 मई 2026 को नई दिल्ली में BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच जोरदार शब्द-युद्ध छिड़ गया। ईरान ने यूएई पर अमेरिका-इजरायल के साथ मिलकर हमला करने का आरोप लगाया, जबकि यूएई ने पलटवार किया। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव को स्थिति शांत करने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा। यह घटना BRICS की एकता पर सवाल उठा रही है और भारत की मेजबानी को नई चुनौती दे रही है।

ईरान-यूएई में तीखी भिड़ंत और बढ़ता तनाव
ईरान-यूएई तनाव ईरान और यूएई के बीच बढ़ती तनातनी ने मिडिल ईस्ट में चिंता बढ़ा दी है।

#ईरान-यूएई में तीखी भिड़ंत क्या है पूरा विवाद? 40 दिन का युद्ध

यह तनाव 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों से जुड़ा है। लगभग 40 दिन चले इस संघर्ष में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। ईरान का दावा है कि हजारों उसके नागरिक मारे गए।

BRICS बैठक में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने यूएई पर सीधा आरोप लगाया: “यूएई ने अमेरिका और इजरायल को अपने ठिकाने, हवाई क्षेत्र और खुफिया जानकारी उपलब्ध कराई। हमने यूएई पर नहीं, बल्कि वहां मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर हमला किया था।”

  • यूएई के विदेश मामलों के राज्य मंत्री खलीफा शाहीन अल मरार ने इसे खारिज करते हुए
  • कहा कि ईरान ने उनके देश पर हमले किए। दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई, जिसे रूस ने शांत किया।

इजरायल कनेक्शन और यूएई की भूमिका

  • विवाद की एक बड़ी वजह इजरायल भी है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि युद्ध के
  • दौरान इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुप्त रूप से यूएई के राष्ट्रपति
  • से मुलाकात की। यूएई ने इसे खारिज किया, लेकिन ईरान इसे “साजिश” मान रहा है।
  • ईरान का कहना है कि यूएई तटस्थ नहीं रहा, बल्कि हमलावरों का साथी बना।

भारत का रुख क्या रहा?

#भारत BRICS की 2026 की अध्यक्षता कर रहा है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बैठक में कूटनीति और शांति पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का सुरक्षित रहना बेहद जरूरी है, क्योंकि वहां से दुनिया का बड़ा तेल व्यापार होता है।

भारत ने BRICS देशों के बीच आम सहमति बनाने की कोशिश की, लेकिन ईरान-UAE मतभेदों के कारण पश्चिम एशिया संकट पर कोई संयुक्त बयान जारी नहीं हो सका।

BRICS पर क्या असर पड़ेगा?

  • BRICS में अब भारत, ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका के अलावा ईरान
  • यूएई, मिस्र, इथियोपिया और इंडोनेशिया भी शामिल हैं। इस बैठक में:
  • ऊर्जा सुरक्षा और तेल कीमतों में उछाल पर चर्चा हुई।
  • वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और आर्थिक अनिश्चितता पर फोकस रहा।
  • ईरान ने BRICS से अमेरिका-इजरायल की निंदा की मांग की, लेकिन एकता नहीं बन सकी।

यह घटना BRICS की सीमाओं को उजागर करती है, खासकर जब सदस्य देश आपस में ही टकराव पर हों।

भारत के लिए चुनौतियां और अवसर

  • ऊर्जा सुरक्षा: भारत यूएई और सऊदी अरब से बड़ा तेल आयात करता है। होर्मुज तनाव से कीमतें बढ़ सकती हैं।
  • कूटनीतिक संतुलन: भारत ईरान के साथ भी अच्छे संबंध रखता है (CHABAHAR पोर्ट)। दोनों पक्षों को संतुलित करना चुनौती है।
  • BRICS की मेजबानी: भारत सितंबर 2026 में पूर्ण शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। इस बैठक का अनुभव उसकी तैयारी में मददगार साबित होगा।

आगे क्या हो सकता है?

  • BRICS को क्षेत्रीय विवादों पर एक मजबूत स्टैंड बनाने की जरूरत है।
  • भारत शांति वार्ता और कूटनीति के जरिए अपनी भूमिका निभा सकता है।
  • तेल कीमतों में उछाल से वैश्विक महंगाई बढ़ सकती है, जिसका असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।

BRICS दिल्ली बैठक ईरान-UAE तनाव का शिकार हो गई, लेकिन भारत ने संयम और कूटनीति दिखाई। यह घटना दर्शाती है कि बहुपक्षीय मंचों पर भी द्विपक्षीय विवाद कितने गहरे हो सकते हैं। दुनिया को उम्मीद है कि BRICS जैसे मंच शांति और सहयोग को बढ़ावा देंगे, न कि विभाजन को।

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