अप्रैल 2026 : भारतीय बैंकिंग सिस्टम में एक बड़ा बदलाव आने वाला है। 1 अप्रैल 2026 से डिपॉजिट इंश्योरेंस के नियम पूरी तरह बदल जाएंगे। DICGC (Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation) अब यूनिफॉर्म प्रीमियम की जगह रिस्क-बेस्ड प्रीमियम सिस्टम लागू करेगा। यह बदलाव 1962 से चले आ रहे फ्लैट रेट सिस्टम को खत्म करेगा, जहां सभी बैंक ₹100 के डिपॉजिट पर 12 पैसे प्रीमियम देते थे, चाहे बैंक कितना भी मजबूत या कमजोर हो। अब बैंक की फाइनेंशियल हेल्थ के आधार पर प्रीमियम तय होगा – सुरक्षित बैंक कम पैसे देंगे, जबकि जोखिम वाले बैंक ज्यादा।
DICGC क्या है और कवरेज कितना है?
DICGC रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की पूरी तरह स्वामित्व वाली सब्सिडियरी है, जो 1961 के DICGC एक्ट के तहत काम करती है। यह बैंक में जमा पैसों की सुरक्षा करती है। अगर बैंक दिवालिया हो जाए, लाइसेंस रद्द हो या मर्जर/एमलगमेशन हो, तो DICGC हर जमाकर्ता को ₹5 लाख तक (प्रिंसिपल + ब्याज) का भुगतान करती है। यह कवरेज सेविंग्स अकाउंट, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), करंट अकाउंट, रिकरिंग डिपॉजिट आदि सभी पर लागू होता है।

महत्वपूर्ण बात: यह बदलाव कवरेज लिमिट में कोई बदलाव नहीं ला रहा। अभी भी ₹5 लाख ही मैक्सिमम इंश्योरेंस है। ग्राहकों की सुरक्षा पर कोई असर नहीं पड़ेगा – पैसा वापस मिलने की प्रक्रिया वही रहेगी।
नया रिस्क-बेस्ड प्रीमियम मॉडल कैसे काम करेगा?
- बैंक को चार कैटेगरी में बांटा जाएगा: A, B, C, D (A सबसे कम रिस्क, D सबसे ज्यादा)।
- रिस्क आकलन के आधार: कैपिटल एडिक्वेसी, NPA लेवल, प्रॉफिटेबिलिटी, लिक्विडिटी, सुपरवाइजरी रेटिंग (CAMELS), और DICGC फंड पर संभावित नुकसान।
- नए प्रीमियम रेट्स (प्रति ₹100 डिपॉजिट पर):
- कैटेगरी A (सबसे सुरक्षित): 8 पैसे (33% कम)
- कैटेगरी B: 10 पैसे
- कैटेगरी C: 11 पैसे
- कैटेगरी D (हाई रिस्क): 12 पैसे (वही पुराना रेट)
- लोकल एरिया बैंक और पेमेंट्स बैंक डेटा की कमी के कारण यूनिफॉर्म 12 पैसे ही देंगे।
- विंटेज इंसेंटिव: पुराने, स्थिर बैंकों को अतिरिक्त छूट (मैक्स 25%) अगर कोई बड़ा रेगुलेटरी पेनल्टी या रिस्ट्रक्चरिंग नहीं हुआ हो।
यह सिस्टम टियर-1 (कमर्शियल बैंक) और टियर-2 (आरआरबी, कोऑपरेटिव बैंक) मॉडल पर आधारित है। RBI का मानना है कि पुराना यूनिफॉर्म सिस्टम बैंकों को बेहतर रिस्क मैनेजमेंट के लिए प्रोत्साहित नहीं करता था। अब मजबूत बैंक कम खर्च करेंगे, जबकि कमजोर बैंक सुधार के लिए मजबूर होंगे।
ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा?
- सीधा असर नहीं: आपका ₹5 लाख तक का डिपॉजिट उतना ही सुरक्षित रहेगा। क्लेम प्रक्रिया (90 दिनों में पेआउट) वही रहेगी।
- इनडायरेक्ट फायदे:
- मजबूत बैंक (जैसे HDFC, ICICI, SBI आदि) कम प्रीमियम देंगे, जिससे उनके खर्च कम होंगे। वे बेहतर FD रेट्स या कम लोन इंटरेस्ट ऑफर कर सकते हैं।
- बैंकिंग सिस्टम और मजबूत बनेगा, ग्राहकों का भरोसा बढ़ेगा।
- ग्राहकों को बैंक चुनते समय ज्यादा सतर्क रहना चाहिए – रेटिंग, NPA, फाइनेंशियल हेल्थ चेक करें।
- अगर आपका बैंक कैटेगरी A में आता है, तो अप्रत्यक्ष रूप से फायदा मिल सकता है।
क्यों जरूरी था यह बदलाव?
RBI ने कहा, “यह व्यवस्था बैंकों को बेहतर जोखिम प्रबंधन के लिए प्रोत्साहित नहीं करती थी, इसलिए बदलाव जरूरी था।” यह कदम बैंकिंग सेक्टर को और सुरक्षित बनाने की दिशा में है। मार्च 2025 तक 1,982 बैंक DICGC से इंश्योर्ड थे।
सलाह: अपने डिपॉजिट को सुरक्षित रखें!
- एक बैंक में ₹5 लाख से ज्यादा जमा न रखें – कई बैंक में बांटें।
- मजबूत, बड़े बैंक चुनें।
- DICGC कवरेज की जानकारी रखें – पब्लिक और प्राइवेट दोनों बैंक कवर होते हैं।
अप्रैल 2026 से बैंकिंग में नया दौर शुरू होगा। ग्राहकों के लिए सुरक्षा वही, लेकिन सिस्टम ज्यादा जिम्मेदार बनेगा।












