अंकिता भंडारी हत्याकांड : उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर सुर्खियों में है। 2022 में वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करने वाली 19 वर्षीय अंकिता की क्रूर हत्या ने पूरे राज्य और देश को झकझोर दिया था। तीन दोषियों को सजा हो चुकी है, लेकिन मामला अभी खत्म नहीं हुआ। अब ‘VIP’ या ‘VVIP’ के शामिल होने के आरोपों ने जांच को नया मोड़ दिया है। हाल ही में देहरादून के परेड ग्राउंड के बाहर ‘अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच’ ने महापंचायत बुलाई, जिसमें अंकिता के माता-पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी और सोनी देवी भी शामिल हुए। महापंचायत में सरकार और CBI जांच पर कई गंभीर सवाल उठाए गए, खासकर यह कि CBI जांच के लिए अंकिता के माता-पिता से FIR क्यों नहीं दर्ज कराई गई?
महापंचायत में क्या हुआ?
रविवार को आयोजित इस महापंचायत में सैकड़ों लोग जुटे। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, स्वामी दर्शन भारती, CPI माले के इंद्रेश मैखुरी, उत्तराखंड महिला मंच की कमला पंत और अन्य नेताओं ने हिस्सा लिया। अंकिता के पिता वीरेंद्र सिंह ने भावुक होकर कहा, “जब मेरी बेटी नहीं झुकी तो मैं कैसे झुक सकता हूं?” उन्होंने CBI जांच को सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में कराने की मांग की। मां सोनी देवी के आंसू छलक आए।

महापंचायत में सरकार से 5 बड़े सवाल उठाए गए:
- CBI जांच के लिए अंकिता के माता-पिता से FIR क्यों नहीं दर्ज कराई गई?
- पर्यावरणविद अनिल प्रकाश जोशी की FIR को आधार क्यों बनाया गया, जबकि उनका परिवार से कोई संबंध नहीं?
- VIP का नाम क्यों नहीं खोला जा रहा और उनकी गिरफ्तारी क्यों नहीं हो रही?
- साक्ष्य जुटाने में देरी क्यों हुई?
- जांच को पारदर्शी कैसे बनाया जाएगा?
- वक्ताओं ने आरोप लगाया कि पर्यावरणविद अनिल जोशी की FIR (9 जनवरी को दर्ज) को
- आधार बनाकर CBI जांच शुरू की गई, जो सरकार की चाल है ताकि असली VIP बच जाए।
- अंकिता के पिता ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र दिया था
- जिसमें सुप्रीम कोर्ट जज की निगरानी वाली CBI जांच की मांग थी, लेकिन उस पर ध्यान नहीं दिया गया।
CBI जांच की वर्तमान स्थिति
जनवरी 2026 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने CBI जांच की सिफारिश की, जिसे केंद्र ने मंजूरी दी। CBI ने ‘अज्ञात VIP’ के खिलाफ नया केस दर्ज किया और जांच शुरू कर दी। पुराने रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। लेकिन विपक्ष और आंदोलनकारी इसे ‘ढकोसला’ बता रहे हैं। उनका कहना है कि जांच परिवार की शिकायत पर होनी चाहिए, न कि बाहरी व्यक्ति की। महापंचायत में 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया गया – अगर मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज होगा।
अंकिता हत्याकांड का बैकग्राउंड
18 सितंबर 2022 को अंकिता की हत्या हुई। आरोप था कि रिजॉर्ट मालिक के बेटे पुलकित आर्य और दो साथियों ने उसे गुस्से में मार डाला क्योंकि वह ‘VIP’ की विशेष सेवा देने से इनकार कर दी थी। तीनों को कोर्ट ने दोषी ठहराया और सजा सुनाई। लेकिन सोशल मीडिया पर आए ऑडियो-वीडियो क्लिप्स में VIP के शामिल होने के दावे हुए, जिससे मामला फिर गरमा गया। परिवार और जनता का कहना है कि असली दोषी अभी भी बाहर हैं।
क्यों उठ रहे सवाल?
- यह मामला सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि उत्तराखंड की बेटियों की सुरक्षा, VIP संस्कृति
- और न्याय व्यवस्था पर सवाल है। महापंचायत में मांग की गई कि जांच परिवार की FIR पर आधारित हो
- VIP का नाम सार्वजनिक हो और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो। स्वामी दर्शन भारती ने
- कहा कि दोषी जेल में हैं, लेकिन VIP बच नहीं सकता। हरीश रावत ने FIR में देरी और साक्ष्य नष्ट होने पर सवाल उठाए।
न्याय की पुकार जारी
अंकिता भंडारी का बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। महापंचायत ने स्पष्ट किया कि जनता अब थक नहीं रही। सरकार को पारदर्शी जांच सुनिश्चित करनी होगी। अगर VIP शामिल है तो उसे बेनकाब किया जाए। अंकिता के माता-पिता की मजबूती हमें प्रेरित करती है।









