अपरा एकादशी 2026 जानें सही तारीख, पूजा विधि, पारण समय और व्रत का महत्व!

On: May 11, 2026 2:41 PM
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अपरा एकादशी 2026 पूजा विधि

अपरा एकादशी 2026 हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। सालभर में आने वाली सभी एकादशियों में अपरा एकादशी को बेहद पुण्यदायी माना जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजा करने से व्यक्ति के पाप नष्ट होते हैं तथा जीवन में सुख-समृद्धि आती है। ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अपरा एकादशी कहा जाता है। इसे अचला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।

साल 2026 में अपरा एकादशी की सही तारीख को लेकर लोगों में थोड़ा भ्रम बना हुआ है। ऐसे में यहां जानिए अपरा एकादशी 2026 की सही तिथि, पूजा विधि, पारण समय और धार्मिक महत्व।

अपरा एकादशी 2026 पूजा विधि
अपरा एकादशी 2026 पर भगवान विष्णु की पूजा और व्रत का विशेष महत्व माना जाता है।

अपरा एकादशी 2026 कब है?

पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 12 मई 2026 को दोपहर 2:52 बजे शुरू होगी और 13 मई 2026 को दोपहर 1:29 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार अपरा एकादशी व्रत 13 मई 2026, बुधवार को रखा जाएगा।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो भक्त इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक भगवान विष्णु की पूजा करते हैं, उन्हें अपार पुण्य की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि इसे “अपरा” एकादशी कहा जाता है, जिसका अर्थ होता है “असीमित”।

अपरा एकादशी का धार्मिक महत्व

अपरा एकादशी को पापों का नाश करने वाली एकादशी माना गया है। पद्म पुराण और भविष्योत्तर पुराण में इस व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति को अश्वमेध यज्ञ, तीर्थ स्नान और दान के समान पुण्य फल प्राप्त होता है।

भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को बताया था कि अपरा एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के पिछले जन्मों और वर्तमान जीवन के पाप समाप्त हो जाते हैं। यह व्रत मोक्ष प्राप्ति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग भी खोलता है।

अपरा एकादशी पूजा विधि

अपरा एकादशी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए और स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद घर के मंदिर में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है।

पूजा सामग्री

  • तुलसी दल
  • पीले फूल
  • धूप और दीप
  • चंदन
  • फल और मिठाई
  • गंगाजल
  • पंचामृत
  • नारियल
  • केले

पूजा करने की विधि

  1. सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें।
  2. भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर को गंगाजल से शुद्ध करें।
  3. भगवान को पीले वस्त्र और पीले फूल अर्पित करें।
  4. तुलसी दल अर्पित कर “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
  5. विष्णु सहस्रनाम और एकादशी व्रत कथा का पाठ करें।
  6. दिनभर सात्विक रहें और जरूरतमंदों को दान दें।
  7. रात में भजन-कीर्तन और भगवान विष्णु का ध्यान करें।

धार्मिक मान्यता है कि इस दिन तुलसी पूजा का भी विशेष महत्व होता है।

अपरा एकादशी पारण समय 2026

एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि में किया जाता है। पारण का सही समय बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। पंचांग के अनुसार अपरा एकादशी का पारण 14 मई 2026 को सूर्योदय के बाद किया जाएगा।

कुछ पंचांगों के अनुसार पारण का शुभ समय सुबह 5:31 बजे से 8:14 बजे तक रहेगा। भक्तों को इसी समय के भीतर व्रत खोलना चाहिए।

अपरा एकादशी व्रत के नियम

  • व्रत से एक दिन पहले सात्विक भोजन करें।
  • लहसुन, प्याज और मांसाहार से दूर रहें।
  • एकादशी के दिन चावल का सेवन न करें।
  • क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से बचें।
  • भगवान विष्णु का ध्यान और मंत्र जाप करें।

धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है कि नियमों का पालन करने से व्रत का पूरा फल प्राप्त होता है।

अपरा एकादशी व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन समय में महीध्वज नामक एक धर्मात्मा राजा थे। उनके छोटे भाई वज्रध्वज ने ईर्ष्या में आकर उनकी हत्या कर दी। मृत्यु के बाद राजा की आत्मा भटकने लगी। बाद में एक ऋषि ने अपरा एकादशी का व्रत कर उस आत्मा को मुक्ति दिलाई। तभी से इस व्रत को पापों और नकारात्मक कर्मों से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है।

व्रत करने से मिलने वाले लाभ

  • पापों से मुक्ति मिलती है
  • भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है
  • जीवन में सुख-समृद्धि आती है
  • मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है
  • मोक्ष प्राप्ति का मार्ग खुलता है

धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रद्धा और नियमपूर्वक यह व्रत करने से व्यक्ति को अपार पुण्य फल प्राप्त होता है।

अपरा एकादशी 2026 का व्रत 13 मई, बुधवार को रखा जाएगा। यह दिन भगवान विष्णु की आराधना और आध्यात्मिक साधना के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से जीवन के दुख-दर्द दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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