डोनाल्ड ट्रंप : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपनी सख्त विदेश नीति का प्रदर्शन किया है। 29 जनवरी 2026 को उन्होंने एक महत्वपूर्ण एग्जीक्यूटिव ऑर्डर (कार्यकारी आदेश) पर हस्ताक्षर किए, जिसमें क्यूबा को तेल की आपूर्ति करने वाले किसी भी देश पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की व्यवस्था की गई है। यह कदम क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार पर आर्थिक दबाव बढ़ाने का सबसे बड़ा प्रयास माना जा रहा है। ट्रंप ने इस आदेश के जरिए अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने का आरोप लगाते हुए क्यूबा को “असाधारण खतरा” घोषित किया है।
ट्रंप के कार्यकारी आदेश की मुख्य बातें क्या हैं?
ट्रंप प्रशासन ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट के तहत यह राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया है। आदेश के अनुसार, यदि कोई विदेशी देश प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से क्यूबा को तेल बेचता या उपलब्ध कराता है, तो उसके उत्पादों पर अमेरिका में आयात होने वाले सामान पर अतिरिक्त एड वेलोरम ड्यूटी (मूल्य आधारित टैरिफ) लगाई जा सकती है।

ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए लिखा, “क्यूबा को अब कोई तेल या पैसा नहीं जाएगा – जीरो!” उन्होंने क्यूबा सरकार को सलाह दी कि वह सौदा कर ले, क्योंकि देश असफलता के कगार पर पहुंच चुका है।
आदेश में क्यूबा पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं:
- रूस, चीन और ईरान जैसे “शत्रुतापूर्ण” देशों के साथ गठजोड़।
- हमास और हिजबुल्लाह जैसे आतंकवादी संगठनों को समर्थन।
- अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के लिए खतरा।
- यह आदेश वाणिज्य विभाग और विदेश विभाग को अधिकार देता है
- कि वे तय करें कि किस देश पर कितना टैरिफ लगाया जाए। हालांकि
- अभी विशिष्ट दरें या देशों के नाम स्पष्ट नहीं किए गए हैं, लेकिन इसका मुख्य निशाना मेक्सिको
- रूस और अन्य संभावित सप्लायर लग रहे हैं।
क्यूबा की तेल आपूर्ति पर क्या असर पड़ेगा?
क्यूबा लंबे समय से तेल आयात पर निर्भर है, क्योंकि उसके पास अपनी पर्याप्त उत्पादन क्षमता नहीं है। हाल के वर्षों में:
- वेनेजुएला से तेल की आपूर्ति जनवरी 2025 में निकोलस मादुरो की अमेरिकी गिरफ्तारी के बाद पूरी तरह बंद हो गई।
- मेक्सिको पिछले कुछ महीनों में क्यूबा के कुल तेल आयात का करीब 44% हिस्सा प्रदान कर रहा था।
- पेमेक्स (मेक्सिको की सरकारी तेल कंपनी) ने 2025 के पहले 9 महीनों में
- औसतन 20,000 बैरल प्रतिदिन तेल सप्लाई किया था।
- रूस का योगदान लगभग 10% था।
- ट्रंप के इस आदेश के बाद मेक्सिको ने क्यूबा को तेल की आपूर्ति अस्थायी रूप से रोक दी है।
- मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाउम ने कहा कि यह अमेरिकी दबाव का नतीजा नहीं
- बल्कि “आवश्यकता के अनुसार लिया गया फैसला” है। उन्होंने क्यूबा के साथ एकजुटता
- जताई, लेकिन ईंधन संकट से निपटने के लिए विकल्प तलाशने की बात कही।
इससे क्यूबा में ईंधन संकट और गहरा गया है। 1959 की क्रांति के बाद यह सबसे गंभीर आर्थिक संकट माना जा रहा है। बिजली कटौती, खाद्य और पानी की आपूर्ति में रुकावटें बढ़ गई हैं। क्यूबाई राजनयिकों ने अमेरिका पर “कैरिबियन में अंतरराष्ट्रीय डकैती” का आरोप लगाया है।
ट्रंप की क्यूबा नीति का व्यापक संदर्भ
- #ट्रंप का यह कदम उनकी दूसरी पारी में क्यूबा के खिलाफ जारी अभियान का हिस्सा है।
- पहले भी उन्होंने क्यूबा पर सख्त प्रतिबंध लगाए थे। अब वेनेजुएला पर नियंत्रण के बाद क्यूबा को
- अलग-थलग करने की रणनीति तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है
- कि यह कदम क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार को कमजोर करने और संभावित बदलाव की दिशा में है।
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि क्यूबा के साथ गठजोड़ वाले देश अमेरिकी हितों के खिलाफ काम कर रहे हैं। यदि क्यूबा या प्रभावित देश अमेरिकी नीतियों के अनुरूप कदम उठाते हैं, तो आदेश में संशोधन की गुंजाइश रखी गई है।
क्या बदलेगा वैश्विक परिदृश्य?
ट्रंप का यह कार्यकारी आदेश न केवल क्यूबा बल्कि लैटिन अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय तेल व्यापार पर असर डाल सकता है। मेक्सिको जैसे सहयोगी देशों पर दबाव बढ़ेगा, जबकि रूस और चीन जैसे देशों के साथ तनाव और गहरा सकता है। क्यूबा के लोग पहले से ही आर्थिक मुश्किलों से जूझ रहे हैं, और यह संकट उनकी जिंदगी को और प्रभावित करेगा।








