केरल सीएम रेस केसी केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ गठबंधन की सरकार बनने के बावजूद मुख्यमंत्री पद को लेकर घमासान जारी है। केसी वेणुगोपाल और वीडी सतीशन के बीच मुकाबला अब दो घोड़ों की रेस बन गया है। कांग्रेस हाईकमान ने फैसला टालते हुए एक-दो दिन का और समय मांगा है।
केरल में सीएम पद की रेस क्यों बनी चुनौती?
5 मई 2026 को आए विधानसभा चुनाव नतीजों में यूडीएफ ने भारी जीत दर्ज की। कुल 140 सीटों वाली विधानसभा में यूडीएफ को 102 सीटें मिली हैं। कांग्रेस के 63 विधायक हैं।

तमिलनाडु, बंगाल और असम में नए मुख्यमंत्रियों ने शपथ ले ली, लेकिन केरल में अभी भी सीएम का नाम तय नहीं हो सका है। तिरुवनंतपुरम में हुई बैठक बेनतीजा रही। अब दिल्ली में हाईकमान ने और समय मांगा है ताकि सभी गुटों से बातचीत की जा सके।
दो मुख्य दावेदार: केसी वेणुगोपाल और वीडी सतीशन
1. केसी वेणुगोपाल (KC Venugopal)
- कांग्रेस महासचिव
- राहुल गांधी के बेहद करीबी माने जाते हैं
- हाईकमान का मजबूत समर्थन
- कई विधायकों का समर्थन (भविष्य में टिकट और पदों की उम्मीद)
- अलप्पुझा से सांसद, लेकिन विधायक नहीं
2. वीडी सतीशन (VD Satheeshan)
- केरल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता
- पूर्व नेता प्रतिपक्ष
- स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़
- केरल कांग्रेस और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) का समर्थन
- संगठन और काडर का बड़ा हिस्सा उनके पक्ष में
- कई जगहों पर उनके समर्थन में प्रदर्शन हो चुके हैं
केरल सीएम रेस केसी हाईकमान क्यों ले रहा है समय?
कांग्रेस नहीं चाहती कि सरकार बनते ही आंतरिक कलह शुरू हो जाए। मुकुल वासनिक और अजय माकन के केरल दौरे में विधायकों से अलग-अलग बातचीत हुई।
- विधायकों का बड़ा गुट → वेणुगोपाल
- संगठन और स्थानीय काडर → सतीशन
शनिवार को दिल्ली में हुई बैठक में सतीशन, रमेश चेन्निथला और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सनी जोसेफ शामिल हुए। हाईकमान दोनों पक्षों को संतुलित रखते हुए फैसला लेना चाहता है।
यूडीएफ की जीत के बावजूद अटकी बात क्यों?
- आंतरिक गुटबाजी
- दोनों नेताओं के मजबूत समर्थक
- हाईकमान की सावधानी (कोई नाराजगी न हो)
- स्थानीय vs केंद्रीय नेतृत्व की लड़ाई
आगे क्या हो सकता है?
कांग्रेस हाईकमान (राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे) जल्द ही फैसला लेने वाला है। अगर वेणुगोपाल को चुना गया तो यह हाईकमान की पसंद माना जाएगा। वहीं सतीशन को चुनने पर स्थानीय समर्थन मजबूत होगा, लेकिन विधायकों में कुछ नाराजगी हो सकती है।
केरल कांग्रेस की यह रेस पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई है। यह तय करेगी कि आने वाले 5 साल केरल में कांग्रेस की सरकार कितनी स्थिर और प्रभावी रहेगी।
केरल में यूडीएफ की बड़ी जीत के बावजूद सीएम पद को लेकर चल रही यह रेस कांग्रेस की आंतरिक राजनीति को उजागर कर रही है। हाईकमान की सावधानी सराहनीय है, लेकिन जल्द फैसला न लेने से कार्यकर्ताओं में असमंजस भी बढ़ रहा है। अब देखना होगा कि एक-दो दिन में कौन बनेगा केरल का नया मुख्यमंत्री।









