अन्नामलाई का आइकॉन कलाम न गांधी न पेरियार अन्नामलाई ने अब्दुल कलाम को क्यों चुना अपना आइकॉन? पूरी इनसाइड स्टोरी!

On: June 6, 2026 8:30 AM
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अन्नामलाई का आइकॉन कलाम

अन्नामलाई का आइकॉन कलाम तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा भूकंप आ गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व IPS अधिकारी के. अन्नामलाई ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया और तुरंत एक नया राजनीतिक आंदोलन शुरू कर दिया। लेकिन सबसे दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने महात्मा गांधी या पेरियार जैसे पारंपरिक आइकॉन्स को नहीं, बल्कि डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को अपना वैचारिक प्रतीक चुना है।

यह फैसला तमिलनाडु की पहचान-आधारित राजनीति में एक ताज़ा हवा की तरह है। आइए जानते हैं पूरी कहानी, अन्नामलाई के विजन और कलाम साहब को चुनने के पीछे की वजह।

अन्नामलाई का आइकॉन कलाम
#अन्नामलाई का आइकॉन कलाम न गांधी, न पेरियार! अन्नामलाई ने अब्दुल कलाम को चुना अपना आदर्श।

अन्नामलाई का नया सफर: ‘वी द लीडर’ आंदोलन

#अन्नामलाई ने बीजेपी छोड़ने के कुछ घंटों के अंदर ही ‘वी द लीडर’ (We The Leader) नाम का नया आंदोलन लॉन्च कर दिया। यह आंदोलन कोयंबटूर में स्थापित होने वाले एपीजे अब्दुल कलाम सेंटर फॉर एथिक्स एंड पॉलिटिक्स के तहत काम करेगा।

  • घोषणा के महज 10 घंटे में 10 लाख से ज्यादा लोग इस आंदोलन से जुड़ चुके हैं
  • जो तमिलनाडु की राजनीति में एक रिकॉर्ड है। अन्नामलाई ने इसे
  • कलाम स्कूल ऑफ आइडियोलॉजी पर आधारित बताया है।

अन्नामलाई का आइकॉन कलाम कार्ड क्यों है मास्टरस्ट्रोक?

तमिलनाडु में दशकों से द्रविड़ राजनीति का बोलबाला रहा है – पेरियार, अन्नादुराई, करुणानिधि, एमजीआर और जयललिता। यहां जाति, भाषा और क्षेत्रीय पहचान पर वोट बैंक की राजनीति होती रही।

ऐसे में डॉ. अब्दुल कलाम को चुनना अन्नामलाई का स्मार्ट कदम माना जा रहा है। कारण:

  • कलाम साहब अजातशत्रु नेता थे। द्रविड़ समर्थक, राष्ट्रवादी, अल्पसंख्यक, युवा – सभी उन्हें सम्मान देते हैं।
  • रामेश्वरम के साधारण तमिल मुस्लिम परिवार से निकलकर वे भारत के मिसाइल मैन और राष्ट्रपति बने। उन्होंने कभी अल्पसंख्यक कार्ड नहीं खेला, बल्कि शिक्षा, मेहनत और विज्ञान पर जोर दिया।
  • युवाओं में कलाम की लोकप्रियता बहुत ज्यादा है।

अन्नामलाई का मानना है कि तमिल संस्कृति पर गर्व और राष्ट्र के प्रति समर्पण एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं।

कलाम स्कूल ऑफ आइडियोलॉजी क्या है?

अन्नामलाई के अनुसार यह आंदोलन:

  • किसी खास जाति, धर्म या संप्रदाय को नहीं, बल्कि सामूहिक विकास पर फोकस करेगा।
  • पारिवारिक राजनीति और नेता-केंद्रित व्यवस्था का विरोध करेगा।
  • विज्ञान, तकनीक, शिक्षा और विकास-आधारित गवर्नेंस को बढ़ावा देगा।
  • सामाजिक सद्भाव और मनों का मिलन (Unity of Minds) पर जोर देगा।

यह आंदोलन धीरे-धीरे राजनीतिक दल का रूप लेगा और 2031 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव लड़ेगा।

अन्नामलाई का विजन: 30,000 ईमानदार नेता तैयार करना

अन्नामलाई ने साफ कहा कि एक CM, 234 MLA या 39 MP अकेले राज्य नहीं बदल सकते। बदलाव के लिए पंचायत स्तर से लेकर शीर्ष पदों तक करीब 30,000 ईमानदार और नए लोगों को तैयार करना होगा।

उनकी संस्था युवाओं को राजनीति में आने के लिए ट्रेनिंग देगी।

कैप्टन विजयकांत से मिला इंस्पिरेशन

  • अन्नामलाई ने अपने जीवन का एक पुराना किस्सा शेयर किया। 2009 में IIM लखनऊ
  • से MBA करते समय उन्होंने कैप्टन विजयकांत (DMDK संस्थापक)
  • के साथ 3 महीने की इंटर्नशिप की थी। जमीनी स्तर पर काम करने का यह अनुभव उनके राजनीतिक सफर की नींव बना।

बीजेपी इस्तीफे में बयां किया दर्द

अपने इस्तीफे में अन्नामलाई ने लिखा कि राष्ट्रीय दल तमिलनाडु के आम लोगों की भाषा नहीं बोल पाए। उन्होंने क्षेत्रीय आकांक्षाओं, तमिल भाषा और संस्कृति की विरासत पर गर्व जताया।

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  • कलाम सेंटर कोयंबटूर

नई राजनीति की शुरुआत?

अन्नामलाई का यह कदम तमिलनाडु में विकल्प की तलाश कर रहे युवाओं और उन लोगों को आकर्षित कर सकता है जो पारंपरिक वोट बैंक राजनीति से थक चुके हैं। कलाम साहब का सपना – भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का – अब अन्नामलाई के माध्यम से तमिलनाडु में नई ऊर्जा ले रहा है।

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