अमेरिका-ईरान तनाव : मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर आसमान छू रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते विवाद के बीच पेंटागन में अमेरिका और इजरायल के शीर्ष सैन्य अधिकारियों की बंद कमरे में गुप्त बैठक हुई है। यह बैठक शुक्रवार (1 फरवरी 2026) को हुई, जिसके बाद क्षेत्र में युद्ध की आशंका और तेज हो गई है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने रविवार को चेतावनी दी कि अमेरिका का कोई भी हमला क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है। क्या अमेरिका ईरान पर बड़ा अटैक प्लान कर रहा है? आइए जानते हैं पूरी खबर।
पेंटागन में सीक्रेट मीटिंग: क्या हुआ चर्चा?
अमेरिकी अधिकारियों ने रविवार को रॉयटर्स को बताया कि बैठक पेंटागन में हुई, जिसमें अमेरिका के जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ चेयरमैन जनरल डैन केन और इजरायल के आर्म्ड फोर्सेस चीफ ऑफ स्टाफ आयल जमीर शामिल हुए। बैठक बंद कमरे में हुई और इसकी कोई आधिकारिक जानकारी पहले जारी नहीं की गई थी।

अधिकारियों ने डिटेल्स नहीं बताए, लेकिन बैठक का मुख्य फोकस ईरान रहा। अमेरिका ने हाल ही में मिडिल ईस्ट में अपनी नौसेना और एयर डिफेंस को मजबूत किया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विमानवाहक पोत अब्राहम लिंकन के नेतृत्व में बड़ा नौसैनिक बेड़ा ईरान की ओर भेजा है। ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ समझौते का समय तेजी से खत्म हो रहा है।
- बैठक के बाद आयल जमीर वॉशिंगटन से लौटे और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू तथा
- अन्य सुरक्षा अधिकारियों से मिले। यहां इजरायल की सैन्य तैयारियों और क्षेत्रीय हालात की समीक्षा हुई।
- कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि इजरायल अमेरिका से ईरान पर हमले की मांग कर रहा है
- जबकि ट्रंप कड़ी कूटनीति पर जोर दे रहे हैं।
ईरान की कड़ी चेतावनी: क्षेत्रीय युद्ध होगा!
#ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने रविवार को साफ कहा, “ईरान युद्ध की शुरुआत नहीं करेगा और किसी देश पर हमला करने की मंशा नहीं रखता। लेकिन अगर कोई हमला करता है, तो ईरानी जनता करारा जवाब देगी। अमेरिकियों को समझ लेना चाहिए कि अगर युद्ध छेड़ा गया, तो यह क्षेत्रीय युद्ध होगा।”
- ईरान ने अमेरिका के हमले की स्थिति में बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है।
- ईरान के परमाणु ठिकानों की सैटेलाइट तस्वीरों से अमेरिका में टेंशन बढ़ी है, जहां किलेबंदी बढ़ाई गई है।
तनाव के पीछे क्या कारण?
- ईरान का परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल विकास।
- क्षेत्रीय संघर्ष, जिसमें ईरान समर्थित ग्रुप्स की भूमिका।
- अमेरिका-इजरायल की संयुक्त रणनीति ईरान को काबू में करने की।
- ट्रंप प्रशासन की कड़ी नीति, जिसमें पुराने न्यूक्लियर डील को रद्द करने की बातें।
सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों ने ट्रंप को ईरान पर हमला न करने की सलाह दी है, लेकिन सैन्य तैनाती बढ़ने से स्थिति नाजुक है।
क्या होगा आगे?
- यह बैठक और ट्रंप की चेतावनियां बताती हैं कि अमेरिका-इजरायल ईरान के खिलाफ सैन्य विकल्पों
- पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। ईरान ने जवाबी हमले की तैयारी दिखाई है।
- अगर कोई बड़ा कदम उठता है, तो पूरा मिडिल ईस्ट प्रभावित हो सकता है।
- दुनिया की नजरें अब वाशिंगटन और तेहरान पर टिकी हैं – क्या कूटनीति जीतेगी या युद्ध?









