तेजस्वी कैंप में घमासान : बिहार की राजनैतिक गलियारों में इस वक्त तेजस्वी यादव के कैंप में सियासी तूफान मचा हुआ है। आरजेडी की विधायक दल की हालिया बैठक में पार्टी के अंदरूनी मतभेद आमने-सामने आ गए। पटना के पोलो रोड स्थित तेजस्वी यादव के आवास पर हुई बैठक में पार्टी के कार्यकर्ताओं ने संजय यादव के खिलाफ नारे लगाते हुए कहा, “संजय यादव हरियाणा जाओ”। यह घटना तेजस्वी यादव के करीबी सलाहकार और आरजेडी के राज्यसभा सांसद संजय यादव को लेकर बढ़ते विरोधों का आईना है।
संजय यादव को लेकर विवाद और आरोप
संजय यादव, जो तेजस्वी यादव के सबसे भरोसेमंद राजनीतिक सलाहकार माने जाते हैं, उन पर आरोप लगे हैं कि वे पार्टी के पुराने काडर और नेताओं को नजरअंदाज कर तेजस्वी की राजनीतिक फैसलों में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। तेजस्वी की बहन और राजद की नेता रोहिणी आचार्य ने भी संजय यादव पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे पार्टी के अंदर परिवार में तनाव गहरा गया है। तेजस्वी यादव के दोनों बड़े भाई तेज प्रताप यादव और बहन रोहिणी आचार्य ने संजय को पार्टी का ‘जयचंद’ तक कह डाला है।

तेजस्वी यादव का संजय यादव के प्रति समर्थन
मीटिंग में जब संजय यादव के खिलाफ नारेबाजी हुई, तब तेजस्वी यादव ने खुद उनके बचाव में सामने आकर कहा कि संजय ने पार्टी के लिए बहुत मेहनत की है और उन्हें निशाना बनाना उचित नहीं है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि संजय यादव की मेहनत को पार्टी के बाहर के लोग नहीं समझते हैं। इस बीच तेजस्वी ने खुद विधायक दल का नेता बनने से भी इनकार किया और कहा कि वे अब एक साधारण विधायक बनकर काम करना चाहते हैं, लेकिन अंततः पार्टी के दबाव में उन्होंने नेतृत्व संभालने की सहमति दी।
परिवार में खींचातानी और राजनीति
- लालू प्रसाद यादव के परिवार में इस चुनावी हार के बाद खुला विवाद सामने आ चुका है।
- तेजस्वी के करीबी सलाहकारों के आलावा परिवार के सदस्य भी एक-दूसरे से दूर हो चुके हैं।
- रोहिणी आचार्य की पार्टी से दूरी ने इस विवाद को और बढ़ा दिया है। तेज प्रताप यादव की पार्टी से
- अलगाव और खुली लड़ाई ने आरजेडी के अंदर तनाव को असहनीय बना दिया है।
भविष्य की राजनीति और चुनौती
- आरजेडी को अब अपने अंदरूनी मतभेदों को खत्म कर पार्टी को मजबूत करना होगा, वरना अगली लड़ाई
- बड़ी मुश्किल हो सकती है। तेजस्वी यादव को अपने करीबी के प्रति समर्थन के साथ ही पार्टी के
- पुराने काडर को भी साधना होगा। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, बिहार की सियासत में यह विवाद
- आरजेडी की छवि प्रभावित कर सकता है और आगामी चुनावों की रणनीति पर असर डाल सकता है।









