अफगान पाकिस्तान बॉर्डर फायरिंग अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर भारी गोलीबारी में 5 लोगों की मौत, तुर्की शांति वार्ता पर असर पड़ने की आशंका।
अफगान पाकिस्तान बॉर्डर फायरिंग अफगान-पाक सीमा पर बढ़ते तनाव से तुर्की और कतर की मध्यस्थता में शांति वार्ता संकट में; पांच नागरिक हत्याओं से क्षेत्र में बढ़ी अनिश्चिति
#अफगान पाकिस्तान बॉर्डर फायरिंग बढ़ती समस्याओं और तनाव के बीच तुर्की और कतर की मध्यस्थता में अफगानिस्तान-पाकिस्तान के बीच चल रही शांति वार्ता संकट में है। सीमा पर हुई हालिया तीव्र गोलीबारी में पांच नागरिकों की मौत हो गई है, जिसने क्षेत्र की स्थिति को और अनिश्चित बना दिया है।
अफगान-पाक सीमा पर ताजा हिंसा वजह क्या है

अफगानिस्तान और पाकिस्तान की सीमा पर गुरुवार को हुए संघर्ष में पांच लोगों की मौत और छह घायल हो गए हैं। अफगान पक्ष ने दावा किया कि पाकिस्तानी सेना ने नागरिक इलाकों में भारी हथियारों से हमला किया, वहीं पाकिस्तान का कहना है यह फायरिंग अफगान पक्ष ने शुरू की थी। यह वारदात दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे आतंकवाद के आरोपों और सीमा विवाद की जड़ में छुपी है, जहां तालिबान की भूमिका लगातार आरोप-प्रत्यारोप का केंद्र बनी रहती है.
स्पिन बोल्डक में फायरिंग
कंधार के स्पिन बोल्डक अस्पताल के अधिकारियों ने बताया कि मृतकों में चार महिलाएं और एक पुरुष शामिल हैं। घटना स्थल के आसपास रहने वाले लोगों की मानें तो फायरिंग अचानक शुरू हुई और दस मिनट तक चली। इस झड़प ने स्थानीय नागरिकों में बेचैनी और डर का माहौल बना दिया। सरकारी बयान और आम जनता की स्थिति में बड़ा अंतर दिखता है.
पाक-अफगान संबंधों में बढ़ता अविश्वास
पाकिस्तान पिछले कई सालों से अफगानिस्तान पर आतंकवादी संगठनों को पनाह देने का आरोप लगाता रहा है, खासतौर पर पाकिस्तान तालिबान को लेकर। अफगान सरकार इन दावों को सिरे से खारिज करती रही है। सीमा पर बार-बार होने वाली हिंसा ने दोनों देशों के विश्वास को बुरी तरह प्रभावित किया है.
तुर्की में शांति वार्ता उम्मीद पर संकट
इस्तांबुल में चल रही शांति वार्ता सीमा विवाद को खत्म करने का प्रयास था।
लेकिन सीमा पर ताजा फायरिंग वार्ता की सफलता पर सवाल खड़े कर रही है।
दोनों पक्ष एक-दूसरे को असहयोगी बता रहे हैं। तुर्की ने एक
निगरानी तंत्र बनाने का सुझाव दिया था, पर घटनाओं ने वार्ता को मुश्किल में डाल दिया है.
सीमा संघर्ष आम नागरिकों की जिंदगी पर असर
अफगान-पाक सीमा पर बार-बार झड़पें आम लोगों की जिंदगी पर सीधा असर डालती हैं।
व्यापार, आवाजाही और सुरक्षा संकट में रहती है। पिछले महीने के
झगड़े में 50 नागरिकों की जान गई थी और सैकड़ों घायल हुए थे।
ऐसे हालात ने स्थानीय समाज में गहरी अस्थिरता पैदा कर दी है.
वैश्विक प्रतिक्रियाएँ और मध्यस्थता की भूमिका
संयुक्त राष्ट्र तथा तुर्की जैसे बाहरी देशों की मध्यस्थता इस क्षेत्र में
शांति की उम्मीद जगाती है। वहीं, सऊदी अरब और कतर जैसे देश पहले
भी संघर्षविराम में भूमिका निभा चुके हैं। लेकिन फायरिंग की खबरें इस उम्मीद पर गंभीर सवाल उठाती हैं.
भविष्य की राह समाधान की संभावनाएँ
सीमा पर बढ़ता तनाव दोनों देशों को मजबूर करता है
कि वे मिलकर निगरानी तंत्र बनाएं और शांति व्यवस्था कायम रखें।
यदि बातचीत सफल होती है तो क्षेत्र में स्थिरता आने की संभावना है,
वरना सीमा विवाद और आतंकवाद का खतरा बढ़ता रहेगा.









