MCD दिल्ली उपचुनाव में आम आदमी पार्टी के बड़े नेता जैसे अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और संजय सिंह प्रचार में सक्रिय नहीं हैं, जिससे बीजेपी को वॉकओवर मिलने की चर्चा हो रही है। AAP ने उपचुनाव की कमान स्थानीय नेताओं को सौंपी है, और हाईकमान की दूरी को रणनीति और मजबूरी दोनों माना जा रहा है। वहीं बीजेपी ने पूरी ताकत से प्रचार शुरू कर रखा है, जिसमें मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता खुद मैदान में हैं।
दिल्ली MCD उपचुनाव BJP ने MCD उपचुनाव में बढ़ाई प्रचार की गति
दिल्ली MCD उपचुनाव में बीजेपी ने प्रचार की गति तेज कर दी है। पार्टी के मंत्री, सांसद और विधायक घर-घर जाकर डोर टू डोर प्रचार कर रहे हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कई जगहों पर जनता को संबोधित करते हुए कार्यकर्ताओं से समर्थन बढ़ाने की अपील की है। बीजेपी रणनीति के तहत संगठनात्मक ताकत से मतदान बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। पार्टी को उम्मीद है कि इस मजबूत प्रचार अभियान से ज्यादातर वार्डों पर जीत हासिल होगी

AAP के शीर्ष नेता प्रचार से दूर
अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और संजय सिंह जैसे बड़े नेताओं ने उपचुनाव में प्रचार नहीं किया है। वे पंजाब और अन्य स्थानों पर व्यस्त हैं, जिससे दिल्ली में पार्टी की कमज़ोरी दिख रही है। इससे AAP प्रत्याशियों को समर्थन का नुकसान हो रहा है।
प्रचार के लिए कमान प्रदेश नेताओं के हाथ
AAP ने उपचुनाव की ज़िम्मेदारी प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज और दुर्गेश पाठक जैसे स्थानीय नेताओं को सौंप रखी है। ये नेता रोज़ाना 5-7 जनसभाएं कर रहे हैं, लेकिन शीर्ष नेतृत्व की गैर-मौजूदगी सवाल खड़े कर रही है।
सोशल मीडिया पर भी खामोशी
केजरीवाल और अन्य नेताओं ने सोशल मीडिया पर भी उपचुनाव को लेकर कोई सक्रियता नहीं दिखाई है। न फेसबुक और न ही X (ट्विटर) पर उपचुनाव की कोई पोस्ट या अपील नजर आई है।
पंजाब पर फोकस ज्यादा
AAP के बड़े नेता पंजाब की सत्ता बचाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। 2027 विधानसभा चुनावों की चर्चा और दिल्ली में हार के बाद उनकी प्राथमिकता पंजाब बनी हुई है।
रणनीति या मजबूरी?
कई विशेषज्ञ इसे चुनाव प्रचार से दूरी बनाने की रणनीति मानते हैं
ताकि पार्टी की हार का ठीकरा शीर्ष नेतृत्व पर न फूटे।
यह चुनाव AAP के लिए जोखिम भरा माना जा रहा है।
बीजेपी ने प्रचार तेज़ किया है
#बीजेपी ने मंत्री, सांसद और विधायक घर-घर जाकर डोर टू डोर प्रचार तेज़ कर दिया है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता खेल को संभाले हुए हैं और पूरे दमखम से काम कर रही हैं।
बीजेपी को मिल रहा है फायदा
बीजेपी की इस सक्रियता के कारण उन्हें उपचुनाव में बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।
पार्टी अपने कोर वोट को मजबूत कर रही है और सत्ता के प्रभाव का इस्तेमाल कर रही है।
AAP का लोकल नेतृत्व सक्रिय
जहां टॉप नेता गायब हैं, वहीं स्थानीय AAP नेताओं की मेहनत जारी है,
लेकिन यह प्रयास बड़े नेताओं के प्रचार की भरपाई नहीं कर पा रहा।
कांग्रेस भी मैदान में
कांग्रेस ने भी बीजेपी और AAP दोनों की कमजोरियों को मुद्दा बनाकर प्रचार बढ़ाया है,
जिससे मुकाबला तीन धुरी का हो गया है।
उपचुनाव का राजनीतिक महत्व
ये उपचुनाव दिल्ली में सत्ता की लड़ाई का पहला बड़ा परीक्षण हैं।
AAP के लिए हार राजनीतिक दबाव बढ़ा सकती है,
जबकि बीजेपी अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखने में जुटी है।
निष्कर्ष
दिल्ली MCD उपचुनाव में आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेताओं की चुप्पी और बीजेपी के प्रचार अभियान की तेज़ी ने राजनीतिक माहौल को काफी प्रभावित किया है। बीजेपी ने पूरी ताकत से डोर टू डोर कैंपेन छेड़ा है, जबकि AAP के बड़े नेता प्रचार से दूरी बनाए हुए हैं, जिसका फायदा बीजेपी को मिल रहा है। AAP का फोकस पंजाब जैसे अन्य राज्यों की राजनीति पर होने के कारण दिल्ली में कम सक्रियता दिखा रही है। इसके बावजूद स्थानीय AAP नेता कमान संभाले हुए हैं, पर शीर्ष नेतृत्व की गैर-मौजूदगी पार्टी के लिए चुनौती बनी हुई है। इस उपचुनाव का नतीजा दिल्ली की आगामी सियासी तस्वीर पर प्रभाव डालेगा और दोनों पार्टियों के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा साबित होगा









