मणिपुर में राष्ट्रपति शासन : मणिपुर की राजनीति में बड़ा उलटफेर होने वाला है। लगभग एक साल से राज्य में लागू राष्ट्रपति शासन अब समाप्त होने की कगार पर है। 12 फरवरी 2026 को राष्ट्रपति शासन की मियाद पूरी हो रही है, जिसके बाद राज्य में चुनी हुई सरकार बनने की मजबूत संभावना जताई जा रही है। इसी बीच सोमवार (2 फरवरी 2026) को मणिपुर के एनडीए के 20 से अधिक विधायक, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अधिकारीमयूम शारदा देवी सहित दिल्ली पहुंच चुके हैं। यहां केंद्रीय नेतृत्व के साथ महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है, जहां नई सरकार गठन पर फैसला हो सकता है।
राष्ट्रपति शासन की पृष्ठभूमि
मणिपुर में मई 2023 से मेइती और कुकी-जो समुदायों के बीच जातीय हिंसा जारी है। इस हिंसा में 260 से ज्यादा लोग मारे गए और हजारों बेघर हो गए। पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने फरवरी 2025 में इस्तीफा दिया था, जिसके बाद 13 फरवरी 2025 को राष्ट्रपति शासन लागू किया गया। विधानसभा को निलंबित (सस्पेंडेड एनिमेशन) कर दिया गया। राष्ट्रपति शासन को छह महीने के लिए बढ़ाया गया था, जो अब 12 फरवरी 2026 को खत्म हो रहा है।

60 सदस्यीय मणिपुर विधानसभा का कार्यकाल 2027 तक है, लेकिन पिछले एक साल से कोई चुनी हुई सरकार नहीं है। केंद्र सरकार ने हालात सुधारने की कोशिश की, लेकिन स्थानीय स्तर पर दबाव बढ़ता गया।
NDA विधायकों की दिल्ली बैठक: क्या है प्लान?
भाजपा हाईकमान ने सभी एनडीए विधायकों को दिल्ली बुलाया है। इसमें भाजपा के 37 विधायक, एनपीपी के 6, एनपीएफ के 5 विधायक शामिल हैं। कुल मिलाकर एनडीए के पास स्पष्ट बहुमत है। बैठक सोमवार शाम को होने की संभावना है, हालांकि एजेंडा आधिकारिक तौर पर घोषित नहीं किया गया।
पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने इंफाल एयरपोर्ट पर कहा, “सभी एनडीए सहयोगी दलों के विधायकों को बुलाया गया है। मुझे सकारात्मक परिणाम की उम्मीद है।” उन्होंने आगे कहा कि सरकार बनना निरंतर प्रक्रिया है और उन्होंने अपने कार्यकाल में हालात सुधारने की पूरी कोशिश की।
- भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अधिकारीमयूम शारदा देवी ने कहा, “राजग के सभी विधायकों को बुलाया गया है।
- हमें उम्मीद है कि जनता की सरकार बनेगी।” अन्य विधायकों जैसे एस राजन सिंह
- एच डिंगो और एनपीपी के लोरहो एस पफोजे ने भी सकारात्मक संकेत दिए हैं।
- हालांकि, कुछ विधायकों ने कहा कि एजेंडा स्पष्ट नहीं है, लेकिन बैठक महत्वपूर्ण है।
नई सरकार गठन की संभावना और चुनौतियां!
केंद्रीय नेतृत्व बैठक में मुख्यमंत्री चेहरे का चयन कर सकता है। राज्य की वर्तमान स्थिति का जायजा लेकर फैसला होगा। अगर सहमति बनती है, तो अगले कुछ दिनों में नई सरकार गठन हो सकता है। एनडीए के पास बहुमत होने से सरकार बनना आसान लग रहा है।
- लेकिन चुनौतियां भी हैं। कुकी-जो समुदाय के कुछ संगठनों ने कहा है
- कि वे वैली क्षेत्रों में सरकार गठन का समर्थन नहीं करेंगे। जातीय तनाव अभी भी बना हुआ है।
- केंद्र को सभी पक्षों को साथ लेकर आगे बढ़ना होगा।
मणिपुर के लिए क्या मतलब?
- नई सरकार से राज्य में शांति बहाली, विकास कार्य और सामान्य स्थिति की उम्मीद है।
- पिछले एक साल में प्रशासनिक काम केंद्र के हाथ में थे, लेकिन चुनी हुई सरकार से स्थानीय मुद्दों
- पर बेहतर फोकस होगा। विधायकों की दिल्ली यात्रा से साफ है
- कि केंद्र सरकार अब राष्ट्रपति शासन खत्म कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया बहाल करना चाहती है।
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