कानपुर HDFC बैंक : उत्तर प्रदेश के कानपुर में HDFC बैंक की एक शाखा में हुआ हाई-वोल्टेज ड्रामा अब सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है। बैंक की महिला कर्मचारी आस्था सिंह ने एक ग्राहक के साथ तीखी बहस के दौरान गुस्से में आकर जातिसूचक टिप्पणी की और धमकी भरे अंदाज में कहा, “ठाकुर हूं मैं, बकचोदी मत करना मेरे साथ!”। इस दौरान उन्होंने ग्राहक पर लैपटॉप तानने की कोशिश की, जिसे देखकर बैंक का माहौल सड़क के झगड़े जैसा हो गया। यह 33-44 सेकंड का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे लोगों में भारी आक्रोश है।
क्या है पूरा मामला!
कानपुर के पनकी सेक्टर-2 स्थित HDFC बैंक ब्रांच में यह घटना हुई। वीडियो में आस्था सिंह नाम की कर्मचारी ग्राहक (एक पुरुष) से बहस करती दिख रही हैं। बहस की शुरुआत ग्राहक की ओर से कथित तौर पर अभद्र व्यवहार से हुई, लेकिन कर्मचारी ने गुस्से में काबू खो दिया। उन्होंने न केवल भद्दी-भद्दी गालियां दीं, बल्कि लैपटॉप उठाकर ग्राहक की तरफ तान दिया। सबसे विवादास्पद हिस्सा तब आया जब आस्था सिंह चिल्लाकर बोलीं, “ठाकुर हूं मैं… ठाकुर हूं मैं… बकचोदी मत करो!”। यह जाति का रौब दिखाने वाला बयान बैंक जैसी पेशेवर जगह पर पूरी तरह अनुचित माना जा रहा है।

बैंक के अन्य कर्मचारी उन्हें रोकने की कोशिश करते दिखे, लेकिन गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा था। ग्राहक की पत्नी या साथी महिला उन्हें शांत करने की कोशिश कर रही थी। पूरा वीडियो कैमरे में कैद हो गया और जल्द ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
वीडियो वायरल होने पर क्या हुआ?
वीडियो शेयर होने के बाद X (ट्विटर), इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर हजारों लोगों ने इसे देखा और शेयर किया। लोग आस्था सिंह के व्यवहार पर भड़क गए। कई यूजर्स ने कहा कि बैंक में ग्राहक की इज्जत करनी चाहिए, न कि जाति का हवाला देकर धमकाना। कुछ ने कानूनी कार्रवाई और नौकरी से निकालने की मांग की। एक यूजर ने लिखा, “ऐसे कर्मचारी को HDFC बैंक में नहीं रखना चाहिए।”
हालांकि कुछ यूजर्स ने कर्मचारी का बचाव किया। उनका कहना है कि पूरा वीडियो नहीं दिखाया गया और ग्राहक ने पहले अभद्र शब्दों का इस्तेमाल किया। @KshatriyaItihas ने लिखा, “ग्राहक ने पहले गाली दी, पूरा संदर्भ दिखाओ।” फिर भी ज्यादातर लोग कर्मचारी के जातिसूचक बयान पर नाराज हैं।
HDFC बैंक की तरफ से कोई बयान?
- अभी तक HDFC बैंक की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
- न ही आस्था सिंह ने कोई सफाई दी है। घटना 9 फरवरी 2026 को रिपोर्ट हुई
- लेकिन घटना की सटीक तारीख स्पष्ट नहीं। सोशल मीडिया पर बैंक
- को टैग करके लोगों ने सख्त कार्रवाई की मांग की है।
- कई यूजर्स ने कहा, “अगर बैंक ने ऐक्शन नहीं लिया तो ऐसे बैंक में अकाउंट नहीं रखेंगे।”
जाति का इस्तेमाल क्यों गलत?
- यह घटना हमें याद दिलाती है कि पेशेवर जगह पर जाति का हवाला देना कितना खतरनाक
- और गैर-जिम्मेदाराना है। बैंक जैसे संस्थान में ग्राहक सेवा सर्वोपरि होती है।
- गुस्से में जातिसूचक टिप्पणी न केवल अनुचित है, बल्कि SC/ST एक्ट के तहत भी कार्रवाई हो सकती है।
- यह मामला कर्मचारियों के ट्रेनिंग और व्यवहार पर सवाल उठाता है।
प्रोफेशनलिज्म की जरूरत
- यह वीडियो एक बार फिर साबित करता है कि सोशल मीडिया पर कुछ भी वायरल हो सकता है।
- HDFC बैंक को जल्द से जल्द जांच करनी चाहिए और उचित कार्रवाई करनी चाहिए।
- ग्राहकों को भी शांत रहकर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। बैंकिंग में सम्मान
- और शांति जरूरी है – न कि दबंगई या जाति का रौब।










