साइबेरिया से ठंडी हवा : 2025 के इस सर्दी के मौसम में कर्नाटक में सामान्य से अधिक ठंडक महसूस की जा रही है। इसका कारण La Nina नामक वैश्विक जलवायु घटनाक्रम, साइबेरिया से आने वाली ठंडी और शुष्क हवा, और स्थानीय जलवायु विज्ञान के भी कारण हैं। इस ब्लॉग में हम विस्तार से समझेंगे कि कैसे ये सारे कारण मिलकर कर्नाटक के ठंडे मौसम को प्रभावित कर रहे हैं, और इस सर्दी के दौरान लोगों को किन बातों का खास ध्यान रखना चाहिए।
La Nina क्या है और इसका असर
La Nina एक जलवायु पैटर्न है जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से के सतही पानी का तापमान सामान्य से नीचे चला जाता है। यह स्थिति वैश्विक वायुमंडलीय परिस्थितियों को प्रभावित करती है, जिससे दक्षिण एशिया समेत भारत के ठंडे मौसम में बदलाव आता है। 2025-26 के सर्दी के मौसम में La Nina की स्थिति सक्रिय रहने से कर्नाटक सहित कई हिस्सों में ठंडक और अधिक बढ़ गई है। विशेषज्ञों के अनुसार La Nina के कारण भारत के उत्तरी और दक्षिणी भागों में ठंडे और शुष्क मौसम के अधिक दिन देखने को मिल रहे हैं, जो सामान्य सर्दियों से अलग है।

साइबेरिया से ठंडी और शुष्क हवा का प्रभाव
कर्नाटक में सर्दी के मौसम में ठंडी हवा का आना सामान्य है, लेकिन इस बार साइबेरिया और मध्य एशिया से असामान्य रूप से ठंडी और शुष्क हवा आ रही है। यह हवा वैश्विक जलवायु प्रणाली में बदलाव के कारण प्रवाहित हो रही है और यह कर्नाटक की स्थानीय जलवायु के साथ मिलकर तापमान को और अधिक गिरा रही है। ठंडी हवा न केवल रात के तापमान को कम करती है बल्कि दिन के दौरान भी मौसम को ठंडा रखती है। इसके कारण कर्नाटक के विभिन्न इलाकों में खासकर बीजापुर, कलबुर्गी जैसे स्थानों पर असामान्य ठंड अनुभव की जा रही है।
स्थानीय जलवायु विज्ञान की भूमिका
स्थानीय भौगोलिक स्थिति और वातावरण की शारीरिक क्रियाएं कर्नाटक की ठंडक को प्रभावित करती हैं। मालनाड क्षेत्र में पहाड़ी इलाकों की वजह से सुबह के समय कोहरा और नमी अधिक होती है, जो ठंडक की अनुभूति को बढ़ाती है। इसके अतिरिक्त, उच्च दबाव वाली प्रणालियाँ जो सर्दी में मध्य भारत में बनती हैं, वे ठंडी हवा को दक्षिण की ओर धकेलती हैं। ऐसे में कर्नाटक के मैदानी हिस्से और पहाड़ी क्षेत्र दोनों में तापमान में गिरावट देखने को मिलती है।
सर्दी से जुड़ी चुनौतियां और सावधानियां!
- 2025 की इस सर्दी में बढ़ती ठंड से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं जैसे सर्दी, जुकाम, सांस की बीमारियां बढ़ सकती हैं।
- विशेषकर बुजुर्गों, बच्चों और अस्वस्थ लोगों को सावधानी बरतनी बेहद जरूरी है। इसके अलावा
- खेती पर भी ठंड के कारण प्रभाव पड़ता है, खासकर रबी की फसलों पर। किसानों को चाहिए
- कि वे मौसम के अनुसार फसलों की सुरक्षा करें और जरूरी सावधानी बरतें।
साथ ही, ठंड के मौसम में ऊर्जा की खपत बढ़ जाती है जिससे बिजली का दबाव भी बढ़ता है। घरों में ऊष्मा बनाए रखने के लिए उचित पोशाक, कंबल और ग्रीटर का इस्तेमाल जरूरी है। कोहरे के कारण सुबह समय ट्रैफिक और यात्राओं में सावधानी बरतनी चाहिए।
भविष्य का मौसम पूर्वानुमान
- मौसम विज्ञानियों का अनुमान है कि La Nina की स्थिति अगले कुछ महीनों में बनी रहेगी
- जिससे कर्नाटक समेत भारत के कई हिस्सों में ठंडी और शुष्क हवा बनी रहेगी। इस स्थिति को देखते हुए
- सरकार और स्थानीय प्रशासन को भी तैयार रहना होगा ताकि लोगों को ठंड से सुरक्षा मिल सके।
- साथ ही, किसानों के लिए भी मौसम से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराना आवश्यक होगा ताकि वे उपयुक्त कदम उठा सकें।












