मुर्शिदाबाद में ED की बड़ी कार्रवाई! 14 घंटे चली रेड में घर से मिला चौंकाने वाला खजाना

On: May 23, 2026 10:12 AM
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मुर्शिदाबाद ED रेड

मुर्शिदाबाद ED रेड मुर्शिदाबाद में ED की बड़ी रेड करीब 14 घंटे तक चली, जिसमें कई अहम दस्तावेज और कीमती सामान मिलने की खबर सामने आई है। इस कार्रवाई के बाद इलाके में राजनीतिक हलचल और चर्चाएं तेज हो गई हैं।

मुर्शिदाबाद ED रेड

पश्चिम बंगाल में एक बार फिर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई ने सनसनी फैला दी है। 22 मई 2026 को मुर्शिदाबाद के कांदी इलाके में पूर्व कोलकाता पुलिस डिप्टी कमिश्नर शांतनु सिन्हा बिस्वास के पैतृक आलीशान घर पर ED की टीम ने 14 घंटे से ज्यादा समय तक छापेमारी की। इस दौरान न सिर्फ दस्तावेजों की भरमार मिली, बल्कि भारी मात्रा में नकदी, सोना-चांदी और अन्य संपत्तियों के सुराग भी सामने आए। यह कार्रवाई इतिहास-शीटर सोना पप्पू (बिस्वजीत पोड्डार) से जुड़े जमीन घोटाले, रंगदारी रैकेट और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई।

मुर्शिदाबाद ED रेड : ED की कार्रवाई का पूरा ब्योरा

ED की टीम सुबह करीब 6 बजे मुर्शिदाबाद के कांदी पहुंची। शांतनु सिन्हा का यह घर बंद था, इसलिए ED अधिकारियों को ताला तोड़कर अंदर घुसना पड़ा। छापेमारी लगातार 14 घंटे चली और देर रात 8-11 बजे के बीच समाप्त हुई। इस रेड कोलकाता और मुर्शिदाबाद के कुल 9 ठिकानों पर एक साथ की गई।

मुख्य रूप से शांतनु सिन्हा बिस्वास, उनके भतीजे सौरव अधिकारी, कोलकाता पुलिस के SI रुहिल अमीन अली और अन्य सहयोगियों के ठिकानों को टारगेट किया गया। ED ने सोना पप्पू के नेटवर्क से जुड़े लोगों के घरों पर भी सर्च ऑपरेशन चलाया।

चौंकाने वाला खजाना और जब्तियां

रेड के दौरान ED टीम को आलीशान घर में कई संदिग्ध चीजें मिलीं। रिपोर्ट्स के अनुसार:

  • भारी मात्रा में नकदी (कैश)
  • सोने-चांदी के जेवरात
  • विदेशी रिवॉल्वर
  • जमीन और संपत्ति से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज
  • बैंक अकाउंट्स, प्रॉपर्टी डीड्स और अन्य कागजात

यह घर अनौपचारिक रूप से “मुर्शिदाबाद का व्हाइट हाउस” के नाम से जाना जाता था। ED की जांच में यह पाया गया कि इतनी बड़ी और शानदार संपत्ति शांतनु सिन्हा की वैध आय से ज्यादा प्रतीत होती है। सोना पप्पू के साथ कथित तालमेल के जरिए रंगदारी, जमीन कब्जा और धोखाधड़ी से कमाए गए पैसे से यह संपत्ति खड़ी की गई हो सकती है।

सोना पप्पू और शांतनु सिन्हा का कनेक्शन

सोना पप्पू पश्चिम बंगाल का कुख्यात क्रिमिनल है, जिस पर जमीन घोटाले, रंगदारी और हिंसा के कई मामले दर्ज हैं। ED ने उसे 18 मई 2026 को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में सोना पप्पू ने कई बड़े नाम उगले, जिनमें शांतनु सिन्हा बिस्वास का नाम प्रमुख था।

शांतनु सिन्हा, जो कोलकाता पुलिस के डिप्टी कमिश्नर थे, को 14 मई को ED ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था। आरोप है कि उन्होंने पुलिस की पोस्टिंग का फायदा उठाकर सोना पप्पू जैसे अपराधियों को संरक्षण दिया और बदले में रिश्वत और संपत्ति हासिल की।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल

यह ED कार्रवाई बंगाल की राजनीति को हिला देने वाली है। विपक्षी पार्टियां (खासकर BJP) इसे तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार में भ्रष्टाचार और पुलिस-माफिया गठजोड़ का प्रमाण बता रही हैं। TMC ने इसे “राजनीतिक साजिश” करार दिया है।

ED के सूत्रों के मुताबिक, यह जांच केवल शांतनु और सोना पप्पू तक सीमित नहीं है। इसमें और कई पुलिस अधिकारी, स्थानीय नेता और बिल्डर शामिल हो सकते हैं। कोलकाता के रियल एस्टेट सेक्टर में चल रहे जमीन कब्जा रैकेट की पूरी चेन को उजागर करने का प्रयास किया जा रहा है।

ED की रणनीति और आगे क्या?

#ED ने PMLA (Prevention of Money Laundering Act) के तहत यह कार्रवाई की है। अब तक कई करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की जा चुकी हैं। मुर्शिदाबाद रेड में मिले दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच चल रही है।

ED की टीम ने CRPF की सुरक्षा में पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया। इतने लंबे समय तक रेड चलने से साफ है कि ED को बड़े सबूत मिले हैं। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

भ्रष्टाचार के खिलाफ ED की बड़ी जीत?

पश्चिम बंगाल में ED की ये लगातार कार्रवाई राज्य में सिस्टेमेटिक भ्रष्टाचार को उजागर कर रही है। पहले राशन घोटाला, कोयला घोटाला और अब पुलिस-क्रिमिनल nexus।

विशेषज्ञों का कहना है कि पुलिस अधिकारी का अपराधियों से सीधा लिंक होना लोकतंत्र के लिए खतरा है। अगर शांतनु सिन्हा जैसे अधिकारी रंगदारी रैकेट में शामिल थे, तो आम नागरिकों का कानून पर भरोसा कैसे टिकेगा?

निष्कर्ष: पारदर्शिता की जरूरत

मुर्शिदाबाद ED रेड एक बड़ी खबर है, लेकिन यह सिर्फ शुरुआत हो सकती है। 14 घंटे की इस मैराथन सर्च ने जो खजाना उजागर किया है, वह न सिर्फ नकदी और सोने का है, बल्कि बंगाल की सिस्टम में गहरी सड़ी हुई भ्रष्टाचार की परतें भी हैं।

देश में कानून का राज कायम करने के लिए ED जैसी एजेंसियों को बिना दबाव के काम करने देना जरूरी है। आम जनता उम्मीद करती है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषी चाहे कोई भी हो, उसे सजा मिले।

नोट: यह ब्लॉग पोस्ट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध समाचार रिपोर्ट्स पर आधारित है। जांच अभी चल रही है, इसलिए अंतिम फैसला अदालत पर निर्भर करेगा। नवीनतम अपडेट के लिए विश्वसनीय समाचार स्रोत चेक करें।

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