डिप्रेशन memoir : दक्षिण कोरिया की मशहूर लेखक और आत्मकथा “I Want to Die But I Want To Eat Tteokbokki” (मैं मरना चाहता हूँ लेकिन ट्टोकबोकी खाना चाहता हूँ) की लेखिका बैक से-ही का 35 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। उनका निधन कोरियन अंग दान एजेंसी ने 16 अक्टूबर 2025 को आधिकारिक रूप से पुष्टि की। उनके निधन के कारणों का खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन उन्होंने अपने लेखन के जरिए मानसिक स्वास्थ्य और डिप्रेशन की गहराइयों को समाज के सामने लाने का एक महत्वपूर्ण कार्य किया।
डिप्रेशन memoir लेखन में संघर्ष और उम्मीद की कहानी

बैक से-ही की आत्मकथा 2018 में प्रकाशित हुई थी और यह अपने स्पष्ट और संवेदनशील व्यक्तिगत अनुभवों के कारण दक्षिण कोरिया में बेहद लोकप्रिय हुई। इस पुस्तक में उन्होंने एक मानसिक रोग विशेषज्ञ के साथ अपने संवादों की कहानी बयान की, जहां वे अपनी जटिल भावनाओं—जो जीवन खत्म करने की इच्छा और सरल जीवन की खुशियों के बीच जूझ रही थीं—को बयां करती हैं। उनके अनुभव हर किसी के लिए मानवीय संघर्ष और आशा का सजीव चित्र प्रस्तुत करते हैं।
English में अनुवादित और वैश्विक पहचान
- 2018 की इस पुस्तक का अंग्रेजी में अनुवाद 2022 में हुआ, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसे बहुत प्रशंसा दिलाई।
- इसे ब्रिटेन के Sunday Times Bestsellers List में जगह मिली और New York Times ने भी इसका उल्लेख किया।
- इस सफलता ने बैक से-ही को केवल दक्षिण कोरिया तक सीमित न रखते हुए विश्वभर में
- मानसिक स्वास्थ्य मुद्दों पर वार्ता शुरू करने का अवसर दिया।
- उनकी दूसरी आत्मकथा “Want to but I Want to Tteokbokki” 2019 में आई
- जिसमें उन्होंने अपने बोझिल मानसिक स्वास्थ्य अनुभवों को और गहराई से साझा किया।
- यह पुस्तक डिस्टाइमिया (लंबे समय तक रहने वाली हल्की डिप्रेशन की स्थिति) पर केंद्रित थी।
जीवन परिचय
- बैक से-ही का जन्म 1990 में दक्षिण कोरिया में हुआ था। वह तीन बेटियों में से दूसरी थीं।
- उन्होंने विश्वविद्यालय में रचनात्मक लेखन की पढ़ाई की। एक प्रसिद्ध प्रकाशन कंपनी में सोशल मीडिया
- डायरेक्टर के रूप में काम करते हुए, उन्होंने डिप्रेशन का इलाज शुरू किया और अपने व्यक्तिगत अनुभवों को लिखने के जरिए साझा किया।
परिवार का संदेश और अंगदान
- उनकी मृत्यु के बाद उनकी बहन बैक दा-ही ने एक भावुक बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने लिखा कि बैक से-ही
- ने अपने लिखने के माध्यम से अपने दिल के जज़्बात दूसरों तक पहुंचाए और उम्मीदों के सपने जगाने की कोशिश की।
- उन्होंने कहा, ” “I her kind, one loved so hated no, so hope she in peace heaven. love you much.
- उनकी इच्छा के अनुरूप उन्होंने अपनी मृत्यु के बाद अपने दिल, फेफड़े, जिगर और दोनों किडनियां दान कर पांच लोगों की जान बचाई।
- उनके अंग्रेजी अनुवादक एंटोन हुन ने भी सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और लिखा कि बैक के अद्भुत लेखन ने लाखों लोगों को छुआ है।
मानसिक स्वास्थ्य और साहित्य का संगम
- बैक से-ही की जीवन कहानी और साहित्य ने मानसिक स्वास्थ्य को सामान्य वार्ता का हिस्सा बनाने में
- महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके अनुभवों से प्रेरित होकर कई लोग अपनी मानसिक चुनौतियों को स्वीकारने
- और उनके बारे में खुलकर बात करने में समर्थ हुए हैं। उनका लेखन एक प्रेरणा स्रोत के रूप में काम करता है
- जो उन लोगों के लिए उम्मीद जगाता है जो मानसिक संघर्ष का सामना कर रहे हैं।
- बैक से-ही की मृत्यु साहित्य और मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता के क्षेत्र में एक बड़ी क्षति है। उनकी जीवन और
- लेखन ने समाज की जटिलताओं को सामने लाकर हमें सहानुभूति और समझ की दिशा में प्रेरित किया।
- उनके अतिशय संवेदनशील और सच्चे लेखन ने सिर्फ दक्षिण कोरिया ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में
- लाखों दिलों को छुआ और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाई।












